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जानिए टेस्ट, वनडे और टी20 क्रिकेट के मुख्य नियम

क्रिकेट देखना भला किसे पसंद नहीं है और बात जब भारत की हो तो फिर फैन्स अपने सारे काम छोड़ मैच देखने में लग जाते हैं। मौजूदा समय में क्रिकेट खेलने के नियम इतने ज्यादा और कड़े कर दिए गए हैं कि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं रहती है। ऐसे में आपको बता दें कि क्रिकेट के नियम मैरीलिबोन क्रिकेट क्लब (MCC) द्वारा स्थापित नियमों का एक समूह है।

इन्हीं नियमों के अनुसार ही दुनिया भर की टीमें निष्पक्ष भाव से इस खेल में अपना प्रदर्शन करती हैं और लोगों का मनोरंजन करती हैं। क्रिकेट के नियमों में अगर कोई बदलाव भी करना हो तो इसके लिए पहले इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) से सलाह लेनी पड़ती है। जिसके बाद ही इसमें परिवर्तन किया जाता है। ऐसें में इस खेल का और भी ज्यादा आनंद लेने के लिए लोगों को इसके नियम से परिचित होना बेहद जरूरी है। जिसके बारे में आगे बताया जा रहा है।

क्रिकेट के सामान्य नियम

सभी को पता है कि वर्तमान समय में क्रिकेट तीन प्रारूपों में खेला जाता है, जिसमें ‘टेस्ट क्रिकेट, वनडे क्रिकेट और टी20 क्रिकेट’ को शामिल किया जाता है। इन तीनों प्रारूपों में थोड़ा परिवर्तन जरूर होता है लेकिन कुछ ज्यादातर नियम सामान्य होते हैं। जिनका प्रयोग तीनों ही प्रारूपों में मुख्य रूप से किया जाता है।

क्रिकेट हमेशा एक बड़े मैदान में दो टीमों के बीच ही खेला जाता है। जिसमें प्रत्येक टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। जिस मैदान में क्रिकेट खेला जाता है, उसमें 22 गज लंबी और 10 फुट चौड़ी एक ‘पिच’ बनाई जाती है। जिसके दोनों तरफ 28 इंच की लंबाई वाले तीन स्टंप लगाए जाते हैं। जिन पर 2 गिल्लियां भी रखी जाती हैं। इसके अलावा इन स्टंप को इस तरह से लगाया जाता है कि इनके बीच से गेंद न गुजर सके।

क्रिकेट में बल्ले और गेंद का प्रयोग किया जाता है। बल्ला जहां हर खिलाड़ी कुछ मानकों के अनुरूप अपने हिसाब से प्रयोग कर सकता है। वहीं गेंद का साइज निर्धारित होता है। गेंद की परिधि 9 इंच और इसका भार 5.5 औंस से कम और 5.75 औंस से ज्यादा नहीं होता है। इसके अलावा मैदान में दो टीमों के बीच ही क्रिकेट खेला जाता है। जिनके बीच एक सिक्के को उछाल कर पहले बल्लेबाज़ी या फिर गेंदबाजी करने का फैसला किया जाता है।

यह सभी कार्य मैदान में मौजूद अंपायर के सामने ही होता है। बताते चलें कि क्रिकेट के मैदान में जहां दो अंपायर मौजूद रहते हैं, तो वहीं तीसरा अंपायर वीडियो अंपायर होता है। जिसकी मदद संदिग्ध परिस्थितियों में ली जाती है। इस खेल के चार मुख्य किरदार होते हैं। जिनमें ‘बल्लेबाज, गेंदबाज, विकेट कीपर और क्षेत्ररक्षक’ को शामिल जाता है।

क्रिकेट में टॉस जीतने के बाद दोनों टीमों को बारी-बारी गेंदबाजी और बल्लेबाज़ी करने का मौका मिलता है। पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम जहां गेंदबाजी करने वाली टीम के सामने रनों का लक्ष्य खड़ा करती है, तो वहीं बाद में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम उन रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए उसे हासिल करने की कोशिश करती है अगर टीम लक्ष्य हासिल करने में सफल होती है तो उसे जीत मिलती है नहीं तो फिर टीम को हार मिलती है।

जानिए क्या है विकेटकीपर और क्षेत्ररक्षक

विकेटकीपर गेंदबाजी करने वाली टीम की ओर से नामित किया जाता है, जो बल्लेबाज़ी करने वाले खिलाड़ी के स्टंप के पीछे खड़े होने के लिए अधिकृत होता है। खेल के दौरान यही एकमात्र ऐसा खिलाड़ी होता है, जिसे दस्ताने और बाहरी लेग गार्ड पहनने की अनुमति होती है। वहीं क्षेत्ररक्षक भी गेंदबाजी करने वाली टीम के मुख्य सदस्य होते हैं। इनका काम होता है अपनी टीम की गेंदबाजी को मजबूती प्रदान करना और ज्यादा से ज्यादा रन न बनें इसके लिए तत्पर रहना। यह खिलाड़ी मुख्यतः रन बचाने और कैच लपक कर विकेट गिराने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जानिए कैसे की जाती है गेंदबाजी

क्रिकेट में गेंदबाजी का मुख्य स्थान होता है। जो बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को कम से कम रन पर रोकने का प्रयास करती है, जिससे जब उसकी टीम की बल्लेबाज़ी की बारी आए, तो उसे विशाल लक्ष्य का सामना न करना पड़े। किसी भी टीम में मुख्यतः दो प्रकार के गेंदबाज होते हैं- ‘स्पिन गेंदबाज और तेज गेंदबाज’

किसी भी टीम में प्रत्येक गेंदबाज एक बार में एक ओवर ही फेंकते हैं, जिनमें 6 गेंद ही होती हैं। इन्हीं ओवर में ही गेंदबाजों को बल्लेबाजों को आउट करना होता है और रनों पर अंकुश लगाना होता है। वहीं कभी-कभी एक गेंदबाज इन्हीं ओवर में ही कुछ गलत गेंद भी फेंक देता है। क्रिकेट में कई तरह की गलत गेंद यानी नियम के विरुद्ध गेंद होती हैं, जिन्हें हम कुछ इस तरह से जान सकते हैं-

नो बॉल

गेंदबाज द्वारा नो बॉल करने पर बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को इसका फायदा मिलता है। गेंदबाज के ऐसा करने पर बल्लेबाज़ी करने वाली टीम के रनों में एक रन जुड़ जाता है और साथ ही अगर इन गेंदों पर बल्लेबाज आउट होता है तो उसे आउट करार नहीं दिया जाता(रन आउट को छोड़कर) और पिछले कुछ सालों से इस गेंद के स्थान पर जो अन्य गेंद दी जाती है, उसे फ्री हिट(वनडे और टी 20) भी कहा जाता है। जिस पर बल्लेबाज चाहे जैसे खेल सकता है। बशर्ते वह रन आउट या स्टंप आउट न हो। यह गेंद कुछ इस तरह से फेंकी जा सकती है-

गलत हाथ से गेंद फेंकना, गेंद की ऊंचाई कभी-कभी बल्लेबाज से कई गुना ऊपर कर देना, फील्डर का गलत पोजीशन पर होना, गेंदबाज का पैर पॉपिंग क्रीज से बाहर होना।

वाइड बॉल

यह गेंद बल्लेबाज के बहुत दूर से गुजरती है। इस गेंद पर बल्लेबाज कोई शॉट नहीं लगा सकता है, वहीं इस गेंद पर भी बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को एक रन मिलता है और गेंदबाज को इसके स्थान पर अतिरिक्त गेंद फेंकनी पड़ती है।

बाई

जब गेंदबाज कुछ इस तरह से गेंद फेंकता है कि वह बल्लेबाज के बल्ले से न टकराए और उसे विकेट के पीछे खड़ा विकेटकीपर भी न रोक पाए। तो ऐसे में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को जो रन मिलते हैं, उन्हें बाई का रन मिलता है।

लेग बाई

यह गेंद बल्लेबाज के बल्ले से न टकराकर उसके पैर या शरीर के किसी ओर हिस्से से टकराती है और दूर चली जाती है, तो ऐसे में बल्लेबाज को रन दौड़कर लेने का मौका मिल जाता है। ऐसी गेंद को लेग बाई कहा जाता है।

रन बनाने के तरीके

क्रिकेट का खेल जिस मैदान में खेला जाता है। उसमें बनी पिच के दोनों तरफ बल्लेबाज मौजूद रहते हैं और यह बल्लेबाज तीन तरह से मैदान में रन बनाते हैं। बल्लेबाज गेंदबाजों द्वारा कराई गई हर गेंद पर शॉट मारता है और उस पर रन बनाने के लिए दोनों बल्लेबाज पिच पर स्टंप के बीच दौड़ते हैं। ऐसे वह इस तरह से दौड़कर एक रन, दो रन या तीन रनों का योगदान अपनी टीम के खाते में करते हैं।

इसके अलावा दूसरी तरह से वह किसी भी गेंद पर जोरदार प्रहार करते हुए उसे मैदान की सीमा रेखा से बाहर पहुंचाता है। उस पर बल्लेबाज को चार रन मिलते हैं। इस शॉट में गेंद मैदान में टप्पा खाते हुए निर्धारित सीमा रेखा से बाहर जाती है।

चार रन के अलावा जब बल्लेबाज गेंद को इस तरह से सीमा रेखा के बाहर पहुंचाता है, कि गेंद का संपर्क कहीं भी मैदान में जमीन से नहीं होता और वह सीधा सीमा रेखा के पार गिरती है तो उस गेंद पर बल्लेबाज को छह रन मिलते हैं।

इन रनों के अलावा गेंदबाज जब गलत गेंदबाजी यानी नो बॉल, लेग बाई, बाई या फिर वाइड बॉल फेंकता है तो उस पर भी बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को रन मिलते हैं। ऐसे रनों को अतिरिक्त रन कहा जाता है।

आउट करने के प्रकार

इस खेल के दौरान जब बल्लेबाज़ी करने वाली टीम के खिलाड़ी बल्लेबाज़ी करते हैं तो विरोधी टीम के गेंदबाज उन्हें आउट करने का प्रयास करते रहते हैं। ऐसे में वह विभिन्न तरीकों से उन्हें आउट करने का प्रयास करते हैं। तो वहीं कभी-कभी बल्लेबाज अपनी ही गलती से आउट हो जाता है। जानिए क्या हैं आउट होने के नियम-

जब बल्लेबाज गेंद को हवा में मारता है और वह सीमा रेखा पार न कर पाए, उससे पहले ही अगर कोई भी क्षेत्ररक्षक उसे पकड़ ले, ऐसे में बल्लेबाज को कैच आउट करार दिया जाता है।

इसके अलावा जब गेंदबाज बल्लेबाज को गेंद फेंकता है और बल्लेबाज उसे छू न सके या वह गेंद बल्लेबाज के बल्ले को छूते हुए स्टंप में लग जाए और गिल्लियां गिर जाए। तो ऐसे में बल्लेबाज को बोल्ड करार दिया जाता है। लेकिन अगर ऐसी दशा में गिल्लियां नहीं गिरी हैं तो बल्लेबाज आउट नहीं होगा।

तीसरे नियम में गेंद बल्लेबाज के पैर से टकराती है और कुछ खास नियमों के अनुसार बल्लेबाज को लेग बिफोर विकेट यानी (LBW) आउट करार दिया जाता है।

जब बल्लेबाज गेंद को बल्ले से मारकर रन बनाने के लिए भागता है और उसी बीच अगर कोई भी क्षेत्ररक्षक गेंद को पकड़कर बल्लेबाज के पहुंचने से पहले ही विकेट उड़ा दे वो रन आउट हो जाता है।

जब बल्लेबाज की गलती से ही उसका स्टंप हिल जाता है और गिल्लियां गिर जाती हैं, तो ऐसे में बल्लेबाज हिटविकेट आउट होता है।

बल्लेबाज को गेंद को अपने बल्ले से केवल एक ही बार खेलने की अनुमति होती है। ऐसे अगर वह आउट होने के डर से गेंद को बल्ले से दोबारा छूने का प्रयास करता है। तो उसे आउट करार दिया जाता है।

जब बल्लेबाज गेंद खेलने के प्रयास में पॉपिंग क्रीज से बाहर निकल जाता है और पास खड़ा विकेटकीपर गिल्लियां बिखेर देते है तो उसे स्टंप्ड आउट कहा जाता है।

अगर कोई बल्लेबाज आउट होने के डर से या किसी अन्य कारण से गेंद को पकड़ लेता है तो इस दशा में बल्लेबाज़ को हैंडलिंग द बॉल के तहत आउट करार दिया जाता है।

जब किसी भी गेंद पर शॉट लगाने के बाद बल्लेबाज रनिंग करता है और रन आउट होने के दौरान अगर बल्लेबाज विपक्षी खिलाड़ियों के प्रयास में बाधा पहुंचाता है, तो ऐसे में बल्लेबाज को बाधा आउट करार दिया जाता है।

इसके अलावा किसी बल्लेबाज के आउट होने के बाद अगर अगला बल्लेबाज 3 मिनट के अंदर ही मैदान में नहीं पहुंचता तो उसे आउट करार दिया जाता है।

इन सामान्य नियमों के अलावा भी खेल के हर प्रारूप में कुछ खास नियम होते हैं। जो इन प्रारूपों को एक दूसरे से अलग बनाते हैं। जानिए क्या हैं वह नियम-

टेस्ट क्रिकेट के खास नियम

टेस्ट क्रिकेट को इस खेल का जनक और सबसे पुराना प्रारूप माना जाता है। यही नहीं क्रिकेट के इस प्रारूप से ही खिलाड़ियों की असली परीक्षा होती है। क्योंकि टेस्ट क्रिकेट का एक मैच पांच दिन तक खेला जाता है और इतने लंबे समय तक खिलाड़ी अपने आप को किस प्रकार से तैयार रख पाता है, यह इस फॉर्मेट में ही पता चलता है। टेस्ट क्रिकेट पांच दिन तक चलने वाला खेल है। यह खेल भी दो टीमों के बीच ही खेला जाता है। जिसमें एक दिन में बल्लेबाज़ी करने वाली टीम ज्यादा से ज्यादा 90 ओवर खेल सकती है।

इस खेल की अवधि लंबी होती है, ऐसे में इसे तीन सेशन में बांटा गया है। जिससे खिलाड़ियों को बीच-बीच में थोड़ा आराम भी मिल सके। इसके अलावा यहां सीमित ओवर की तुलना में गेंदबाजों पर ओवर की कोई सीमा नहीं होती और अतिरिक्त गेंद फेंके जाने की संभावना भी कम होती है। इस खेल में हर टीम के खिलाड़ी केवल सफेद जर्सी ही पहनते हैं।

वनडे क्रिकेट के खास नियम

वनडे क्रिकेट टेस्ट क्रिकेट से छोटा प्रारूप है, जिसमें एक टीम 50 ओवर तक बल्लेबाज़ी करती है। और विपक्षी टीम के सामने रनों का लक्ष्य खड़ा करती है। जिसके बाद पहले गेंदबाजी करने वाली टीम उन रनों के लक्ष्य का सामना करती है। इस खेल में केवल एक बार ही गेंदबाजी और बल्लेबाज़ी की जाती है। यहां हर गेंदबाज ज्यादा से ज्यादा 10 ओवर ही फेंक सकता है। इस प्रारूप में हर टीम के खिलाड़ी अपने देश के हिसाब से निर्धारित रंग की जर्सी ही पहनते हैं।

इस खेल में पॉवरप्ले का लाभ भी बल्लेबाजों को मिलता है। समय के साथ इसमें कई बार बदलाव किए गए। इस दौरान 30 गज को प्राथमिक्त दी जाती है और इसके बाहर के खिलाड़ियों की संख्या तय होती है।

टी20 क्रिकेट के खास नियम

टेस्ट और वनडे के बाद नंबर आता है, टी20 क्रिकेट का। इस प्रारूप के भी कुछ खास नियम हैं। इसमें एक मैच 20-20 ओवर का ही खेला जाता है। जिसमें हर गेंदबाज को केवल 4 ओवर फेंकने की ही अनुमति होती है। इसके अलावा इसके शुरुआती 6 ओवर पावरप्ले होते हैं।

इस खेल में सबसे खास नियम यह है कि अगर अंपायर को लगता है कि कोई टीम बेवजह समय बर्बाद कर रही है तो वह अपनी बुद्धिमत्ता के हिसाब से उस टीम के 5 रन बतौर जुर्माना काट लेगा।

इस प्रारूप में एक मैच के बीच मध्यांतर 20 मिनट का ही होता है और अगर किसी कारणवश ओवर घट गए हैं तो यह अवधि भी 10 मिनट के लिए हो जाती है। इस खेल में अगर दोनों टीमों के बीच मैच टाई हो जाता है तो उनके बीच एक ओवर का अतिरिक्त मैच कराया जाता है। जिसे ‘सुपर ओवर’ कहा जाता है। इसमें ज्यादा स्कोर करने वाली टीम ही जीतती है।

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