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1987 का विश्वकप नहीं होगा याद लेकिन सुनील गावस्कर की रिकॉर्ड पारी को आज भी नहीं भूल पाया कोई

भारतीय क्रिकेट टीम ने देश को पहला विश्वकप साल 1983 में दिलाया था। कपिल देव की कप्तानी में भारत को मिली यह उपलब्धि इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। साल 1987 में अगला विश्वकप भारत में खेला गया और भारत से उसी प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद जताई गई। लेकिन टीम देशवासियों के भरोसे पर खरी नहीं उतर सकी।

इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों भारत को हार का मुंह देखना पड़ा और टीम विश्वकप से बाहर हो गई। हालांकि इस मैच से ठीक पहले भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की थी और टीम के करिश्माई बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बेहतरीन रिकॉर्ड पारी खेली थी।

गावस्कर ने 1987 के इस विश्वकप के सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए जैसा खेल दिखाया। वह शायद फिर नहीं देखने को मिला। दरअसल साल 1987 के विश्वकप में लगातार सभी मैच जीतते हुए भारत ने सेमीफाइनल  तक का सफर तय किया लेकिन जिम्बॉब्वे के खिलाफ उसे काफी मेहनत करनी पड़ी थी जिसकी वजह से टीम का रनरेट काफी गिर गया था। गावस्कर पर धीमा खेलने का आरोप लगा।
जिसके बाद गावस्कर पर खुद को साबित करने और टीम को न्यूजीलैंड पर विशाल जीत दर्ज कराने की जिम्मेदारी थी।

इस मैच में न्यूजीलैंड की टीम ने भारत के सामने 221 रनों का स्कोर खड़ा किया था, जिसे भारत को मात्र 42.2 ओवर में ही हासिल करना था। भारत की तरफ से सुनील गावस्कर और कृष्णमाचारी श्रीकांत बल्लेबाज़ी करने उतरे थे औऱ दोनों ने टीम को आक्रामक शुरूआत दी।

7 ओवर खत्म होते होते सुनील गावस्कर ने जहां 30 रन, तो वहीं श्रीकांत ने 17 रन बना लिए थे। श्रीकांत 75 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। हालांकि गावस्कर ने इसका प्रेशर अपने ऊपर नहीं आने दिया और आक्रामक खेल जारी रखा। उन्होंने ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करते हुए मात्र 85 गेंदों में ही 100 रनों की शानदार पारी खेली। भारत मुकाबले को जीत कर अंतिम चार में पहुंच गया। हालांकि सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों मिली हार से भारतीय टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई।

गावस्कर की यह पारी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई क्योंकि उनके द्वारा बनाया गया यह शतक विश्वकप के इतिहास में उस समय का दूसरा सबसे तेज शतक था। जबकि इससे पहले साल 1975 में क्लाइव लॉयड ने वर्ल्डकप के फाइनल में 82 गेंदों में शतकीय पारी खेली थी।

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