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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जानें कब से लागू हुआ था डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS)

विश्व में खेले जाने वाले सभी खेलों में समय-समय पर कई बदलाव देखने को मिले जिसमें यदि वह सफल होते हैं तो वह आगे भी जारी रखे जाते हैं। वहीं यदि उनका परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं होता है, तो ऐसे नियम खत्म भी कर दिए जाते हैं। क्रिकेट के खेल में हम सभी ने ऐसा कई बार देखा है नियमों में कई तरह का बदला अक्सर किया जाता रहा है।

तकनीक के शामिल होने से क्रिकेट की दुनिया अब काफी बदल चुकी है जिसमें अंपायर से लेकर खिलाड़ी भी इसे पूरी तरह से अपनाते हुए दिख रहे हैं। इसी में एक नियम डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) है, जिसे लंबी बहस के बाद क्रिकेट में लागू किया गया था।

इस नियम के तहत मैच में गेंदबाजी या बल्लेबाजी करने वाली टीम यदि अंपायर के किसी फैसले से खुश नहीं है तो वह तीसरे अंपायर को शामिल करने की मांग कर सकती है। DRS को लेकर शुरू में भारतीय टीम ने काफी विरोध किया था, वहीं पहले आईसीसी ने यह विकल्प रखा था कि यदि द्विपक्षीय सीरीज में एक टीम भी इसे लागू करने से मना करती है तो DRS सीरीज में लागू नहीं किया जाएगा।

वहीं आईसीसी टूर्नामेंट में इस नियम का उपयोग पूरी तरह से होगा। हालांकि सबसे DRS के नियम को साल 2008 में श्रीलंका और भारत के बीच कोलंबो में 23 से 26 जुलाई तक खेले गए पहले टेस्ट मैच में किया गया था।

इस मैच में मेजबान टीम श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट के नुकसान पर 600 रन बनाते हुए पारी को घोषित किया। भारतीय टीम अपनी पहले पारी में 223 के स्कोर पर ही सिमट गई जिसके कारण उसे फॉलोआन का सामना करना पड़ा था।

सहवाग बने DRS का पहला शिकार

भारतीय टीम की दूसरी पारी में ओपनिंग बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने श्रीलंकाई स्पिनर मुथैया मुरलीधरन की एक गेंद खेलने का प्रयास किया लेकिन वह उनके पैड से जा टकराई। विकेट के सामने होने की वजह से श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने अंपायर से एलबीडब्लू की अपील कर दी जिसे उन्होंने नकार दिया।

मैदानी अंपायर मार्क बेंसन के फैसले से नाखुश श्रीलंकाई कप्तान महेला जयवर्धने ने DRS लेने का फैसला किया। तीसरे अंपायर के पास फैसला जाने पर उन्होंने गेंद की टप्पे और उसके विकेट पर लगने की पुष्टि करते हुए मैदानी अंपायर को फैसला बदलते हुए सहवाग

को आउट देने को कहा। जिसके बाद DRS के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लागू होने पर उसका पहला शिकार पूर्व भारतीय ओपनिंग बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग बने थे।

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