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कहानी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए साल 2005 के एजबेस्टन टेस्ट मैच की

किसी भी खेल में कुछ टीमों के बीच जब भी मैच खेला जाता है, तो उसका रोमांच अलग ही देखने को मिलता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण दोनों टीमों के फैंस के साथ उनका आपस में रिकॉर्ड सबसे बड़ी वजह माना जाता है। क्रिकेट में भी ऐसे ही कुछ टीमों की बीच की भिड़त को फैंस काफी रोमांचक तरीके से देखते हैं, भारत और पाकिस्तान किसी फॉर्मेट में आमने-सामने हों उसका रोमांच उसी तरह देखने को मिलता है।

उसी तरह टेस्ट क्रिकेट की सबसे पुरानी सीरीज एशेज में जब भी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीम एक-दूसरे के खिलाफ खेलने उतरती हैं, तो पूरे क्रिकेट जगत की नजरें इस सीरीज पर बनी रहती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण दोनों टीमों के फैंस और उनका आपस में रिकॉर्ड है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच अभी तक कई ऐतिहासिक टेस्ट मैच देखने को मिले हैं, जिसमें एक मैच साल 2005 में बर्मिंघम के मैदान में खेला गया था।

दोनों टीमों ने पहली पारी में दिखाया शानदार खेल

ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान रिकी पोंटिंग ने टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। यहां से मेजबान इंग्लैंड टीम की ओपनिंग जोड़ी मार्कस ट्रेस्कोथिक और एंड्रयू स्टास ने पहले विकेट के लिए 112 रनों की साझेदारी करते हुए टीम को शानदार शुरुआत देने का काम किया। लेकिन इन दोनों के पवेलियन लौटते ही इंग्लैंड टीम ने अपने 4 विकेट 187 के स्कोर तक गंवा दिए थे।

उस समय टीम में शामिल युवा केविन पीटरसन ने दिग्गज ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने 71 और 68 रनों की महत्वपूर्ण पारियां खेलते हुए टीम का स्कोर पहली पारी में 407 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की थी। वहीं ऑस्ट्रेलिया की तरफ से इस मैच में शेन वार्न ने 4 जबकि माइकल क्रास्पोविच ने 3 विकेट हासिल किए थे।

ऑस्ट्रेलिया टीम की पहली पारी की शुरुआत अच्छी नहीं हुई और टीम ने अपना पहला विकेट मैथ्यू हेडन का शून्य के स्कोर पर ही गंवा दिया था। इसके बाद जस्टिन लैंगर और कप्तान पोंटिंग ने दूसरे विकेट के लिए 88 रन जोड़ते हुए टीम को मैच में वापस लेकर आने का काम किया। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम के लगातार अंतराल में विकेट गंवाने से टीम पहली पारी में 308 के स्कोर पर सिमट गई।

इंग्लैंड की दूसरी पारी सिर्फ 182 के स्कोर पर सिमटी

पहली पारी में लगभग 100 रनों की बढ़त हासिल करने के बाद इस मैच में मेजबान टीम की स्थिति काफी मजबूत हो गई थी। लेकिन ऑस्ट्रेलिया टीम के दिग्गज गेंदबाजी क्रम ने अपनी टीम को मैच में वापस लाने की जिम्मेदारी निभाते हुए इंग्लैंड की दूसरे पारी को सिर्फ 182 के स्कोर पर समेट दिया। एंड्रयू फ्लिंटाफ ने दूसरी पारी में 73 रनों की पारी खेली जिसकी बदौलत टीम 100 का स्कोर पार कर सकी। वहीं ऑस्ट्रेलिया के लिए शेन वार्न ने 6 जबकि ग्लेन मैक्ग्रा ने 4 विकेट हासिल किए थे।

282 का लक्ष्य और सिर्फ 2 रन से मिली मात

चौथी पारी में 250 से अधिक के स्कोर का पीछा करना किसी टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट में आसान काम नहीं रहा है। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम की साल 2005 में बल्लेबाजी क्रम को देखने के बाद उम्मीद की जा सकती थी, कि वह हासिल कर सकती है। टीम के ओपनिंग बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 47 रनों की साझेदारी करते हुए अच्छी शुरुआत देने का काम किया।

हालांकि यहां से 137 के स्कोर तक ऑस्ट्रेलियाई टीम के 7 खिलाड़ी पवेलियन लौट चुके थे। लेकिन शेन वार्न और ब्रेट ली ने मिलकर स्कोर को 220 तक पहुंचाते हुए टीम को मैच में वापस लेकर आए। यहां से ब्रेट ली ने टीम के आखिरी साथी क्रास्पोविच के साथ मिलकर लक्ष्य की तरफ बढ़ना शुरू किया। इसके बाद जब ऐसा लगा कि दोनों टीम को एक ऐतिहासिक जीत दिलाने का काम करेंगे उसी समय क्रास्पोविच को हार्मिसन ने अपनी बाउंसर गेंद पर आउट करते हुए इंग्लैंड को 2 रनों की टेस्ट जीत दिलाने का काम किया था।

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