close
DOWNLOAD 100MB MOBILE APP

जब राजस्थान ने जीता था अपना पहला आईपीएल खिताब

साल 2008 में भारतीय क्रिकेट में एक ऐसा बड़ा बदलाव देखने को मिला जो शायद ही उससे पहले किसी ने सोचा था। पहली बार यहां फ्रेंचाइजी क्रिकेट को बड़े स्तर पर शुरू किया गया , जिसमें दुनियाभर के दिग्गज खिलाड़ी 8 अलग-अलग टीमों में खेलते हुए दिखने वाले थे। इस टी-20 लीग का नाम इंडियन प्रीमियर लीग था। आईपीएल के पहले सीजन में किसी ने भी इस बात का अंदाजा नहीं लगाया था कि राजस्थान की टीम सबको हैरान करते हुए पासा पलट सकती है।

आईपीएल के पहले सीजन को लेकर बात की जाए तो बाकी सभी टीमों के मुकाबले राजस्थान रॉयल्स के जीतने की किसी को उम्मीद नहीं थी। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण टीम में अधिकतर युवा बल्लेबाजों का शामिल होना था। लेकिन इसी बात को राजस्थान के खिलाड़ियों ने गलत साबित करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स को फाइनल मुकाबले में 3 विकेट से मात दी और ट्रॉफी अपने नाम की थी।

राजस्थान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया

राजस्थान रॉयल्स टीम के कप्तान महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न ने फाइनल मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। इसके बाद चेन्नई की टीम ने सुरेश रैना के 43 और पार्थिव पटेल के 38 रनों की पारी की बदौलत 20 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 163 का स्कोर बना दिया था। राजस्थान के लिए गेंदबाजी में यूसुफ पठान ने 4 ओवरों में 22 रन देकर 3 विकेट हासिल किए थे।

वॉटसन और यूसुफ ने संभाली पारी

फाइनल मुकाबले में 164 रनों के लक्ष्य का पीछा करना राजस्थान रॉयल्स टीम के लिए आसान काम नहीं होने वाला था। इसका दबाव शुरू में उस समय देखने को मिला जब टीम 42 के स्कोर तक 3 विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद यूसुफ पठान और शेन वॉटसन ने मिलकर चौथे विकेट के लिए 46 गेंदों में 65 रनों की साझेदारी करते हुए टीम को मैच में वापस लाने का काम किया। लेकिन वॉटसन 28 रनों की पारी खेलने के बाद अपना विकेट गंवा बैठे।

आखिरी 5 ओवरों में बनाने थे 52 रन

राजस्थान रॉयल्स टीम को फाइनल मुकाबले के आखिरी 5 ओवरों में जीत के लिए 52 रनों की दरकार थी। जिसमें अगले 3 ओवरों में टीम ने 34 रन तो बनाए, लेकिन इसी बीच यूसुफ पठान, जडेजा और कैफ का विकेट गवांने से टीम की जीत की उम्मीदें भी बेहद कम हो गई थी। अब आखिरी के 2 ओवरों में 18 रन बनाने थे, जिसमें कप्तान वॉर्न को जीत दिलाने की जिम्मेदारी निभानी थी।

वॉर्न और सोहेल तनवीर ने मिलकर 19वें ओवर में 10 रन बना दिए, जिसके चलते आखिरी की 6 गेंदों में राजस्थान को आईपीएल खिताब जीतने के लिए सिर्फ 8 रनों की दरकार थी। 20वें ओवर की पहली 3 गेंदों पर सिर्फ 3 रन आए, लेकिन चौथी गेंद पर वाइड के 2 रन आने की वजह से आखिरी 3 तीनों गेंदों में सिर्फ 4 रन बनाने थे। चौथी गेंद पर 1 और 5वीं गेंद पर 2 रन आने के बाद राजस्थान को आखिरी गेंद पर 1 रन बनाना था।

राजस्थान आईपीएल

अंतिम गेंद पर तनवीर ने 1 रन बनाते हुए राजस्थान को ना सिर्फ 3 विकेट से जीत दिलाई, बल्कि आईपीएल सीजन 1 का विजेता भी बना दिया। इस मैच में वॉर्न और सोहेल तनवीर के बीच 8वें विकेट के लिए 14 गेंदों में 21 रनों की साझेदारी हुई थी।

दिनेश कार्तिक: जन्मदिन के मौके जानिए उनकी 5 यादगार पारियां

Leave a Response