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जन्मदिन विशेष: महेंद्र सिंह धोनी के करियर की टॉप-5 पारियां 

भारतीय क्रिकेट इतिहास में अभी तक कई खिलाड़ियों ने कप्तानी करते हुए टीम को एक नए मुकाम तक पहुंचाने का काम किया है। लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि रांची जैसे एक छोटे से शहर से आने वाला खिलाड़ी पूरे भारतीय क्रिकेट के तस्वीर को ही बदल देगा। जी हां हम बात करे हैं पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी की जिन्होंने एक कप्तान के तौर पर जहां कई उपलब्धियां हासिल की।

 वहीं उन्होंने बल्लेबाज के रूप में भी खुद को साबित करते हुए कई रिकॉर्ड्स बनाए हैं। धोनी की गिनती वर्ल्ड क्रिकेट के बेस्ट फिनिशर खिलाड़ी के तौर पर की जाती है। उन्होंने कई बार टीम को ऐसे मैचों में जीत दिलाने का काम किया, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। 

कप्तान के तौर पर यदि धोनी के रिकॉर्ड की बात की जाए तो वह क्रिकेट इतिहास के एकमात्र ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने तीनों आईसीसी ट्रॉफी को अपने नाम किया है। साल 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले धोनी के 40वें जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके करियर की 5 ऐसी पारियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें उन्होंने टीम की जीत में अहम योगदान दिया था। 

5 – बनाम पाकिस्तान (लाहौर वनडे, साल 2006, 72 नाबाद) 

पाकिस्तान के खिलाफ धोनी को हमेशा खेलना बेहद पसंद रहा है। जिसमें साल 2005-06 में पाकिस्तान का दौरा करने का भी मौका मिला था। यहां पर दोनों ही टीमों के बीच वनडे सीरीज खेली गई थी। इस सीरीज का तीसरा मैच लाहौर के मैदान में खेला गया। जिसमें धोनी की एक और शानदार मैच विनिंग पारी सभी को देखने को मिली थी। 

पाकिस्तान की टीम ने इस मैच में भारतीय टीम को 289 रनों की लक्ष्य दिया था। लेकिन 35 ओवर में 190 के स्कोर तक भारतीय टीम अपने 5 खिलाड़ियों को गंवा चुकी थी। जिसके बाद पिच पर मौजूद युवराज सिंह के साथ मिलकर धोनी ने आक्रामक बल्लेबाजी करना शुरू किया। इसमें धोनी ने सिर्फ 35 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा करते हुए टीम को जीत तरफ ले जाने का काम किया। 

धोनी ने इस मैच में 46 गेंदों में 13 चौकों की मदद से 72 रनों की नाबाद पारी खेली और भारतीय टीम को 14 गेंद पर पहले 5 विकेट से जीत दिलाकर वापस लौटे थे। इस मैच के बाद उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने धोनी के बालों की तारीफ करते हुए उन्हें ना काटने की सलाह दी थी। 

4 – बनाम ऑस्ट्रेलिया (साल 2012, एडिलेड वनडे, नाबाद 44 रन) 

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 2012 में खेले गए एडिलेड वनडे मैच में 270 रनों का पीछा कर रही भारतीय टीम को ओपनिंग बल्लेबाज गौतम गंभीर ने शानदार शुरुआत दी थी। लेकिन ऑस्ट्रेलिया टीम ने मैच में वापसी करते हुए 35 ओवर में 178 के स्कोर तक भारतीय टीम के 4 खिलाड़ियों के विकेट झटक लिए थे। 

यहां से धोनी और रैना ने मिलकर पारी को संभाला जिसमें रैना ने आक्रामक बल्लेबाजी की तो वहीं धोनी एक छोर से शांत तरीके से रन बनाते रहे। जिसके बाद रैना भी अपना विकेट गंवा बैठे वहीं जडेजा भी जल्द ही आउट हो गए। मैच के आखिरी ओवर में भारतीय टीम को जीत के लिए 13 रन बनाने थे। 

जिसमें ओवर की दूसरी गेंद पर रविचंद्रन अश्विन ने 1 रन लिया और आखिरी की 4 गेंदों में धोनी को जीत दिलाने के लए 12 रन बनाने थे। इसमें ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज क्लिंट मैकॉय ने धोनी को उनके दायरे में गेंद फेंक दी और उसे धोनी ने सीधे मैदान के बाहर पहुंचा दिया। इसके बाद अगली गेंद पर भी धोनी ने छक्का लगाते हुए टीम को 2 गेंद पहले ही जीत दिला दी। 

3 – बनाम श्रीलंका (साल 2005, जयपुर वनडे, 183 रन) 

साल 2005 में श्रीलंका की टीम भारत दौरे पर थी और उस समय धोनी को टीम का सदस्य बने अधिक समय नहीं हुआ था। लेकिन धोनी ने कुछ शानदार पारियों के दम पर भारतीय वनडे टीम में अपनी जगह को पूरी तरह से पक्का जरूर कर लिया था। पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी 148 रनों की पारी सभी को याद है। 

महेंद्र सिंह धोनी

लेकिन इसके बाद श्रीलंका के खिलाफ जयपुर के मैदान में धोनी का तूफान देखने को मिला। इस मैच में लंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम को 299 का लक्ष्य दिया था। भारत ने पहले ही ओवर में सचिन तेंदुलकर के रूप में अपना पहला विकेट गंवा दिया। 

इसके बाद उस समय टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ ने नंबर 3 पर बल्लेबाजी करने के लिए महेंद्र सिंह धोनी को मैदान में भेज दिया। धोनी ने इस मौके का लाभ पूरी तरह से उठाते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। धोनी ने इस मैच में 15 चौके और 10 छक्के लगाने के साथ 183 रनों की नाबाद पारी खेली और टीम को 6 विकेट से जीत दिलाकर वापस लौटे। धोनी के वनडे करियर में यह उनकी सर्वाधिक रनों की भी पारी रही। 

2 – बनाम श्रीलंका (साल 2013, पोर्ट ऑफ स्पेन, त्रिकोणीय सीरीज फाइनल, 45 नाबाद) 

वेस्टइंडीज में साल 2013 में खेली गई त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का सामना श्रीलंका के साथ था। इस मैच में भारत को 202 रनों का लक्ष्य मिला, जिसमें रोहित शर्मा की शानदार पारी के चलते टीम ने 32 ओवर में 139 रन बना लिए थे। इसके बाद श्रीलंका की टीम ने वापसी करते हुए नियमित अंतराल पर विकेट लेने का सिलसिला जारी रखा। 

नंबर 6 पर बल्लेबाजी करने उतरे धोनी एक छोर से लगातार विकेट गिरते हुए देख रहे थे। लेकिन धोनी ने खुद को शांत रखते हुए मैच को करीब लेकर जाने का प्रयास जारी रखा। इसके चलते आखिरी ओवर में भारतीय टीम को जीत के लिए 15 रन बनाने थे और हाथ में विकेट सिर्फ 1 बचा था। 

धोनी ओवर की पहली गेंद पर रन बनाने से चूक गए, लेकिन उन्होंने अगली गेंद को लॉन्ग ऑफ पर मारते हुए 6 रन बटोर लिए। इसके बाद तीसरी गेंद पर धोनी ने चौका जड़ते हुए मैच को लगभग खत्म कर दिया था और आखिर में धोनी ने टीम को चौका लगाते हुए जीत दिलाई। 

1 – बनाम श्रीलंका (साल 2011 वनडे वर्ल्ड कप, 91 रन नाबाद) 

महेंद्र सिंह धोनी के अंतरराष्ट्रीय करियर में इस पारी को हमेशा पहले नंबर पर रखा जाएगा। क्योंकि किसी भी क्रिकेट खिलाड़ी के करियर में आईसीसी वर्ल्ड कप से बड़ा मैच नहीं हो सकता, जिसमें वह टीम की जीत में अहम योगदान देने का प्रयास करता है। 

इस मैच में श्रीलंका की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत को 275 रनों का लक्ष्य दिया था। फाइनल मुकाबले को देखते हुए किसी भी टीम के लिए हासिल करना आसान काम नहीं है। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने 22वें ओवर तक 114 के स्कोर पर अपने 3 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। 

यहां पर धोनी एक अहम फैसला करते हुए खुद युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी करने के लिए मैदान में उतरे। धोनी ने गौतम गंभीर के साथ मिलकर जहां रनों की गति को तेज करने का काम किया, वहीं श्रीलंकाई गेंदबाजों पर भी लगातार दबाव बढ़ाते चले गए। 

Pic Credit@ICC

बाद में धोनी ने इस मैच का अंत अपने हेलीकॉप्टर शॉट के जरिए करते हुए भारतीय टीम को 28 साल के बाद विश्व विजेता बनाते हुए की। धोनी ने मैच में 91 रनों की नाबाद पारी खेली जो उनके करियर की सबसे यादगार पारी कही जा सकती है। 

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