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जवागल श्रीनाथ : भारत का वो गेंदबाज जिसे विश्व कप के लिए ‘दादा’ ने मनाया

भारत के सबसे चहेते पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ का जन्म 31 अगस्त सन् 1969 में कर्नाटक के जवागल शहर में पैदा हुए थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का लंबे समय तक टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने 500 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विकेट झटके। कपिल देव के बाद श्रीनाथ दूसरे भारतीय तेज गेंदबाज थे, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 200 विकेट अपने नाम किए थे। इसके अलावा वनडे में 300 विकेट लेने वाले वह पहले भारतीय थे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक जवागल श्रीनाथ का करियर लंबे समय तक बेंच पर बीता। अगर उन्हें शुरूआती वर्षों में लगातार मौके मिलते तो हो सकता था कि वह भारत के सबसे सफल तेज गेंदबाज होते।

घरेलू करियर

एक क्लब के लिए खेल रहे जवागल श्रीनाथ पर पहली नजर भारत के पूर्व टेस्ट बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ की पड़ी। वह उस वक्त कर्नाटक राज्य के चयनकर्ता थे और उन्होंने उन्हें टीम में शामिल किया। सन् 1989-90 के रणजी सीजन में श्रीनाथ ने हैदराबाद के खिलाफ अपने डेब्यू मैच की पहली ही पारी में हैट्रिक लेकर सनसनी पैदा कर दी। उस सीजन में उन्होंने 6 मैचों में 25 विकेट लिए और अगले सीजन में उनके नाम 20 विकेट दर्ज हुए। दूसरे सीजन में उन्होंने पुणे में महाराष्ट्र के खिलाफ 93 रन देकर 7 विकेट झटके, जहां रिवर्स स्विंग भी देखने को मिली। उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर में 500 से ज्यादा विकेट झटके, जिसमें 96 कर्नाटक की तरफ से और सन् 1995 में काउंटी क्रिकेट में ग्लूसेस्टरशायर की तरफ कुल 87 विकेट झटके।

जवागल

अंतरराष्ट्रीय करियर

जवागल श्रीनाथ को सन् 1991 में टीम इंडिया में शामिल किया गया था, जहां उन्होंने वनडे में पाकिस्तान के खिलाफ अपना डेब्यू किया। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्हें ब्रिसबेन टेस्ट मैच से डेब्यू करने का मौका मिला और उन्होंने 59 रन देकर 3 विकेट झटके। दौरे पर उन्होंने कुल 10 विकेट लिए और दुनिया के तीसरे सबसे तेज गेंदबाज भी बने। इसी वर्ष वह दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गए, जहां उन्हें केपटाउन टेस्ट मैच में 4 विकेट मिले और दौरे पर उनके खाते में 12 विकेट दर्ज हुए। हालांकि उन्हें भारत में हुई लगातार सात टेस्ट सीरीज में बेंच पर ही समय काटना पड़ा।

कपिल देव और मनोज प्रभाकर उस समय भारतीय टीम के सेटल तेज गेंदबाज थे। जिसकी वजह से भारतीय सरजमीं पर तीसरे तेज गेंदबाज की जगह नहीं बनती थी, जिसकी वजह से श्रीनाथ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू के तीन वर्ष बाद घर में सन् 1994 में टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। जहां उन्होंने कपिल देव के संन्यास लेने के बाद टीम में जगह मिली। सीरीज के पहले ही मैच में उन्होंने पांच विकेट और उसके बाद बल्ले से 60 रन की पारी खेली। भारत ये मुकाबला 96 रन से जीता और श्रीनाथ मैन ऑफ द मैच चुने गए, उन्होंने अपनी बल्लेबाजी को और बेहतर किया और उसी सीरीज में दो और पचासे ठोके।

सन् 1997 में फेंकी सबसे तेज गेंद

जवागल श्रीनाथ ने सन् 1997-98 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 149 किमी प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी की। जबकि जिम्बॉब्वे के खिलाफ उन्होंने पार्ल में 27 जनवरी 1997 में 157 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से एक गेंद फेंकी। जो उस वक्त भारत की ओर से सबसे तेज गेंदबाजी स्पीड थी। हालांकि इसी वर्ष उन्हें चोट भी लगी और लंबे समय तक टीम से बाहर रहे।

श्रीनाथ का सबसे बढ़िया स्पेल

साल 2001 में दक्षिण अफ्रीका के पोर्ट एलिजाबेथ टेस्ट मैच में श्रीनाथ ने 76 रन देकर 6 विकेट झटके। सन् 1999 में इस तेज गेंदबाज ने पाकिस्तान के खिलाफ कोलकाता टेस्ट मैच में पहली पारी में 46 रन देकर 5 व दूसरी पारी में 86 रन देकर 8 विकेट झटके थे। सन् 1996 में श्रीनाथ ने अहमदाबाद टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 21 रन देकर पाटा विकेट पर 6 विकेट लिए थे। हीरो कप 1993 में श्रीलंका के खिलाफ कानपुर में उन्होंने 24 रन देकर 5 बल्लेबाजों को आउट किया था। इसके अलावा ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ 23 रन देकर उन्होंने 4 विकेट झटके थे।

गांगुली के कहने पर खेले विश्वकप 2003

साल 2000 में भारतीय टीम नए कप्तान सौरव गांगुली के नेतृत्व में युवा खिलाड़ियों को तैयार कर रही थी। उस दौर में जहीर खान और अजित अगरकर जैसे युवा गेंदबाज उभर रहे थे। जिन्हें एक अनुभवी गेंदबाज के साथ की जरूरत थी। इसलिए साल 2002 में टेस्ट क्रिकेट अलविदा कहने वाले श्रीनाथ को कप्तान सौरव गांगुली ने वनडे विश्वकप 2003 तक खेलने को कहा और वह मान भी गए। विश्वकप से पहले न्यूजीलैंड दौरे पर उन्होंने सात एकदिवसीय मैचों में 18 विकेट झटके थे।

विश्वकप में जवागल

जवागल श्रीनाथ एकमात्र भारतीय तेज गेंदबाज हैं, जिन्होंने चार विश्वकप खेले हैं। जिसमें उन्होंने कुल 34 मैचों की 33 पारियों में 21 ओवर मेडन रखते हुए कुल 44 विकेट झटके। इस तरह वह भारत की ओर से जहीर खान के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।

श्रीनाथ

संन्यास

जवागल श्रीनाथ ने साल 2002 में टेस्ट क्रिकेट और साल 2003 के विश्वकप के बाद वनडे से संन्यास ले लिया था। उसके बाद वह क्रिकेट में बतौर कमेंटटर एक्टिव रहे और फिलहाल वह आईसीसी के मैच रेफरी पूल में शामिल हैं। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इमरान खान ने उन्हें दुनिया का सबसे अंडररेटेड तेज गेंदबाज बताया था। साल 2010 में श्रीनाथ और अनिल कुंबले ने कर्नाटक स्टेट क्रिकेट संघ के चुनाव में खड़े हुए। जिसमें श्रीनाथ सचिव व कुंबले अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने अपने करियर में 67 टेस्ट मैच खेले जिसमें उनके नाम 236 विकेट हैं। वहीं 229 वनडे मैचों में उन्होंने कुल 315 विकेट झटके।

श्रीनाथ के रिकॉर्ड

बतौर भारतीय जवागल श्रीनाथ विश्वकप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। भारतीय तेज गेंदबाजों में उनके नाम सबसे ज्यादा वनडे विकेट दर्ज है। टेस्ट क्रिकेट में कपिल देव और जहीर खान के बाद श्रीनाथ के नाम सबसे ज्यादा विकेट दर्ज है। स्टीव वॉ के बाद श्रीनाथ विश्वकप में सबसे ज्यादा 9 बार नाबाद मैदान से लौटे हैं। हारे हुए टेस्ट मैच सबसे ज्यादा 13 विकेट लेने वाले दुनिया के एकमात्र गेंदबाज हैं। वनडे में 11 गेंदबाजों ने 300 से ज्यादा विकेट लिए हैं, जिनमें श्रीनाथ का भी नाम शामिल है।

व्यक्तिगत जीवन

जवागल श्रीनाथ ने बेहद कम उम्र में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। मैसूर के मरिमाल्लप्पा हाई स्कूल और कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की और उसके बाद उन्होंने श्री जयाचमाराजेंद्र कॉलेज ऑफ इंजिनियरिंग से इंजिनियरिंग में स्नातक किया। सन् 1999 में उन्होंने ज्योत्सना से शादी रचाई और बाद में उनका तलाक हो गया। साल 2008 में उन्होंने दूसरी शादी पत्रकार माधवी पत्रावली से की।

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Manoj Tiwari

The author Manoj Tiwari

100 MB Sports में कंटेट राइटर का पद संभालते हुए काम का लुत्फ उठा रहे हैं। कम बोलने में विश्वास और काम को ज्यादा तवज्जो देने में भरोसा रखते हैं। मुंबई में साल भर से ज्यादा समय बिता चुके हैं, शहर को लेकर खुद की अपनी राय रखते हैं। स्पोर्ट्स हमेशा से पसंदीदा बीट रही है, अपने करियर की पारी शुक्रवार मैगजीन से शुरू की, जो स्पोर्ट्सकीड़ा और स्पोर्ट्सवाला से होते हुए अब 100 MB Sports तक आ गयी है। बीच में हमने राजनीति से लेकर मनोरंजन और यात्रा बीट पर भी काम किया, लेकिन स्पोर्ट्स की भूख खत्म नहीं हुई। मायानगरी में जब काम नहीं कर रहे होते हैं, तो शहर घूम रहे होते हैं। अभी के लिए बस इतना ही। हमें और जानना है, तो लिखा हुआ पढ़ लीजिये।