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विदेशी जमीन पर टीम इंडिया ने 5 टेस्ट मैचों में सफलतापूर्वक लक्ष्य का किया है पीछा

किसी भी टीम के लिए विदेशी जमीन पर टेस्ट मैच जीतने की जो खुशी होती उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। क्योंकि विपक्षी टीम को उसी के घरेलू हालात में हराना आसान काम नहीं होता है और इसी कारण ऐसी जीत टीमों के लिए ऐतिहासिक बन जाती हैं। जिसके बाद हम आपको भारतीय टीम की विदेशों में मिली टॉप-5 जीत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें उन्होंने चौथी पारी में लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करते हुए इसे जीत हासिल की।

5 – साल 2003 (बनाम ऑस्ट्रेलिया, एडिलेड टेस्ट मैच)

सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर साल 2003 में मिली यह जीत काफी ऐतिहासिक मानी जाती है। भारतीय टीम को इस मैच में चौथी पारी में 230 रनों का लक्ष्य मिला था और ओपनिंग बल्लेबाजों ने टीम को 48 रनों की अच्छी शुरुआत दी। जिसके बाद एक छोर से राहुल द्रविड़ ने पारी को संभालते हुए लगातार रन बनाने का सिलसिला जारी रखा और अंत में 72 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए टीम को मैच में 4 विकेट से शानदार जीत दिलाकर वापस लौटे।

4 – साल 2010 (बनाम श्रीलंका, कोलंबो टेस्ट)

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम साल 2010 में श्रीलंका के दौरे पर थी जहां पर टीम ने सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच कोलंबो के मैदान में खेला था। इस मैच में भारतीय टीम को चौथी पारी में मेजबान टीम ने 257 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसका पीछा करने आसान काम नहीं था। वहीं शुरुआती 4 विकेट सिर्फ 62 के स्कोर पर गंवाने की वजह से यह और भी मुश्किल दिखने लगा।

यहां से वीवीएस लक्ष्मण ने पहले सचिन तेंदुलकर के साथ मिलकर 5वें विकेट के लिए 109 रनों की साझेदारी करते हुए टीम को पूरी तरह से मैच में वापस ला दिया। वहीं इसके बाद लक्ष्मण ने रैना के साथ 87 रनों की नाबाद साझेदारी करते हुए टीम को इस मैच में 5 विकेट से जीत दिलाकर वापस लौटे।

3 – साल 2001 (बनाम श्रीलंका, कैंडी टेस्ट मैच)

साल 2001 में श्रीलंका और भारत के बीच खेले गए कैंडी टेस्ट मैच में मेजबान टीम ने भारतीय टीम को चौथी पारी में 264 रनों का लक्ष्य दिया था। जिसके बाद कप्तान सौरव गांगुली के नाबाद 98 और राहुल द्रविड़ के 75 रनों की बदौलत टीम ने सिर्फ 3 विकेट के नुकसान पर लक्ष्य को हासिल करते हुए जीत हासिल की। वहीं चौथी पारी में खतरनाक मुथैया मुरलीधरन भी सिर्फ अपने नाम 2 विकेट ही कर सके।

2 – साल 2021 (बनाम ऑस्ट्रेलिया, ब्रिस्बेन टेस्ट मैच)

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली यह जीत कई मायनों में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खास बन गई थी। 1-1 से बराबर सीरीज का यह आखिरी मैच था और भारतीय टीम को चौथी पारी में मेजबान टीम ने 328 रनों का लक्ष्य दिया था। जिसके बाद किसी ने यह उम्मीद नहीं की थी कि भारतीय टीम के युवा खिलाड़ी इस लक्ष्य को हासिल करने के इरादे से मैदान में बल्लेबाजी करने उतरेंगे।

शुभमन गिल के शानदार 91 रनों की पारी ने जहां टीम को लक्ष्य हासिल करने की तरफ अग्रसर करने का काम किया तो वहीं चेतेश्वर पुजारा के अर्धशतकीय पारी ने टीम को और करीब ला दिया था। यहां से युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने टी-20 के अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 89 रनों की पारी खेलने के साथ टीम को 3 विकेट से ऐतिहासिक जीत दिलाने के साथ सीरीज में भी जीत दिला दी।

1 – साल 1976 (बनाम वेस्टिंडीज, पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट)

वेस्टइंडीज टीम के गेंदबाजों का सामना करना 1970 और 80 के दशक में किसी भी टीम के बल्लेबाजों के लिए आसान काम नहीं था। वहीं उन गेंदबाजों के सामने टेस्ट मैच की चौथी पारी में कोई भी टीम 400 से अधिक का लक्ष्य हासिल करने का विचार भी मन में नहीं ला सकती थी। लेकिन ऐसा भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने करते हुए इतिहास रचने का काम किया था।

साल 1976 में वेस्टइंडीज और भारत के बीच पोर्ट ऑफ स्पेन के मैदान में खेले गए टेस्ट मैच की चौथी पारी में भारतीय टीम को 403 रनों का लक्ष्य मिला था। जिसके बाद ओपनिंग बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 102 और मध्यक्रम में गुंडप्पा विश्वनाथ ने 112 रनों की पारी खेलते हुए टीम को 6 विकेट से ऐतिहासिक जीत दिलाने का काम किया था।

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Manoj Tiwari

The author Manoj Tiwari

100 MB Sports में कंटेट राइटर का पद संभालते हुए काम का लुत्फ उठा रहे हैं। कम बोलने में विश्वास और काम को ज्यादा तवज्जो देने में भरोसा रखते हैं। मुंबई में साल भर से ज्यादा समय बिता चुके हैं, शहर को लेकर खुद की अपनी राय रखते हैं। स्पोर्ट्स हमेशा से पसंदीदा बीट रही है, अपने करियर की पारी शुक्रवार मैगजीन से शुरू की, जो स्पोर्ट्सकीड़ा और स्पोर्ट्सवाला से होते हुए अब 100 MB Sports तक आ गयी है। बीच में हमने राजनीति से लेकर मनोरंजन और यात्रा बीट पर भी काम किया, लेकिन स्पोर्ट्स की भूख खत्म नहीं हुई। मायानगरी में जब काम नहीं कर रहे होते हैं, तो शहर घूम रहे होते हैं। अभी के लिए बस इतना ही। हमें और जानना है, तो लिखा हुआ पढ़ लीजिये।