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ये हैं भारत की ओर से वनडे क्रिकेट में हर विकेट के लिए बनी रिकॉर्ड साझेदारियां

भारतीय क्रिकेट टीम में कई ऐसे महान खिलाड़ी हुए जिन्होंने मुश्किल भरे हालात में टीम को जिताने का काम किया है। यही नहीं इस जीत को हासिल करने के दौरान कई बार ऐसे रिकॉर्ड बने जिनके बारे में कल्पना करना भी काफी मुश्किल है। इन रिकॉर्ड में भारत की ओर से हर विकेट के लिए की गई साझेदारियों के रिकॉर्ड भी प्रमुख हैं। आज हम आपको भारत की ओर से वनडे क्रिकेट में हर विकेट के लिए बनी सबसे बड़ी साझेदारियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

पहले विकेट के लिए 258 रनों की साझेदारी

भारत के लिए वनडे क्रिकेट में पहले विकेट लिए सबसे बड़ी साझेदारी बनाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के नाम है। जिन्होंने 24 अक्टूबर 2001 को साउथ अफ्रीका में स्टैंडर्ड बैंक ट्रैंगुलर सीरीज़ के दौरान केन्या के खिलाफ पहले विकेट के लिए 258 रनों की शानदार साझेदारी की थी। इस साझेदारी में सचिन ने 146 और सौरव गांगुली ने 111 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी खेली थी। इस रिकॉर्ड साझेदारी की बदौलत भारत ने 3 विकेट के नुकसान पर 351 बनाए थे। जवाब में केन्या मात्र 165 रन ही बना सकी थी और भारत ने शानदार जीत हासिल की।

दूसरे विकेट के लिए 331 रनों की साझेदारी

भारत की ओर से वनडे क्रिकेट में दूसरे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी करने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के नाम है। 8 नवंबर 1999 को न्यूजीलैंड के खिलाफ हैदराबाद में 331 रनों की साझेदानी निभाई थी जो कई दिनों तक एक विश्व रिकॉर्ड भी रहा। इस मैच में जहां द्रविड़ 153 रन के स्कोर पर आउट हो गए थे तो वहीं सचिन 186 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत ने 2 विकेट के नुकसान पर 376 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और मुकाबले को आसानी से अपने नाम किया था।

तीसरे विकेट के लिए 237 रनों की साझेदारी

भारत के लिए वनडे क्रिकेट में तीसरे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बनाने का रिकॉर्ड भी द्रविड़ और सचिन के नाम है। सचिन के लिए यह मुकाबला बेहद खास था क्योंकि 1999 के विश्व कप के दौरान उनके पिता का देहान्त हो गया था जिसके कारण उन्हें वापस आना पड़ा था। दूसरे मैच में भारत को जिम्बॉब्वे के हाथों हार मिली थी और तीसरे मुकाबले में जीत जरूरी थी। सचिन टीम के साथ जुड़े और केन्या के खिलाफ जोरदार बल्लेबाजी की इस दौरान उन्होंने द्रविड़ के साथ 237 रनों की साझेदारी निभाई। सचिन ने इस मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 140 रनों की पारी खेली। भारत ने 50 ओवर में 329 रन बनाए और केन्या के खिलाफ इस मैच को आसानी से जीत हासिल कर ली।

चौथे विकेट के लिए 275 रनों की साझेदारी

भारत के सबसे सफल कप्तानों में शुमार मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा के नाम वनडे क्रिकेट में चौथे विकेट के लिए भारत की ओर सबसे बड़ी साझेदारी निभाने का रिकॉर्ड दर्ज है। इन दोनों महान बल्लेबाजों ने 1998 में खेली गई पेप्सी ट्रैंगुलर सीरीज के पांचवे मैच में जिंबॉब्वे के खिलाफ यह कमाल किया था। इस मैच में अजहर और जडेजा ने चौथे विकेट के लिए रिकॉर्ड 275 रनों की साजेदारी निभाई थी। जिसमें अजहर ने 153 रनों की शानदार पारी खेली थी, तो वहीं जडेजा के बल्ले से 116 रन आए थे। भारत ने 301 रनों का स्कोर खड़ा किया और इस मैच को 32 रन से जीता था।

पांचवे विकेट के लिए 223 रनों की साझेदारी

अजय जडेजा और मोहम्मद अजहरुद्दीन की जोड़ी ने वनडे क्रिकेट में भारत के लिए पांचवे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी निभाने का कमाल भी किया है। इन दोनों धाकड़ बल्लेबाजों की बेहतरीन जोड़ी ने 1997 में श्रीलंका दौरे पर सीरीज के पहले वनडे मैच में ही 223 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की थी। यह भारत की पांचवे विकेट के लिए खेली गई सर्वोच्च साझेदारी थी। इस मैच में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए जहां 302 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। तो वहीं भारत ने 64 रन के स्कोर पर 4 विकेट गंवा दिए थे। जिसके बाद अजय जडेजा और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने पांचवे विकेट के लिए रिकॉर्ड 223 रनों की साझेदारी की।

छठे विकेट के लिए 160 रनों की साझेदारी

भारत की ओर से वनडे क्रिकेट में छठे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी अंबाती रायडू और स्टुअर्ट बिन्नी ने निभाई है। इन दोनों खिलाड़ियों ने अफ्रीका दौरे के समय यह रिकॉर्ड बनाया था। इस सीरीज के दौरान जिंबॉब्वे के खिलाफ भारत ने जहां शुरुआत में ही 87 रन पर 5 विकेट खो दिए थे। वहीं छठे विकेट के लिए बल्लेबाजी करने उतरे अंबाती रायडू और स्टुअर्ट बिन्नी ने छठे विकेट के लिए रिकॉर्ड 160 रनों की साझेदारी निभाई और भारत का स्कोर 255 रन पहुंचाया। जिसके बाद भारत ने यह मैच 4 रन से जीत लिया और रायडू को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

सातवें विकेट के लिए 125 रनों की साझेदारी


भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने स्टार गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन के साथ मिलकर वनडे क्रिकेट में सातवें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी निभाई है। इन दोनों बेहतरीन खिलाड़ियों ने सातवें विकेट के लिए साल 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मैच में 125 रन की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई थी। पाकिस्तान ने भारत के पांच विकेट 29 रन के स्कोर पर ही गिरा दिए थे। जिसके बाद छठे विकेट के लिए सुरेश रैना ने कुछ देर धोनी का साथ निभाया लेकिन यह पार्टनरशिप भी ज्यादा देर न चली और इसके बाद धोनी ने सातवें विकेट के लिए रविचंद्रन अश्विन के साथ मिलकर 125 रनों की साझेदारी निभाई और टीम का स्कोर 50 ओवर में 227 रन पहुंचाया। हालांकि यह स्कोर पाकिस्तानी बल्लेबाजों को रोकने के लिए काफी नहीं था और भारत को करारी हार का सामना करना पड़ा। धोनी ने इस मैच में 113 रनों की नाबाद पारी खेली थी।

आठवें विकेट के लिए 100 रनों की साझेदारी

पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें किसी भी क्रम में बल्लेबाजी की जिम्मेदारी दी जाए, वह उसे बखूबी निभाते हैं। धोनी ने भुवनेश्वर कुमार के साथ मिलकर आठवें विकेट के लिए रिकॉर्ड 100 रनों की साझेदारी की है। यह मैच साल 2017 में श्रीलंका के खिलाफ खेला गया था। भारत के सामने 236 रनों का लक्ष्य था। ओपनर रोहित शर्मा और शिखर धवन ने टीम को अच्छी शुरुआत दिलाते हुए 109 रनों की साझेदारी की। लेकिन इसके बाद टीम के 6 विकेट 22 रन पर गिर गए। टीम संकट में थी लेकिन अंत में धोनी ने भुवनेश्वर कुमार के साथ मिलकर 100 रनों की साझेदारी निभा कर शानदार जीत दिला दी।

नौवें विकेट के लिए 126 रनों की नाबाद साझेदारी

यह सोचने में असंभव का लगता है लेकिन यह सच है कि भारतीय टीम में वनडे क्रिकेट में नौवें विकेट के लिए भी रिकॉर्ड 126 रनों की साझेदारी हुई है। यह साझेदारी इसलिए भी और ज्यादा खास है क्योंकि यह साझेदारी 1983 के विश्वकप के दौरान बनी थी। भारतीय टीम ने जिंबॉब्वे के खिलाफ खेलते हुए यह रिकॉर्ड दर्ज कराया था। टीम के कप्तान कपिल देव ने सैयद किरमानी के साथ मिलकर नौवें विकेट के लिए 126 रनों की साझेदारी निभाई और टीम को शुरूआती संकट से बाहर निकालते हुए 60 ओवर में 266 रन तक पहुंचा दिया। जवाब में जिंबॉब्वे की टीम 31 रन पहले सिमट गई। इस मैच में कपिल देव ने 138 गेंदों में 175 रनों की शानदार पारी खेली थी। जिसमें 16 चौके और 6 छक्के शामिल थे।

दसवें विकेट के लिए 64 रनों की साझेदारी

भारतीय टीम में टर्बनेटर के नाम से मशहूर हरभजन सिंह ने लक्ष्मीपति बालाजी के साथ मिलकर वनडे क्रिकेट में दसवें विकेट के लिए रिकॉर्ड 64 रनों की साझेदारी निभाई है। सन 2004 में जब भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई थी। उस दौरान सीरीज के दूसरे मैच में यह साझेदारी बनी। इस मैच में भारतीय टीम इंग्लैंड के 308 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी और उसके 9 विकेट मात्र 173 रनों के स्कोर पर ही गिर गए थे। इसके बाद हरभजन सिंह और बालाजी ने दसवें विकेट के लिए 64 रनों की साझेदारी निभाई। हालांकि यह मैच भारतीय टीम हार गई थी।

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