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EXCLUSIVE : विदेशी पिचों पर मैं गेंदबाज़ों पर हावी रहना पंसद करता हूं – अजिंक्य रहाणे

भारतीय टेस्ट टीम के उपकप्तान और सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ अजिंक्य रहाणे आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने के बाद काउंटी क्रिकेट में हिस्सा लेने वाले हैं। भारतीय घरेलू क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ने के बाद रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खास पहचान बनाई है। टेस्ट क्रिकेट में मुंबई के इस बल्लेबाज़ ने न सिर्फ घरेलू मैदानों पर बल्कि विदेशों में भी विषम परिस्थितियों में रन बनाए हैं। उनके क्लासिकल शॉट्स और मजबूत तकनीक के सभी फैन हैं। रहाणे काउंटी क्लब हैम्पशायर से जुड़ने वाले पहले भारतीय हैं। रहाणे दक्षिण अफ्रीका के एडेन मारक्रम की जगह लेंगे जो विश्व कप से पहले अपनी राष्ट्रीय टीम से जुड़ेंगे। इंग्लैंड जाने से पहले रहाणे ने 100एमबी स्पोर्ट्स से खास बातचीत की।

काउंटी क्रिकेट में खेलने की प्रेरणा कहां से मिली?

रहाणे – जब हमने इंग्लैंड (2018) में आखिरी सीरीज खेली, तब हम साउथम्पटन में खेल रहे थे। मैदान में प्रवेश करते समय, मैंने दीवार पर शेन वार्न और मैल्कम मार्शल की तस्वीरें देखीं। यह देखने के बाद लगा कि मुझे भी काउंटी खेलना चाहिए जहां इतने महान क्रिकेटर खेल चुके हैं और फिर मुझे मौका मिल गया। मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि हैम्पशायर मुझे अपने साथ जोड़ना चाहता है। जब मैं हैम्पशायर में था, तब मैंने काउंटी क्रिकेट खेलने का सपना देखा था जो सच हो गया।

एजेस बाउल (हैम्पशायर का घरेलू मैदान) पर आपका अंतर्राष्ट्रीय रिकॉर्ड शानदार है (5 पारियों में 4 अर्द्धशतक)। काउंटी क्रिकेट से आपकी क्या उम्मीदें हैं?

रहाणे – मैं आंकड़ों के बारे में बहुत अधिक नहीं सोचता। जो हुआ वह अतीत में है लेकिन हां, मुझे उस मैदान पर खेलना पसंद है। मुझे वहां बल्लेबाजी करते हुए काफी सकारात्मक वाइब्स मिलीं। मैं पहली बार काउंटी खेलूंगा जिसे लेकर काफी उत्साहित हूं। एक विदेशी खिलाड़ी से अक्सर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है और उसपर कई जिम्मेदारियां होती हैं। मैं एक बल्लेबाज और क्रिकेटर के रूप में सीखने के लिए उत्सुक हूं।

रहाणे बतौर कप्तान और एक बल्लेबाज़ के रुप में कैसे अलग हैं ?

रहाणे – जब मैं बल्लेबाजी करता हूं तो मेरा ध्यान सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर केंद्रित रहता है। मुझे लगता है कि टीम के मैदान पर होने पर कप्तान की भूमिका बढ़ जाती है और आपको योजना और रणनीति बनानी होती है। कप्तानी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आप अपने खिलाड़ियों को कैसे सहज रखते हैं और कैसे उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। मेरा मानना ​​है कि जब खिलाड़ियों को पूरी टीम और उनके कप्तान का सपोर्ट मिलता है तो वे बिना किसी दवाब के खेलते हैं। मैंने उस पर बहुत ज़ोर दिया है।

आपका रन बनाने का औसत भारत के मुकाबले विदेशों में अधिक है, इस पर आपके क्या विचार हैं?

रहाणे – भारत में पलने बढ़ने के साथ हम घरेलू मैदानों और पिचों से अच्छी तरह वाकिफ होते हैं लेकिन विदेश की अलग-अलग पिचों पर हम कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। आपको स्विंग, गति और उछाल के लिए तैयार रहना पड़ता है। आपको अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढालना होता है। विदेशों में मैं डिफेंड करने के बजाय गेंदबाजों पर हावी रहने पर ज़ोर देता हूं। औसत ऊपर-नीचे होता रहेगा लेकिन मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है प्रक्रिया का पालन करना और सकरात्मक रवैये के साथ खेलना।

आप कठिन परिस्थितियों में किससे प्रेरणा लेते हैं?

रहाणे – किसी और की मदद लेने से अच्छा है खुद पर विश्वास करना। मैं अपनी क्षमताओं में विश्वास करता हूं और मुझे खुद पर भरोसा है कि मैं किसी भी परिस्थिति में अच्छा प्रदर्शन कर सकता हूं।

हमने आपको बहुत सारी किताबें पढ़ते हुए देखा है, आप किस प्रकार की किताबें पढ़ना पसंद करते हैं और अभी क्या पढ़ रहे ?

रहाणे – मुझे विभिन्न शैलियां पढ़ना पसंद है। मुझे अलग-अलग विषयों पर जानाकारी हासिल करना पसंद है और मैं अपने मूड के हिसाब से अलग-अलग किताबें पढ़ता हूं। आजकल मेरी रुचि ऐतिहासिक और फिलॉसफिकल किताबों में बढ़ गई है। मैं वर्तमान में ए पार्थसारथी की ‘द होलोकॉस्ट ऑफ अटैचमेंट’ और फिल नाइट की ‘शू डॉग’ पढ़ रहा हूं।

आप किसानों के परिवार से आते हैं, क्या खेत-खलियान से जुड़ी बचपन की कोई यादें हैं?

रहाणे – मुझे अपने गाँव (अश्वि खुर्द, अहमदनगर) में छुट्टियां बिताना याद है। मेरी दादी, जो अब 95 वर्ष की हैं, सुबह 5 बजे उठती थीं। मैं खेतों में उनके कामों में हाथ बंटाता था। दादी ने कभी खेतों में काम करने पर कोई शिकायत नहीं की और उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। मैं उनके इस रवैये से काफी प्रेरित था। मुझे लगता है कि हम कभी-कभी कम आंकते हैं कि हमारे किसान खेतों में कितनी मेहनत करते हैं। वे हमारे अन्नदाता हैं और हमें उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ता के लिए आभारी होना चाहिए।

आपने एक पोस्ट में अपनी पहली कार के लिए कैसे पैसे बचाए, इसका जिक्र किया था। इस बारे में और बताएं।

रहाणे – हां, मेरी पहली कार से जुड़ी बड़ी यादें हैं। मैं उन दिनों में मुंबई रणजी टीम में खुद को स्थापित कर रहा था। कार को खरीदने में मेरे पूरे परिवार ने मेरा साथ दिया। मुझे लगता है कि हमने लगभग 7-8 साल पैसै बचाए और कार खरीदी। यह एक अद्भुत अनुभव था। इसके बाद क्रिकेट ने मुझे सब कुछ दिया है और मैं इस खेल का बहुत सम्मान करता हूं।

आपको किस प्रकार की गाड़िया पसंद है ?

रहाणे –  मुझे सीडान गाड़िया चलाना बहुत पसंद है लेकिन जब भी क्रिकेट मैच प्रैक्टिस या किट बैग और सामान ज्यादा होता है तो एसयूवी में जाता हूं।

काउंटी क्रिकेट के साथ नई पारी का आगाज़ करने लिए शुभकामनाएं, हमें यकीन है आप सदा देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे।

रहाणे – शुक्रिया

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