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प्रज्ञान ओझा ने लिया क्रिकेट से संन्यास, जानें उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें

बाएं हाथ के फिरकी गेंदबाज़ प्रज्ञान ओझा ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों के साथ प्रथम श्रेणी क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया है। ओझा ने इस बात की जानकारी 21 फरवरी को अपने ट्विटर अकाउंट पर दी।

आइए एक नज़र डालते हैं उनके क्रिकेट करियर से जुड़ी कुछ ख़ास बातों पर।

सचिन तेंदुलकर के आख़िरी टेस्ट में बने मैन ऑफ़ द मैच

दिन था 16 नवंबर 2013 और मौक़ा था क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टेस्ट के तीसरे दिन जब सारे दर्शक सचिन-सचिन के नाम से क्रिकेट के भगवान के प्रति अपनी भावना व्यक्त कर रहे थे तभी पुरस्कार समारोह के दौरान जब मैन ऑफ द मैच का नाम घोषित किया गया तो यह कोई और नहीं बल्कि प्रज्ञान ओझा ही थे। ओझा ने उस मैच में शानदार गेंदबाज़ी का मुज़ाहिरा पेश करते हुए 10 विकेट अपने नाम किए थे। उन्होंने अपने इस प्रदर्शन को मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के नाम किया था। संयोग की बात है कि उनके लिए भी यह आख़िरी मुकाबला साबित हुआ।

आईपीएल में पर्पल कैप से नवाज़े जाने वाले इकलौते स्पिनर

प्रज्ञान ओझा ने साल 2010 में हुए आईपीएल के तीसरे संस्करण में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की थी। टूर्नामेंट में सबसे अधिक विकेट चटकाते हुए उन्होंने पर्पल कैप अपने नाम की थी। ख़ास बात यह है कि आईपीएल के इतिहास में उनके अलावा अब तक किसी भी स्पिनर ने पर्पल कैप हासिल नहीं की है। उस दौरान डेक्कन चार्जर्स की तरफ से खेलते हुए उन्होंने 16 मुकाबलों में 20.42 की गेंदबाज़ी औसत से 21 विकेट अपने नाम किए थे।

तीन बार आईपीएल विजेता टीम का बने हिस्सा

प्रज्ञान ओझा के करियर की एक और ख़ास बात यह है कि वह तीन बार आईपीएल विजेता टीम में शामिल रह चुके हैं। साल 2009 में सबसे पहले उनकी टीम डेक्कन चार्जर्स ने आईपीएल का ख़िताब जीता और फिर इसके बाद साल 2013 व 2015 की आईपीएल चैंपियन टीम मुंबई इंडियंस का वह हिस्सा थे। ओझा चैंपियंस लीग टी-20 टूर्नामेंट जीतने वाली मुंबई इंडियंस टीम में भी शामिल थे।

प्रज्ञान ओझा

कुछ ऐसा रहा है अंतरराष्ट्रीय करियर

ओझा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 24 टेस्ट, 18 वनडे और 6 टी-20 मैच खेले हैं। उन्होंने टीम इंडिया के लिए डेब्यू 28 जून 2008 को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे मुकाबले में किया था। अच्छा इंटरनेशनल रिकॉर्ड होने के बावजूद ओझा का अंतरराष्ट्रीय करियर काफी छोटा रहा। साल 2009 में ओझा ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और मैच की पहली ही गेंद पर उन्होंने तिलकरत्ने दिलशान का कैच पकड़ा था। ऐसा करने वाले वह एकमात्र खिलाड़ी हैं। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 24 मुकाबलों में 30.26 की औसत से कुल 113 विकेट चटकाए हैं। वहीं 18 एकदिवसीय मैचों में उनके नाम 21 और 6 टी-20 में 10 विकेट दर्ज हैं।

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Arsalan Ahmer

The author Arsalan Ahmer