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आईसीसी के सुपरसब नियम के तहत यह खिलाड़ी खेला था पहली बार

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद समय-समय पर खेल के नियमों में बदलाव करती रहती है, ताकि इसे और अधिक रोमांचक बनाया जा सके। साल 2005 में भी आईसीसी ने एक ऐसा ही नियम खेल में लागू किया था, जिसे सुपरसब के नियम से पहचाना जाता था। इस नियम के तहत टीमों को अपने 12वें खिलाड़ी को मैच में शामिल करने की छूट दी जाती थी।

सुपरसब नियम के तहत खेल के दौरान टीम कभी भी अपने 12वें खिलाड़ी को मैच में शामिल कर सकती है, लेकिन वह जिस खिलाड़ी को रिप्लेस करेगा वह मैच में आगे हिस्सा नहीं ले सकता। आईसीसी ने यह नियम जिस समय लागू किया था, तो उसका इरादा टीमों को मैच के दौरान और अधिक छूट देना था। इस नियम की आलोचना के बाद आईसीसी ने इसे हटा दिया था।

विक्रम सोलंकी बने पहले सुपरसब खिलाड़ी

साल 2005 में लागू होने वाले सुपरसब नियम के तहत खेलने का मौका पहली बार इंग्लैंड टीम के स्टाइलिस बल्लेबाज विक्रम सोलंकी को मिला था। 7 जुलाई 2005 को सोलंकी वनडे क्रिकेट इतिहास के पहले सुपर सबस्टीट्यूट खिलाड़ी बने थे। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली गई 3 मैचों की वनडे सीरीज का पहला मैच लीड्स मैदान में खेला गया था।

मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम पहले बल्लेबाजी कर रही थी, जिसमें इंग्लैंड की तरफ से तेज गेंदबाज साइमन जोंस अपने 10 ओवर पारी के 31 ओवर खत्म होने तक फेंक चुके थे। इंग्लैंड टीम के कप्तान ने स्थिति को समझते हुए जोंस की जगह पर उस मैच टीम के 12वें खिलाड़ी विक्रम सोलंकी को सुपरसब के रूप में शामिल कर लिया।

ऑस्ट्रेलियाई टीम मैच में 50 ओवरों के बाद 7 विकेट के नुकसान पर 219 रन ही बना सकी। जवाब में इंग्लैंड की तरफ से मार्कस ट्रेस्कोथिक के नाबाद 104 और कप्तान माइकल वॉन के 59 रनों की बदौलत टीम ने एक आसान जीत दर्ज की इस दौरान उन्हें अपने सुपरसब खिलाड़ी का उपयोग बल्लेबाजी के दौरान करने की जरूरत नहीं पड़ी।

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