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जन्मदिन विशेषः सौरव गांगुली के करियर की पांच यादगार पारियों पर डालें एक नजर

साल 1999-2000 में भारतीय टीम के सामने एक ऐसा दौरा था, जहां से निकलना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा था। फिक्सिंग प्रकरण के चलते टीम में मौजूद कई खिलाड़ियों पर गाज गिरने के अलावा बाकी के खिलाड़ियों का भी आत्मविश्वास बेहद कम हो चुका था।

ऐसे में भारतीय टीम को एक नई ऊर्जा और दिशा की जरूरत थी, जिससे टीम फिर पटरी वापस लौटते हुए बेहतर प्रदर्शन करे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम के नए कप्तान के रुप में सौरव गांगुली का चयन किया। उनका यह फैसला बेहद सफल साबित हुआ और टीम समय के साथ बेहद आक्रामक खेल दिखाते हुए विश्व क्रिकेट में एकबार फिर से अपनी बादशाहत को पाने में कामयाब हो सकी।

सौरव गांगुली ने टीम को ना सिर्फ घर पर अपनी कप्तानी में जीत दिलाने का काम किया, बल्कि विदेशी जमीन पर भी टीम ने सीरीज जीतना शुरू कर दिया था। साल 1990 में टीम का पहली बार हिस्सा बनने वाले सौरव गांगुली को 1996 में डेब्यू करने का मौका मिला और इसके बाद उन्होंने अपने करियर में फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

भारतीय क्रिकेट इतिहास में कप्तान के तौर पर सौरव गांगुली की अहमीयत काफी अधिक है, क्योंकि उन्होंने जिस कठिन हालात से टीम को बाहर निकाला वह आसान काम नहीं था। अब सौरव गांगुली इस समय भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर अपनी भूमिका को अदा कर रहे हैं। हम आपको इस आर्टिकल में गांगुली के 49वें जन्मदिन के मौके पर उनके करियर की टॉप-5 पारियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

1 – बनाम इंग्लैंड (साल 1996 लॉर्ड्स टेस्ट मैच, 131 रन)

प्रिंस ऑफ कोलकाता ने नाम से पहचान बनाने वाले सौरव गांगुली को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका साल 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए लॉर्ड्स टेस्ट मैच में मिला था। गांगुली को इस मैच में नंबर 3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया और मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने टीम की पहली पारी में शतक लगाते हुए अपने आने का ऐलान पूरे क्रिकेट जगत में कर दिया था।

गांगुली के साथ इस मैच में राहुल द्रविड़ ने भी डेब्यू किया था, जो शतक लगाने से सिर्फ 5 रनों से चूक गए थे। गांगुली की शतकीय पारी के चलते भारतीय टीम पहली पारी में 429 का स्कोर बनाने में कामयाब रही और अंत में यह टेस्ट मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ था।

2 – बनाम श्रीलंका (साल 1999 वनडे वर्ल्डकप, 183 रन)

इंग्लैंड में साल 1999 में खेले गए वनडे वर्ल्डकप में भारतीय टीम का सामना ग्रुप ए के लीग मैच में श्रीलंका के साथ था। गांगुली और द्रविड़ की जोड़ी ने एक बार फिर से इंग्लैंड में 3 साल के बाद अपना परचम लहराते हुए जहां मैच में 318 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी कर दी। गांगुली ने मैच में 7 छक्के और 17 चौकों की मदद से 183 रनों की पारी खेली जो उनके वनडे करियर की सर्वाधिक पारी भी रही। भारतीय टीम ने इस मैच को 157 रनों से अपने नाम किया था।

3 – बनाम दक्षिण अफ्रीका (साल 2000 आईसीसी नॉकआउट, 141 रन नाबाद)

आईसीसी नॉकआउट टूर्नामेंट का दूसरा संस्करण साल 2000 में खेला गया था। भारतीय टीम इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में अपनी जगह को पहले ही पक्का कर चुकी थी, जहां उसका मुकाबला उस दौर की बेहद मजबूत टीम मानी जाने वाली दक्षिण अफ्रीका के साथ था। सेमीफाइनल मैच में टॉस जीतने के बाद भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।

गांगुली ने कप्तानी पारी खेलते हुए 11 चौकों और 6 छक्कों की मदद से 141 रन बना दिए, जिससे टीम 50 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 295 रन बनाने में कामयाब रही थी। उस समय यह लक्ष्य किसी भी टीम के लिए हासिल करना आसान काम नहीं था और अफ्रीका टीम 200 के स्कोर पर सिमट गई।

4 – बनाम इंग्लैंड (साल 2002, नेटवेस्ट सीरीज फाइनल, 60 रन)

नेटवेस्ट ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला सभी भारतीय फैंस के दिलों में हमेशा याद रहेगा। गांगुली को लेकर इस मैच की सबसे बड़ी याद उनका लॉर्ड्स मैदान की प्लेयर बालकनी में जीत के बाद अपनी टी-शर्ट को हवा में लहराते हुए प्रतिक्रिया देना।

भारतीय टीम को इस मैच में जीत हासिल करने के लिए 326 रनों का लक्ष्य मिला। ऐसे में गांगुली के साथ पारी की शुरुआत करने आ रहे सहवाग पर काफी बड़ी जिम्मेदारी आ गई थी। दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 15 ओवरों के अंदर स्कोर 103 पर पहुंचा दिया था।

गांगुली 43 गेंदों में 60 रन बनाकर पवेलियन वापस लौटे। यहां से भारतीय टीम की स्थिति काफी खराब हो गई और टीम पर अचानक हार का खतरा मंडराने लगा था। इसके बाद युवा खिलाड़ी मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह की जोड़ी ने टीम को लक्ष्य की तरफ अग्रसर करते हुए जीत दिलाने का काम किया।

5 – बनाम दक्षिण अफ्रीका (साल 2008 कानपुर टेस्ट, 87 रन)

सौरव गांगुली खराब फॉर्म के चलते टीम से कुछ समय के लिए बाहर भी रहे। साल 2006 में गांगुली ने टीम में वापसी की थी, जिसके 2 साल बाद उन्होंने एक ऐसी पिच पर रन बनाए जिसपर बल्लेबाजी करना बेहद मुश्किल था।

साल 2008 में कानपुर में खेले गए गए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच की पिच स्पिन गेंदबाजी के लिए बेहद मददगार थी। मैच में अफ्रीका टीम की पहली पारी 265 के स्कोर पर सिमट गई। जवाब में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में गांगुली के 87 रनों की बदौलत 325 रन बनाने में कामयाब रही।

पहली पारी में मिली बढ़त का लाभ भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने उठाते हुए अफ्रीका टीम की दूसरी पारी को 121 रनों पर समेट दिया। भारत को मैच में जीत हासिल करने के लिए 62 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे टीम ने 1 विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया। गांगुली को उनकी शानदार पारी के लिए प्लेयर ऑफ दी मैच का खिताब भी दिया गया था।

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