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आज के दिनः वनडे क्रिकेट के न्यूनतम स्कोर पर जब सिमट गई थी जिम्बॉब्वे की टीम

श्रीलंका के खिलाफ साल 2004 में जिम्बॉब्वे की टीम वनडे क्रिकेट में 25 अप्रैल को 35 रन के सबसे छोटे स्कोर पर ऑलआउट हो गई थी। हरारे में हुए वनडे मुकाबले में श्रीलंकाई गेंदबाजों के सामने जिम्बॉब्वे की टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी।

जिम्बॉब्वे का कोई भी बल्लेबाज दोहरे अंक में नहीं पहुंच पाया था, जबकि पूरी टीम महज 18 ओवरों में ऑलआउट हो गई थी। पारी में डियोन इब्राहिम ने सबसे अधिक 7 रन की पारी खेली थी, इसके अलावा श्रीलंकाई गेंदबाजों ने 7 रन अतिरिक्त दिए थे। जिम्बॉब्वे का कोई भी बल्लेबाज 25 गेंद से ज्यादा क्रीज पर नहीं जम पाया था।

श्रीलंका ने सिर्फ 3 गेंदबाजों से गेंदबाजी करवाई थी और सभी गेंदबाजों ने विकेट झटके थे। चमिंडा वास ने सबसे अथिक 9 ओवर में 11 रन देकर 4 विकेट झटके थे, वहीं फरवेज महरुफ ने 3 ओवर में 3 रन देकर 3 विकेट झटके थे। जबकि दिलहारा फर्नांडो ने 6 ओवर में 18 रन देकर 2 विकेट झटके थे।

जवाब में श्रीलंकाई टीम ने 9.2 ओवर में ही ये लक्ष्य हासिल कर लिया था। मर्वन अटापट्टू की कप्तानी वाली टीम ने जिम्बॉब्वे को करारी हार पर विवश कर दिया। श्रीलंका की ओर से समन जयंता ने सबसे अधिक 26 गेंदों में नाबाद 28 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने के दौरान रसेल अर्नाल्ड एकमात्र बल्लेबाज आउट हुए थे, उन्होंने 6 रन की पारी खेली थी।

डगलस होंडो ने श्रीलंकाई पारी में गिरे एकमात्र विकेट को अपने नाम दर्ज करवाया था। श्रीलंका के तेज गेंदबाज चमिंडा वास को मैन ऑफ द मैच अवार्ड से सम्मानित किया गया था। बाएं हाथ के इस गेंदबाज ने जिम्बॉब्वे की पारी को तहस-नहस कर दिया था।

इस रिकॉर्ड के बने हुए 17 वर्ष हो गए हैं और वनडे क्रिकेट में 35 रन आज भी किसी टीम का न्यूनतम स्कोर है।

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Manoj Tiwari

The author Manoj Tiwari

100 MB Sports में कंटेट राइटर का पद संभालते हुए काम का लुत्फ उठा रहे हैं। कम बोलने में विश्वास और काम को ज्यादा तवज्जो देने में भरोसा रखते हैं। मुंबई में साल भर से ज्यादा समय बिता चुके हैं, शहर को लेकर खुद की अपनी राय रखते हैं। स्पोर्ट्स हमेशा से पसंदीदा बीट रही है, अपने करियर की पारी शुक्रवार मैगजीन से शुरू की, जो स्पोर्ट्सकीड़ा और स्पोर्ट्सवाला से होते हुए अब 100 MB Sports तक आ गयी है। बीच में हमने राजनीति से लेकर मनोरंजन और यात्रा बीट पर भी काम किया, लेकिन स्पोर्ट्स की भूख खत्म नहीं हुई। मायानगरी में जब काम नहीं कर रहे होते हैं, तो शहर घूम रहे होते हैं। अभी के लिए बस इतना ही। हमें और जानना है, तो लिखा हुआ पढ़ लीजिये।