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आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल इन नियमों के तहत खेला जाएगा

इंग्लैंड के साउथैम्पटन के रोस बाउल मैदान में 18 से 22 जून तक खेले जाने वाले आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले को लेकर क्रिकेट फैंस नियमों को लेकर काफी संशय में थे। अब आईसीसी ने इस फाइनल मुकाबले को लेकर सभी तरह के नियमों का ऐलान कर दिया है।

फाइनल मुकाबले से पहले जो सबसे बड़ा सवाल सभी के मन में उठ रहा था, वह यह कि मैच ड्रॉ या टाई पर खत्म होने पर किस टीम को विजेता के तौर पर चुना जाएगा। इसको लेकर आईसीसी ने अब पूरी तरह तस्वीर साफ कर दी है, वहीं फाइनल मुकाबले को लेकर एक रिजर्व दिन का भी ऐलान किया गया है, जो बारिश के कारण खराब हुए समय की भरपाई के लिए उपयोग होगा। जिसके बाद हम आपको उन सभी नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो फाइनल मुकाबले के लिए आईसीसी की तरफ से तय किए गए हैं।

1 – मैच ड्रॉ होने पर दोनों टीम होंगी संयुक्त विजेता

यदि 5 दिन के खेल के बाद कोई परिणाम नहीं निकलता और मैच ड्ऱॉ पर खत्म होता है, तो दोनों ही टीमों को संयुक्त रूप से इस फाइनल मुकाबले का विजेता घोषित किया जाएगा। वहीं मैच टाई पर खत्म होने पर भी इसी नियम को लागू किया जाएगा।

2 – इस नियम के तहत लागू होगा रिजर्व डे

फाइनल मुकाबले के लिए आईसीसी ने एक रिजर्व डे का भी ऐलान किया है, लेकिन यह सिर्फ बारिश के कारण खलल पड़ने पर खराब हुए पूरे दिन के खेल पर ही उपयोग में लाया जाएगा। यदि 5 दिन के खेल में बारिश खलल डालती है, लेकिन उसकी भरपाई बाकी के बचे खेल के दिनों में हो जाती है, तो रिजर्व डे का नियम नहीं लागू किया जाएगा।

3 – मैच ड्यूक ग्रेड 1 बॉल से खेला जाएगा

वैसे तो टेस्ट क्रिकेट अभी तक तीन तरह की गेंदों ड्यूक, एसजी और कूकाबुरा से खेला जाता रहा है। इन तीनों ही गेंदों में यदि अंतर को लेकर बात की जाए तो ड्यूक और एसजी की बॉल की सिलाई जहां हाथों से की जाती है, तो वहीं कूकाबुरा गेंद की आधी सिलाई मशीन तो आधी हाथ से की जाती है। वहीं इंग्लैंड के हालात को देखते हुए वहां पर क्रिकेट ड्यूक बॉल से खेला जाना पसंद किया जाता है। जिसके बाद आईसीसी ने फाइनल मुकाबले में ड्यूक ग्रेड 1 की गेंद के उपयोग पर फैसला किया है।

4 – शॉर्ट रन देने पर थर्ड अंपयार स्वत: समीक्षा करेगा

आईसीसी ने इस फाइनल मुकाबले को लेकर जिस नियम में बदलाव किया है, वह शॉर्ट रन को लेकर है। इसमें यदि मैदानी अंपायर शॉर्ट रन का फैसला देता है, तो ऐसी स्थिति में तीसरा अंपायर स्वत: ही इस फैसले की समीक्षा कर सकता है, ताकि यदि फैसले में सुधार की गुंजाइश हो तो उसे तत्काल सही किया जा सके।

5 – एलबीडब्यू पर लागू होगा यह नियम

एलबीडब्ल्यू के लिए डीआरएस लेने से पहले क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम का कप्तान या आउट दिया गया बल्लेबाज अंपायर से यह पुष्टि कर पाएगा कि क्या गेंद को खेलने का वास्तविक प्रयास किया गया था। इससे क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम के कप्तान के लिए रिव्यू लेने का फैसला बेहद आसान हो जाएगा।

6 – विकेट जोन को बढ़ाया गया

एलबीडब्लू के दौरान लिए जाने वाले रिव्यू को लेकर विकेट जोन में आईसीसी ने बदलाव किया है। इसमें स्टंप के चारों और समान अंपायर के कॉल मार्जिन को ऊंचाई और चौड़ाई दोनों के लिए सुनिश्चित करने के लिए विकेट जोन की ऊंचाई को शीर्ष तक कर दिया गया है, ताकि किसी तरह का संशय फैसला लेते समय सामने ना आए।

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