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10 साल पहले जब मैदान में दिखा था सहवाग का जलवा, अब तक बरकरार है उनका यह रिकॉर्ड

क्रिकेट भले ही भारत का राष्ट्रीय खेल न हो और भले ही इस खेल का उदय भारत से न हुआ हो, फिर भी जितने शानदार खिलाड़ी भारत ने इस खेल को दिए हैं उतने शायद ही किसी अन्य देश से निकले हों। भारत में कुछ ऐसे भी क्रिकेटर हुए हैं जिनके नाम से क्रिकेट को भारत में पहचान मिली। जिनमें सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, विराट कोहली जैसे कई बेहतरीन खिलाड़ी शामिल हैं।

वहीं इन सबके अलावा भारत को एक ऐसा भी क्रिकेटर भी मिला जिसका खेलने का शानदार अंदाज ही उसकी पहचान बन गया। क्रिकेट का चाहे जो भी प्रारूप हो उसने हमेशा गेंदबाजों के प्रति आक्रामक रुख का ही प्रदर्शन किया। उनकी टेस्ट क्रिकेट की पारियां भी ऐसी होती थीं जैसे लग रहा हो कि वह किसी एक दिवसीय मैच या फिर टी-20 क्रिकेट में अपनी टीम को जिताने के लिए उतरे हों। हम बात कर रहे हैं, भारत के सबसे सफल ओपनर वीरेंद्र सहवाग की।

क्रिकेट के इतिहास में सहवाग के नाम वैसे तो कई रिकॉर्ड मौजूद हैं लेकिन उन्होंने आज से लगभग दस साल पहले एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया था जिसे आज तक कोई भी नहीं तोड़ सका है। सन 2008 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत का वह मैच भला किसे नहीं याद होगा, जिसमें वीरेंद्र सहवाग ने सबसे तेज तिहरा शतक लगाने का काम किया था।

सन 2008 में जब साउथ अफ्रीका की टीम भारत के दौरे पर आई थी तो यहां पर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज़ के पहले ही मैच में वीरेंद्र सहवाग की ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी का नजारा देखने को मिला था। यह मैच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया था। जिसमें साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया था। पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी साउथ अफ्रीका ने पहली पारी में 540 रनों का स्कोर भारत के सामने रखा।

जिसके जवाब में बल्लेबाज़ी करने उतरी भारतीय टीम शुरुआत से ही लय में दिखी। इस मैच में वीरेंद्र सहवाग ने वसीम जाफर के साथ ओपनिंग की और मैदान में आते ही गेंदबाजों की खबर लेना शुरू कर दिया। एक तरफ जहां वसीम जाफर 73 रनों के स्कोर पर पवेलियन लौट गए थे वहीं वीरेंद्र सहवाग ने इस मैच में टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज तिहरा शतक लगाया था। उन्होंने मात्र 278 गेंदों पर ही 300 रनों की पारी खेली थी। इस पारी में उन्होंने एक और रिकॉर्ड बनाया था।

वीरेंद्र सहवाग ने अपना तिहरा शतक छक्के के साथ पूरा किया था। जिसे आज तक कोई भी बल्लेबाज नहीं तोड़ सका है। अपनी इस पारी में सहवाग ने 304 गेंदों का सामना करते हुए 319 रनों की पारी खेली थी। जिसमें 42 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उन्होंने इस मैच में 104.93 के स्ट्राइक रेट से रन बरसाए थे। वहीं उनके अलावा राहुल द्रविड़ ने भी 291 गेंदों पर 111 रनों की शानदार पारी खेली थी।  जिसकी मदद से भारत ने 627 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। हालाकि अंत में मुकाबला ड्रॉ हो गया था।

गौरतलब है कि वीरेंद्र सहवाग टेस्ट क्रिकेट में दो बार तिहरे शतक लगा चुके हैं। 2008 में उन्होंने जहां साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज तिहरा शतक बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। वहीं इससे पहले उन्होंने 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ भी तिहरा शतक लगाया था। मुल्तान में उन्होंने 309 रनों की पारी खेली थी। जिसके बाद से ही उन्हें मुल्तान का सुल्तान कहा जाने लगा था।

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