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रणजीत सिंह : भारत का वह राजा जिसने क्रिकेट खेलने का तरीका बदल दिया

रणजीत सिंह भारत में पैदा हुए पहले टेस्ट क्रिकेटर थे, जिन्होंने इंग्लैंड की तरफ से क्रिकेट खेला। सन् 1872 में सौराष्ट्र के घोड़ों के बेहतरीन नस्ल के लिए सुप्रसिद्ध काठियावाड़ में राजकुमार रणजीत सिंह का जन्म हुआ था। रणजीत सिंह को सर्वकालिक महान बल्लेबाज माना जाता है। जिसकी मुख्य वजह उनका रनों का अंबार लगाना और उस दौर में क्रिकेट में नए-नवेले शॉट का ईजाद करना है।

कैंब्रिज से क्रिकेट के मैदान तक

सन् 1891 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचे राजकुमार रणजीत सिंह का दिल क्रिकेट में भी लगने लगा। विश्वविद्यालय में लोग उन्हें उनके उपनाम स्मिथ के नाम से पुकारते थे। सन् 1895 में वह ससेक्स काउंटी टीम के लिए क्वालिफाई कर गए और अपने डेब्यू मुकाबले में ही 77 व 150 रन की पारी खेली। सन् 1896 में वह इंग्लैंड टीम में चुने गए और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू मैच में 62 व नाबाद 154 रन की पारी खेली।

सीबी फ्राई से होती है तुलना

रणजीत सिंह इंग्लैंड में कमाल की बल्लेबाजी तो करते ही थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर सन् 1897-98 में उन्होंने 60.89 के औसत से 1157 रन बनाए थे। क्रिकेट के उस स्वर्णिम दौर में उनकी तुलना ससेक्स के बल्लेबाज व उनके दोस्त सीबी फ्राई से होती थी। सन् 1899 से 1903 तक वह काउंटी टीम के कप्तान भी रहे।

उनके भतीजे थे दलीप सिंह

सन् 1904 में राजकाज के चलते वह भारत वापस आ गए, जहां बढ़ती जिम्मेदारियों के बावजूद भी वह सन् 1908 व 1912 के काउंटी सीजन में खेले। जहां उन्होंने दोनों बार एक हजार से ज्यादा रन बनाए थे। उनके भतीजे कुमार दलीप सिंह (जिनके नाम पर दलीप ट्रॉफी खेली जाती है) ने भी इंग्लैंड की तरफ से क्रिकेट खेला था।

बतौर राजा खराब था रणजीत सिंह का प्रदर्शन

सन् 1907 में रणजीत सिंह नवानगर के महाराजा जाम साहब बने और क्रिकेट से उन्हें दूर होना पड़ा। हालांकि उनको एक अच्छा राजा नहीं माना जाता था, उस समय के इतिहासकार उनपर भारत की आजादी का विरोध करने वाला भी बताते हैं। जबकि उनके शासनकाल में प्रजा खुश नहीं थी, जब उनके राज्य में अकाल पड़ा तो वह विदेश घूमने में मशगूल रहे और जनता पर कर का बोझ लाद दिया।

उन्हीं के नाम पर भारत का सबसे बड़ा टूर्नामेंट

रणजीत सिंह के नाम पर भारत में रणजी ट्रॉफी की शुरूआत हुई। रणजीत सिंह ने 1896-1902 के दरम्यान इंग्लैंड के लिए 15 टेस्ट मैच खेले और दुनिया को लेट कट, बैकफुट डिफेंस और लेग ग्लांस जैसे नये शॉट दिये। रणजी ट्रॉफी घरेलू स्तर पर खेली जाने वाली प्रथम श्रेणी क्रिकेट चैंपियनशिप है, जो भारत के क्षेत्रीय और राज्य क्रिकेट संघ की टीमों के बीच खेली जाती है।

इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट के बाद ये टूर्नामेंट दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय घरेलू टूर्नामेंट है। लोढ़ा समिति के सुधारों के लागू होने के बाद इसमें टीमों की संख्या 28 से बढ़कर 37 हो गई है। भारत के पहले टेस्ट क्रिकेटर रणजीत सिंह के नाम पर भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े आयोजन की शुरूआत 4 नवंबर 1934 में हुई।

रणजीत सिंह के नाम दर्ज हैं ये खास रिकॉर्ड

अंग्रेजों की टीम में खेलने वाले इस भारतीय दिग्गज ने 22 अगस्त 1896 को इतिहास रचते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ही दिन में दो शतक लगाने का करनामा कर दिया था। ससेक्स की ओर से खेलते हुए रणजीत सिंह ने मैच के तीसरे दिन 100 रन बनाए लेकिन उनकी टीम 191 रनों पर सिमट गई। फॉलोऑन न बचा पाने की वजह से दूसरी पारी में उन्होंने नाबाद रहते हुए 125 रन बनाए और उनकी टीम ने 2 विकेट खोकर 260 रन बनाकर मैच भी बचा लिया। आपको बता दें कि यॉर्कशायर ने पहले खेलते हुए अपनी पहली पारी में 407 रन बनाए थे।

ये भी पढ़ेंः अपने देशों के लिए टेस्ट क्रिकेट में पहला शतक बनाने वाले बल्लेबाज

डालते हैं उनके करियर पर एक नजर

रणजीत सिंह ने इंग्‍लैंड की तरफ से (1896-1902) के दरम्यान 15 टेस्‍ट मैचों में खेलने उतरे और ये सभी मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ थे। हालांकि वह भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेले थे। उन्‍होंने 989 टेस्‍ट रन 44.95 की औसत से बनाए, जबकि उनका उच्चतम स्‍कोर 175 रन था। शिकार का शौक रखने वाले रणजीत सिंह को 1915 में दाईं आंख में चोट लगी और वह रोशनी खो बैठे।

फर्स्ट क्लास में रणजीत सिंह

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रणजीत सिंह का रिकॉर्ड बेहद शानदार था और उन्होंने 300 मैचों की 500 पारियों में 62 बार नाबाद रहते हुए 24692 रन बनाए थे। इस दौरान उनका औसत 56.37 का था, जबकि उनके बल्ले से 72 शतक व 109 अर्द्धशतक निकले थे। 285 रन उनका उच्च स्कोर था, जबकि उन्होंने 233 कैच भी लपके थे।

इस सीजन विराट या वॉर्नर में से ज्यादा रन कौन बनाएगा ? Live

  • विराट कोहली
  • डेविड वॉर्नर

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Manoj Tiwari

The author Manoj Tiwari

100 MB Sports में कंटेट राइटर का पद संभालते हुए काम का लुत्फ उठा रहे हैं। कम बोलने में विश्वास और काम को ज्यादा तवज्जो देने में भरोसा रखते हैं। मुंबई में साल भर से ज्यादा समय बिता चुके हैं, शहर को लेकर खुद की अपनी राय रखते हैं। स्पोर्ट्स हमेशा से पसंदीदा बीट रही है, अपने करियर की पारी शुक्रवार मैगजीन से शुरू की, जो स्पोर्ट्सकीड़ा और स्पोर्ट्सवाला से होते हुए अब 100 MB Sports तक आ गयी है। बीच में हमने राजनीति से लेकर मनोरंजन और यात्रा बीट पर भी काम किया, लेकिन स्पोर्ट्स की भूख खत्म नहीं हुई। मायानगरी में जब काम नहीं कर रहे होते हैं, तो शहर घूम रहे होते हैं। अभी के लिए बस इतना ही। हमें और जानना है, तो लिखा हुआ पढ़ लीजिये।