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क्या टेस्ट क्रिकेट में लोकेश राहुल की ये दूसरी वापसी है

भारतीय टीम जिस समय इंग्लैंड के दौरे पर रवाना हो रही थी, उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि लोकेश राहुल को पारी की शुरुआत करने का मौका फिर से मिल सकता है। दरअसल, रोहित शर्मा और शुभमन गिल इस दौरे पर पहली पसंद की जोड़ी के तौर पर गए थे, लेकिन वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मुकाबले के बाद शुभमन गिल के चोटिल होने के बाद मयंक अग्रवाल का नाम सबसे आगे चल रहा था।

इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच शुरू होने से पहले यह लगभग तय हो चुका था कि रोहित शर्मा के साथ मयंक अग्रवाल पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। लेकिन मैच शुरू होने से ठीक 48 घंटे पहले अभ्यास के दौरान अग्रवाल के सिर पर गेंद लगने की वजह से वह भी बाहर हो गए और इस कारण टीम को राहुल को बतौर ओपनिंग बल्लेबाज खिलाने का फैसला लेना पड़ा।

अभ्यास मैच में खेले थे मध्यक्रम में

लोकेश राहुल को लेकर ऐसी खबरें सामने आ रही थी कि वह अब ओपनिंग बल्लेबाज के तौर पर नहीं बल्कि मध्यक्रम में खेलना चाहते हैं। इसका एक उदाहरण सभी को डरहम में सिलेक्ट काउंटी टीम के खिलाफ हुए अभ्यास मैच में देखने को मिला जहां उन्होंने मध्यक्रम के बल्लेबाज के तौर पर खेलते हुए शतकीय पारी भी खेली थी।

इसके बाद सभी को ऐसी उम्मीद थी कि अब वह इसी क्रम पर खेलते हुए नजर आ सकते हैं, लेकिन यह खेल ही ऐसा है कि किसी भी खिलाड़ी को हर हालात के लिए तैयार रहना पड़ता है। ऐसा ही कुछ लोकेश राहुल के साथ देखने को मिला और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में एक तरह अपनी दूसरी वापसी शानदार तरीके से करते हुए बतौर ओपनिंग बल्लेबाज नॉटिंघम टेस्ट में अपनी पारी से सभी आलोचकों को करारा जवाब देने के साथ यह भी बता दिया कि वह ओपनिंग में अभी भी पूरे आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी कर सकते हैं।

साल 2018 से शुरू हुआ खराब दौर

राहुल के टेस्ट करियर पर एक नजर डाली जाए तो उनके लिए साल 2016 और 2017 काफी अच्छे रहे, जब वह क्रमशः 59 और 48 की औसत से पूरे साल रन बनाने में कामयाब हुए थे। इन 2 सालों में लोकेश राहुल के बल्ले से 2 शतकीय और 10 अर्धशतकीय पारियां देखने को मिली थी लेकिन इसके बाद साल 2018 में सिर्फ इंग्लैंड के दौरे पर खेली गई उनकी 149 रनों की पारी के अलावा वह पूरे साल कुछ अधिक कमाल दिखाने में कामयाब नहीं हो पाए थे।

यहां से कहा जा सकता है कि लोकेश राहुल की टेस्ट टीम में जगह को लेकर लगातार सवाल खड़े होना शुरू हो गए थे। उन्होंने 2019 में 3 टेस्ट मैच खेलने के बाद साल 2020 में उन्हें एक भी टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिला। हालांकि, राहुल लगातार टीम के साथ दौरों पर बने रहे और खुद को मानसिक तौर पर मजबूत रखते हुए अपने मौके का इंतजार कर रहे थे, जो उन्हें इंग्लैंड के दौरे पर मिला और इसे उन्होंने दोनों हाथों से लपका है।

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