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क्या रविंद्र जडेजा को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजा जाना चाहिए

भारतीय टीम जब भी एशिया के बाहर टेस्ट सीरीज खेलने जाती है, तो टीम में यदि एकमात्र स्पिन खिलाड़ी के तौर पर किसी को शामिल करने की बात होती है तो वह बाएं हाथ के हरफनमौला खिलाड़ी रविंद्र जडेजा हैं। दरअसल, पिछले कुछ सालों में जडेजा ने जिस तरह से अपनी बल्लेबाजी में सुधार लाया है और वे निचले क्रम में टीम के लिए अधिक से अधिक रनों का योगदान देते हुए नजर आए हैं, उससे सभी काफी प्रभावित हुए हैं।

इंग्लैंड के खिलाफ भी जब भारतीय टीम ने ट्रेंटब्रिज टेस्ट मैच में महत्पूर्ण समय में अचानक अपने 5 विकेट गंवा दिए थे, तो जडेजा ने पहले राहुल और उसके बाद निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर टीम को पहली पारी में महत्वपूर्ण 95 रनों की बढ़त दिलाने में अहम योगदान दिया था।

जडेजा के पिछले कुछ सालों में एक बल्लेबाज के तौर पर रिकॉर्ड को देखा जाए तो वह टीम में शामिल बाकी बल्लेबाजों के मुकाबले बेहतर दिखते हैं। मौजूदा समय में जडेजा का बल्लेबाजी औसत 35.32 का है, जो एक आलराउंडर खिलाड़ी के तौर पर काफी बेहतर माना जा सकता है। वहीं, एक बेहतर फील्डर होने के कारण वह टीम के लिए फील्डिंग में भी काफी महत्वपूर्ण बन जाते हैं।

पिछले 5 सालों का बल्लेबाजी औसत दर्शाता है उनकी प्रतिभा

रविंद्र जडेजा का पिछले 5 सालों का बल्लेबाजी औसत देखा जाए तो साल 2017 में उन्होंने 10 मैच खेलते हुए 41 की औसत से 328 रन बनाए थे जिसमें 4 अर्धशतकीय पारियां शामिल हैं । साल 2018 में जडेजा ने 5 मैचों में 45.60 की औसत से 228 रन बनाए थे जिसमें एक शतकीय पारी भी शामिल है। इसके अलावा साल 2019 में जडेजा का 8 मैचों में 62.86 का शानदार औसत देखने को मिला था। इसके बाद, साल 2020 में 41 जबकि साल 2021 में अब तक जडेजा ने 31.60 के औसत से रन बनाए हैं।

जडेजा की बल्लेबाजी को लेकर बात की जाए तो उन्होंने ऐसे समय बल्लेबाजी की जहां से मैच का पूरा रुख पलट सकता है। इसमें एक मैच साल 2019 में मेलबर्न के मैदान में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला गया था, जहां जडेजा ने रहाणे के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी करते हुए भारतीय टीम की पकड़ पूरे मैच में काफी मजबूत कर दी थी।

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