close
DOWNLOAD 100MB MOBILE APP

डेवोन कॉनवे: वो बल्लेबाज जिसने गांगुली समेत तोड़ा 125 साल पुराना रिकॉर्ड

दक्षिण अफ्रीका की राजधानी जोहान्सबर्ग में साल 1991 में जन्मे डेवोन कॉनवे के क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर इतिहास रच दिया है। न्यूजीलैंड की तरफ से टेस्ट डेब्यू करने वाले इस खिलाड़ी ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे पहले टेस्ट के पहले दिन ही शतक जड़ नया रिकॉर्ड कायम किया। वह लॉर्ड्स के मैदान पर सबसे बड़ी पारी (136*) खेलने वाले पहले विदेशी बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले गांगुली ने 1996 में इंग्लैंड दौरे के दौरान लॉर्ड्स में अपने पदार्पण टेस्ट के दौरान 131 रनों की पारी खेली थी।

लॉर्ड्स टेस्ट डेब्यू में शतक लगाने वाले तीसरे बल्लेबाज

कॉनवे और गांगुली के अलावा चार अन्य बल्लेबाज भी लॉर्ड्स में अपने पदार्पण टेस्ट में शतक लगा चुके हैं। कॉनवे लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर अपने डेब्यू मैच में शतक जड़ने वाले तीसरे विदेशी बल्लेबाज बने। उनसे पहले हैरी ग्राहम (1893) और सौरव गांगुली (1996) ये कारनामा कर चुके हैं।

टूटा 125 पुराना रिकॉर्ड

 पहले दिन शानदार शतक जमाने के बाद दूसरे दिन कॉनवे ने जैसे ही 155 रनों पर पहुंचे, उन्होंने 125 साल पुराने रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया। यह रिकॉर्ड भारतीय मूल के खिलाड़ी रणजीत सिंह जी के नाम था, जिन्होंने साल 1896 में इंग्लैंड में डेब्यू टेस्ट खेलते हुए 154 रनों की पारी खेली थी। यह इंग्लैंड में टेस्ट डेब्यू करने वाले खिलाड़ी के नाम एक पारी में सर्वश्रेष्ठ स्कोर का रिकॉर्ड था। रणजीत सिंह जी ने मैनचेस्टर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी पारी में नाबाद 154 रन बनाए थे।

मेरे लिए शानदार पल – कॉनवे

कॉनवे ने पहले दिन के खेल समाप्त होने के बाद कहा, ” यह मेरे लिए बहुत शानदार पल है। मैं अपने टेस्ट करियर की इससे बेहतर शुरुआत के बारे में सोच भी नहीं सकता था। मेरा न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन के साथ कुछ दिन पहले एक रूपांतरण हुआ था और मैंने उनसे पूछा कि ऑनर्स बोर्ड में होना कैसा लगता है? और पहली बात उसने मुझसे कही थी ‘अब आप जानते हैं।”

विलियमसन भी लॉर्ड्स में शतक लगा चुके हैं। कॉनवे जन्म से दक्षिण अफ्रीकी हैं और 2017 में न्यूजीलैंड आने से पहले तक वह जोहान्सबर्ग में रहते थे।

उन्होंने कहा, ” इस अवसर को पाने के लिए एक बहुत ही खास एहसास है। निश्चित रूप से मैंने इसके बारे में (डेब्यू टेस्ट में शतक बनाने) के बारे में नहीं सोचा था जब मैंने (न्यूजीलैंड में ) कदम रखा था। अभी टेस्ट डेब्यू कर रहा हूं, इस स्तर पर खेलने का मौका मिल रहा है। मैं उन अवसरों के लिए बहुत आभारी हूं जो वेलिंगटन ने मुझे दिए हैं।”

क्यों छोड़ा दक्षिण अफ्रीका ?

कहते हैं हुनर की कद्र करना बहुत जरूरी होता लेकिन शायद दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट कॉनवे जैसे हीरे की कीमत नहीं समझ पाया। उन्होंने 20 वर्ष की उम्र में दक्षिण अफ्रीका के लिए फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था, लेकिन इसके बाद उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। क्रिकेट करियर में नई उड़ान भरने के लिए उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में बना अपना घर और जायदाद बेच दी और 2017 में न्यूजीलैंड में बसने का निर्णय लिया। यहां उन्होंने वेलिंगटन के लिए 17 फर्स्ट क्लास मैचों में 72 की औसत 1598 रन बनाए।

2020 में आया राष्ट्रीय टीम से बुलावा

दक्षिण अफ्रीका में करियर को लेकर संघर्ष कर रहे कॉनवे की किस्मत का ताला साल 2020 में खुला। जब उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ न्यूजीलैंड की टी20 टीम में चुना गया। अपने पहले ही मैच में उन्होंने 29 गेंदों में पांच चौके और 1 छक्के की मदद से 41 रनों की आतिशी पारी खेली। इसके बाद वह पारी दर पारी निखरते गए जिसके परिणामस्वरूप  उन्हें इस साल इंग्लैंड दौरे के लिए टेस्ट टीम से खेलने का मौका भी मिल गया।

Leave a Response