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टेस्ट के पांच रोमांच – जब बाजी पलटते हुए टीम ने दर्ज की हैरतअंगेज जीत

क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है, 21वीं सदी के आने के बाद से टेस्ट क्रिकेट का रोमांच नए शिखर पर पहुंचा है। पांच दिवसीय मैचों के नतीजे अब ज्यादा आने लगे हैं। इन नतीजों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई मुकाबलों में टीम को एकतरफा जीत मिली है लेकिन कुछ मुकाबले ऐसे हुए जहां टीमों ने हारी हुई बाजी को पलटते हुए मैच को अपने नाम कर लिया। इस लेख में 21वीं सदी की पांच ऐसे ही मुकाबलों की बात की गई है जहां टीमों ने हारी बाजी को पलटते हुए मैच अपने नाम कर लिया।

कोलकाता 2001 – भारत

बाजी
कोलकाता टेस्ट के दौरान लक्ष्मण और द्रविड़ (सोशल मीडिया)

टेस्ट इतिहास में इस मुकाबले को खास स्थान मिला है। रिकॉर्ड 16 जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया कोलकाता पहुंची थी। 17वीं जीत की तलाश में उसने भारत को फॉलोऑन देने का फैसला कर लिया। एक समय भारतीय पारी लड़खड़ाती नजर आ रही थी और तब वीवीएस लक्ष्मण(281) को राहुल द्रविड़(180) का साथ मिला।

चौथे दिन वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने अपने विकेट नहीं गंवाए और पांचवें विकेट के लिए 376 रन जोड़ कर बाजी पलट दी। ऑस्ट्रेलिया के सामने अंतिम ढाई सेशन में 384 रनों का असंभव सा लक्ष्य मिला।

बाद में हरभजन सिंह ने 6 विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई पारी को पूरी तरह से तहस नहस करते हुए भारत को कभी न भूलने वाली जीत दिला दी।

एंटिगा 2003 – वेस्टइंडीज

वेस्टइंडीज ने हासिल किया था सबसे बड़ा लक्ष्य (सोशल मीडिया)

एक बार फिर इस हार में ऑस्ट्रेलिया की टीम शामिल थी। पहली पारी में मेहमान और मेजबान दोनों ने 240 रन बनाए। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया ने बिना विकेट खोए 242 रन बनाए थे लेकिन इसके बाद पूरी टीम 175 रन ही जोड़ पाई। मैथ्यू हेडन(177) और जस्टिन लैंगर(111) ने शतकीय पारी खेली जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया 417 रनों तक पहुंच पाया।

वेस्टइंडीज को जीत के लिए इतिहास रचना था। कप्तान ब्रायन लारा(60) 165 के कुल योग पर चौथे विकेट के रूप में पवेलियन लौटे तो ऑस्ट्रेलिया की जीत सुनिश्चित लग रही थी। चौथी पारी में 400 से ऊपर रन के लक्ष्य को हासिल करना ऐसे में असंभव सा काम लगता है

लेकिन इसके बाद खेल बदला, हारी बाजी को पलटा रामनरेश सरवन(105) और शिवनरायण चंद्रपॉल(104) ने। दोनों ने शतकीय साझेदारी कर टीम को मुकाबले में ला खड़ा किया। 372 के कुल योग तक दोनों पवेलियन लौट चुके थे। एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया मैच जीतने की ओर बढ़ चला। लेकिन फिर ओमारी बैंक्स(47) और वैसवर्ट ड्रैक्स(27) ने अटूट साझेदारी कर टीम को सबसे बड़ी जीत दिला दी।

केपटाउन 2011 – साउथ अफ्रीका

फिलैंडर ने खोले थे जीत के दरवाजे(सोशल मीडिया)

उलटफेर वाले इस मुकाबले में जीत साउथ अफ्रीका के हाथों में आएगी इसका अंदाजा शायद ही किसी ने लगाया हो। ऑस्ट्रेलिया के 284 के जवाब में मेजबान टीम महज 96 रनों पर ढेर हो गई। ऑस्ट्रेलिया पास 200 के आस पास की बढ़त थी। मैच आसानी से ऑस्ट्रेलिया के खाते में जाती दिख रही थी।

लेकिन फिर दूसरी पारी में फिलैंडर की अगुवाई में अफ्रीकी तेज अटैक का कहर देखने को मिला। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी महज 18 ओवर में 47 रन जोड़कर पवेलियन लौट गई। साउथ अफ्रीका ने बाद में जरूरी 237 रनों के लक्ष्य को दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। कप्तान ग्रेम स्मिथ ने नाबाद 101 रन बनाए तो वहीं हाशिम अमला के बल्ले से 112 रन आए और महज तीन दिन में मुकाबले का परिणाम सामने आ गया।

गॉल 2015 – श्रीलंका

हेराथ की फिरकी में उलझ गए थी भारतीय टीम (सोशल मीडिया)

भारत के खिलाफ श्रीलंका की यह जीत कई मायनों में अलग है। एक समय भारत इस मुकाबले को पारी से जीतने के करीब था। पहली पारी के आधार पर उसे 192 रनों की बढ़त थी। दूसरी पारी में भी शुरुआत खराब रही। 5 रन तक तीन विकेट और 95 रन तक कुमार संगाकारा सहित पांच बल्लेबाज पवेलियन जा चुके थे।

भारत जीत के करीब था लेकिन दिनेश चांदिमल ने हार नहीं मानी उन्होंने 162 रनों की नाबाद पारी खेली और स्कोर को 367 तक पहुंचा दिया। श्रीलंका ने मैच में वापसी तो की थी लेकिन वो भारत के सामने सिर्फ 176 रनों का लक्ष्य रखा था।

200 या इससे कम के लक्ष्य में भारत को अब तक सिर्फ एक बार हार मिली थी लेकिन यहां मोर्चा संभाला रंगना हेराथ ने। स्पिन लेती पिच पर हेराथ किसी भी गेंदबाजों से अधिक खतरनाक दिख रहे थे। उन्होंने सात विकेट के साथ भारत की बेहतरीन बल्लेबाजी क्रम को 112 पर समेट कर टीम को ऐसी जीत दिला दी जिसकी उम्मीद पहले तीन दिन तक कोई नहीं कर रहा था।

लीड्स 2019 – इंग्लैंड

स्टोक्स ने खेली सबसे दमदार पारी (सोशल मीडिया)

रविवार को खत्म हुए एशेज के तीसरा मुकाबले को अभी तक के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 179 पर सिमटी तो ऐसा लगा कि इंग्लैंड आसानी से मैच अपने नाम कर लेगा लेकिन उसकी पहली पारी महज 67 रनों पर सिमट गई।

ऑस्ट्रेलिया के पास 112 रनों की बढ़त थी। इंग्लैंड ने वापसी की पूरी कोशिश की लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में 246 रन जोड़ ही लिए।

जानिए धमाकेदार पारी से पहले क्या खा कर उतरे थे स्टोक्स

इंग्लैंड को जीत के लिए 359 रनों की जरूरत थी। 286 के कुल योग पर 9 विकेट पवेलियन का रास्त नाप चुके थे। इंग्लैंड को जीत के लिए 73 रनों की जरूरत थी जबकि ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ एक विकेट की तलाश थी। हर रन के साथ रोमांच आगे बढ़ता जा रहा था और इसके नायक थे विश्व कप फाइनल के हीरो बेन स्टोक्स(नाबाद 135 रन)।

जैक लीच (1 नाबाद) के साथ आखिरी विकेट के लिए 76 रन जोड़ कर स्टोक्स ने बाजी पलटते हुए इंग्लैंड को उनके टेस्ट इतिहास की सबसे रोमांचक जीत दिला दी।

डे-नाइट टेस्ट से भारतीय क्रिकेट को होगा फायदा Live

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Shashank

The author Shashank

2011 विश्व कप के साथ शशांक ने अपनी खेल पत्रकारिता की शुरआत की। क्रिकेट के मैदान से लेकर हर छोटी बड़ी खबरों पर इनकी नज़र रहती है। खेल की बारीकियों से लेकर रिकॉर्ड बुक तक, हर उस पहलू पर नजर होती है जिसे आप पढ़ना और जानना चाहते हैं। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी इनकी गहरी रूची है। कई बड़े मीडिया हाउस को अपनी सेवा दे चुके हैं।