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बेहद अनोखा था टेस्ट क्रिकेट के सबसे लंबे मैच के खत्म होने का तरीका

वनडे और टी 20 के बढ़ते प्रभाव के कारण आज के समय में लगभग हर टेस्ट का नतीजा आने लगा है। मुकाबले तीन या चार दिन में खत्म होने लगे हैं। कम ही मुकाबले ऐसे होते हैं जो बिना किसी नतीजे के और पूरे पांच दिन तक चले। लेकिन इतिहास में एक मुकाबला ऐसा भी हुआ जो पूरे 12 दिन तक चला और इसके बाद भी कोई नतीजा सामने नहीं आ पाया।

1877 में खेले गए पहले टेस्ट से लेकर 1939 तक कुल 99 टेस्ट ऐसे हुए जिन्हें टाइमलेस क्रिकेट कहा गया। साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच खेले गए पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का अंतिम मैच टाइमलेस क्रिकेट का भी अंतिम मैच बना।

दोनों ही टीमों के बीच डरबन में 3 मार्च से 14 मार्च तक आखिरी टाइमलेस टेस्ट क्रिकेट मैच खेला गया। नियम के मुताबिक रविवार को रेस्ट डे रखा जाता था इसलिए इस टेस्ट में दो दिन रेस्ट के हुए जबकि भारी बारिश के कारण 11 मार्च का खेल नहीं हो सका।

क्यों रखा गया टाइमलेस क्रिकेट

सीरीज के चार मुकाबलों में इंग्लैंड 1-0 से आगे थी और पांचवें मैच के बाद उसे केपटाउन में वेस्टर्न प्रोविंस के खिलाफ फ्रेंडली मैच खेलना था। यहां से टीम 17 मार्च को शिप से देश वापस लौटती। समय को ध्यान में रखते हुए ऐसे में दोनों ही टीम ने टाइमलेस क्रिकेट खेलने का फैसला किया लेकिन अंत में इंग्लैंड के लिए ये फैसला काफी गलत साबित हुआ। मुकाबले में कुल 9 दिन तक क्रिकेट खेला गया लेकिन नतीजा नहीं आ पाया।

क्यों नहीं निकला नतीजा

इंग्लैंड टीम को 14 मार्च को डबरन से केपटाउन के लिए निकलना था, लेकिन समय से पहले मुकाबला खत्म नहीं हो पाया। दोनों ही टीम की ओर से रनों का अंबार लगा। आखिरी में इंग्लैंड को जीत के लिए 696 रनों का लक्ष्य था और टीम ने 5 विकेट पर 654 रन बना लिए थे लेकिन अंत में शिप का समय करीब आ गया और दोनों टीमों ने मैच ड्रॉ होने पर सहमति बना ली।

ऐतिहासिक मैच की अनोखी बात

साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और 530 रन बनाए। टीम की और से दो बल्लेबाजों ने शतक लगाए। जवाब में इंग्लैंड की टीम 316 रन पर ऑल आउट हो गई। मेजबान टीम के पास 214 रन की लीड थी।

मेजबान बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 481 रन रन जड़े जिसमें कप्तान एलन मेलविले का शतक शामिल है. इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 696 रनों का लक्ष्य मिला।

इसके बाद इंग्लैंड ने संभल कर खेलना शुरू किया छह दिन तक बल्लेबाजी की। बीच में एक दिन रेस्ट डे रहा जबकि एक दिन बारिश ने धो दिया। पॉल गिब और कप्तान वाली हेमंड ने शतक जड़े तो बिल एड्रिच ने दोहरा शतक जड़ा।

14 मार्च के दिन इंग्लैंड का स्कोर पांच विकेट पर 654 रन था। जीत के लिए मेहमान टीम को 42 रन की दरकार थी लेकिन टी के बाद बारिश ने खेल रोक दिया और अंत में दोनों ही टीमों ने ड्रॉ पर समझौता कर लिया।

मैच के दौरान कुल 12 बार नई गेंद ली गई जबकि 766 गेंद अकेले इंग्लैंड के हेडली वेरिटी ने डाली।

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Shashank

The author Shashank

2011 विश्व कप के साथ शशांक ने अपनी खेल पत्रकारिता की शुरआत की। क्रिकेट के मैदान से लेकर हर छोटी बड़ी खबरों पर इनकी नज़र रहती है। खेल की बारीकियों से लेकर रिकॉर्ड बुक तक, हर उस पहलू पर नजर होती है जिसे आप पढ़ना और जानना चाहते हैं। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी इनकी गहरी रूची है। कई बड़े मीडिया हाउस को अपनी सेवा दे चुके हैं।