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बचपन में ही हो गई थी पिता की मौत, मां की मेहनत से क्रिकेट में चमका बेटे का करियर

समय किसी ने नहीं देखा है। बस आप मेहनत करते रहिए आपको उसका फल एक न एक दिन जरूर मिलेगा। भारतीय टीम के एक खिलाड़ी के जीवन पर यह बात बखूबी लागू होती है। उनके जीवन में कई विषम परिस्थितियां आईं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे। जिसका परिणाम यह हुआ कि उन्हें देश के लिए खेलने का गौरव प्राप्त हुआ।

हम बात कर रहे हैं हाल ही में उभरे युवा क्रिकेटर हनुमा विहारी की। इनकी सफलता देख तो हर युवा को लगता होगा कि शायद क्रिकेट में करियर बनाना काफी आसान होगा और वह इस प्रयास में लग भी जाते हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। हनुमा विहारी की लाइफ भी कुछ ऐसी ही रही है, इन्होंने बेहद कड़े संघर्ष के बाद भारतीय टीम में जगह बनाई और इंग्लैंड में डेब्यू करने का मौका मिला।

घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद हनुमा विहारी को भारत से खेलने का मौका मिला। जहां उन्होंने इस मौके को शानदार तरीके से भुनाया भी। हनुमा विहारी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया। उन्होंने कहा कि अगर मां का सपोर्ट न होता तो मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता।

टीम इंडिया में सेलेक्शन की जानकारी मिलने के बाद हनुमा विहारी ने कहा था ‘जब टीम में चयन की खबर मुझे मिली तो मैं काफी हैरान रह गया था, मुझे बहुत ज्यादा खुशी हुई थी। टीम में चुने जाने के बाद मैंने इस बात की जानकारी सबसे पहले अपनी मां को फोन पर दी’। हनुमा विहारी का इस मौके पर कहना था कि उन्होंने बेहद कड़े संघर्ष के बाद इस मुकाम को हासिल किया है।

हुनुमा बताते हैं कि बचपन में ही उनके पिता की मौत हो गई थी, जिसके बाद उनकी मां ने एक बुटीक के जरिए छोटी मोटी कमाई कर परिवार को पाला। हनुमा विहारी बचपन से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे और ऐसे में उनकी मां ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए बड़े प्रयास किए। बेटे पर परिवार की जिम्मेदारी न आए इसके लिए हनुमा की मां ने खुद ही परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली।

हनुमा कहते हैं कि अगर उनकी मां ने यह बलिदान न दिया होता तो आज वह क्रिकेटर न बन पाते। बताते चलें कि इंडियन टीम में शामिल होने से पहले भी हनुमा विहारी का फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर काफी शानदार रहा है। उन्होंने कुल 63 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 97 पारियों में 59.89 की औसत से 5142 रन बनाए हैं। यही नहीं उन्होंने क्रिकेट के इस प्रारूप में एक तिहरा शतक भी जड़ा है और इसके साथ ही कुल 15 शतक और  24 अर्द्धशतक भी बनाए हैं।

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