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हनुमा विहारी – वह खिलाड़ी जिसमें दिखने लगी है “वेरी वेरी स्पेशल दीवार” की झलक

बदलते वक्त के साथ क्रिकेट और क्रिकेटरों में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। ग्राउंड से लेकर वर्चुअल वर्ल्ड तक उनकी एक अलग पहचान दिखती है। लेकिन हनुमा विहारी उन सबसे बिलकुल अलग हैं। न तो उन्हें टैटू का शौक है और न ही सोशल मीडिया से किसी तरह की दिलचस्पी। उनकी जान कहीं अगर बसती है तो वो है क्रिकेट का मैदान। 22 गज की पिच से दुनिया नापने की कोशिश में लगे विहारी वेस्टइंडीज दौरे के खत्म होते ही सुर्खियों में आ गए हैं।

इस दौरे के पहले टेस्ट में वो सात रन से अपने पहले शतक से चूक गए लेकिन दूसरे टेस्ट में उन्होंने गलती से भी कोई गलती नहीं की 111 रनों की बेहतरीन पारी खेली। अपने फॉर्म को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दूसरी पारी में नाबाद अर्द्धशतकीय पारी खेल मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड अपने नाम कर लिया। भले ही विहारी ने अब तक छह मुकाबले खेले हैं लेकिन उनकी उपयोगिता टीम के लिए अहम होती जा रही है।

बचपन से ही क्रिकेट को लेकर था जुनून

हनुमा विहारी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जो कभी हार नहीं मानते और हर चुनौती का डट कर सामना करते हैं। गलतियों से सीखकर वो हर बार नया करने मैदान पर उतरते हैं। इसकी शुरुआत उस वक्त ही हो गई थी जब उन्होंने क्रिकेट का बल्ला थामा था। जिस दौर में अंडर -14 के बल्लेबाज अर्द्धशतक लगाकर खुश हो जाते थे उस वक्त विहारी 250 की पारी खेला करते थे। नेट पर दूसरे बल्लेबाज 100 गेंद खेलने की कोशिश करते थे तो विहारी 1000 गेंद से पहले हार नहीं मानते थे।

हनुमा विहारी
हनुमा विहारी की बचपन की त्सवीर(फोटो इंडियन एक्स्प्रेस)

उनके बचपन के कोच जॉन मनोज को लगभग हर सप्ताह फिजियोथेरेपिस्ट के पास जाना पड़ता था क्योंकि 1000 थ्रो डाउन के बाद उनके कंधे भी जवाब दे देते थे। विहारी बल्लेबाजी को लेकर काफी गंभीर थे और इसके पीछे एक बड़ी वजह थी। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने उस पिता को खो दिया था जिन्होंने अपने बेटे के लिए परिवार से दूरी बना ली थी। विहारी का खेल बेहतर हो सके इसके लिए उनके पिता ने परिवार को हैदराबाद में भेज दिया जबकि खुद मनुगुरु में ही रुक गए। पिता की मौत के महज पांच दिन बाद वो मैदान पर लौटे और 82 रनों की नाबाद पारी खेल क्रिकेट के प्रति अपनी गहरी आस्था को सबके सामने प्रकट कर दिया।

लक्ष्मण और द्रविड़ हैं आदर्श

विहारी के अंदर सिर्फ एक ही चाहत थी और वो थी क्रिकेट खेलने की। वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ उनके आदर्श थे। खाने के टेबल से क्रिकेट के मैदान तक उनकी कोशिश यही रहती थी कि वो लक्ष्मण और द्रविड़ की तरह बल्लेबाजी कर सकें।

साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ कप्तानी करते दिखेंगे गिल और साहा

हैदराबाद से अंडर 19 खेलने के बाद विहारी को सबसे बड़ा मौका मिला विश्व कप में। मनन वोहरा के चोटिल होने के बाद विहारी 2012 में ऑस्ट्रेलिया में खेले गए विश्व कप टीम का हिस्सा बने। उन्मुक्त चंद की कप्तानी में भारत ने विश्व कप अपने नाम किया। हालांकि विहारी के लिए यह विश्व कप कुछ खास नहीं रहा।

विश्व विजेता टीम से टेस्ट टीम तक पहुंचने वाले अकेले खिलाड़ी

इतिहास गवाह रहा है कि अंडर 19 टीम से कई खिलाड़ी सीनियर टीम में जगह बनाने में सफल रहे हैं। विहारी के खेलने से पहले भी यह सिलसिला चल रहा था और विहारी के बाद भी चल रहा है लेकिन उन्मुक्त चंद की कप्तानी वाली टीम का कोई भी खिलाड़ी टेस्ट टीम में जगह नहीं बना पाया सिवाय विहारी के। हालांकि विहारी को भी यह मौका 6 साल बाद मिला।

इस बीच विहारी फर्स्ट क्लास क्रिकेट में नई पहचान बनाते जा रहे थे। 2010 में डेब्यू करने वाले विहारी को 2013 में आईपीएल की टीम सनराइजर्स हैदराबाद ने अपने साथ जोड़ा। विहारी ने पहली ही गेंद पर क्रिस गेल का विकेट लेकर न सिर्फ रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज कराया बल्कि अपनी पार्ट टाइम गेंदबाजी का भी लोहा मनवाया। हालांकि विहारी को धीमे खेल के कारण अगले सीजन में खेलने का मौका नहीं मिला।

इंग्लैंड में चमका खेल

विहारी फर्स्ट क्लास में नए अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन उनके खेल का नया स्तर देखने को तब मिला जब वह इंग्लैंड पहुंचे। हट्टन क्रिकेट क्लब की ओर से खेलते हुए उन्होंने दो सीजन में 6 शतक और सात अर्द्धशतक के साथ 1739 रन बनाए। भारत लौटे हनुमा विहारी ने 2017 में ओडिसा के खिलाफ तिहरा शतक लगाकर टीम इंडिया के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर दी।

विदेशी जमीन पर किया शानदार डेब्यू

कई भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी जमीन पर डेब्यू करने का मौका मिला लेकिन कुछ ही खिलाड़ी ऐसे हुए जिन्होंने अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया। सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ की ही तरह उन्हें इंग्लैंड में पहला टेस्ट खेलने का मौका मिला, जहां उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में 56 रनों की बेहतरीन पारी खेल खुद को साबित करने की पूरी कोशिश की। उन्होंने उस मैच में आखिरी बार एलिस्टर कुक को पवेलियन की राह दिखाई थी।

दिग्गज कर चुके हैं तारीफ

डेब्यू करने से पहले उन्होंने अपने आदर्श और अपने पूर्व कोच राहुल द्रविड़ से बात की थी। द्रविड़ ने उनसे कहा था कि उनके अंदर अब सारे स्किल और धैर्य के साथ खेल को समझने की पूरी क्षमता विकसित हो चुकी है। उन्होंने उनसे खेल का आनंद उठाने को कहा था।

द्रविड़ से पहले श्रीलंकाई दिग्गज कुमार संगाकारा भी विहारी की बल्लेबाजी से काफी प्रभावित हुए थे। आईपीएल के छठे सीजन के दौरान उन्होंने 19 साल के विहारी से कहा था कि उन्होंने उस वक्त के जितने भी युवा खिलाड़ियों को देखा है उसमें विहारी सबसे बेहतरीन हैं।

अंडर 19 विश्व कप के दौरान हनुमा विहारी – सोशल मीडिया

इंग्लैंड में छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले विहारी को ऑस्ट्रेलिया में अचानक सलामी बल्लेबाजी के लिए भेज दिया गया। टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रहा कोई भी बल्लेबाज ऐसी परिस्थिति में असहज हो जाता लेकिन विहारी यहां भी खरे उतरे। विहारी से प्रभावित हो कर टीम के कोच शास्त्री ने कहा था कि यह वह खिलाड़ी हैं जिनसे 100 प्रतिशत की उम्मीद की जाए तो वो हमेशा उससे ज्यादा देने की कोशिश करता है।

भारत में जलवा दिखाना चाहते हैं विहारी

इंग्लैंड में डेब्यू के बाद विहारी ने अब तक सभी छह टेस्ट विदेश में ही खेले हैं। इस दौरान उन्होंने 45.60 की औसत से 456 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने 1 शतक और तीन अर्द्धशतक लगाए हैं। भारतीय टीम को अब अपने घर में साउथ अफ्रीका का सामना करना है ऐसे में विहारी इस सीरीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा ,‘‘मैंने भारत में एक भी टेस्ट नहीं खेला है और मुझे इसका इंतजार है। घरेलू दर्शकों के सामने खेलना अद्भुत होगा।’’

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Shashank

The author Shashank

2011 विश्व कप के साथ शशांक ने अपनी खेल पत्रकारिता की शुरआत की। क्रिकेट के मैदान से लेकर हर छोटी बड़ी खबरों पर इनकी नज़र रहती है। खेल की बारीकियों से लेकर रिकॉर्ड बुक तक, हर उस पहलू पर नजर होती है जिसे आप पढ़ना और जानना चाहते हैं। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी इनकी गहरी रूची है। कई बड़े मीडिया हाउस को अपनी सेवा दे चुके हैं।