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जन्मदिन विशेष: साल दर साल कैसे बदला सचिन का खेल

सचिन तेंदुलकर, क्रिकेट की दुनिया का वो नाम जिसने अपने साथ कई युग को जिया। 24 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में सचिन ने करोड़ों लोगों की यादों को अपने रिकॉर्डों से सजाया है। क्रिकेट के पन्नों को जब पलटा जाएगा तो सचिन का नाम स्वर्णिम अक्षरों के साथ उनकी ख्याती की गवाही देंगे।

क्रिकेट जगत के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का आज 46वां जन्मदिन है। सचिन के इस खास मौके पर आइए पलटते हैं उनके करियर के पन्नों को और देखते हैं कि साल दर साल कैसे उनका खेल रिकॉर्ड बुक में पहुंचता गया।

स्कूल क्रिकेट से टेस्ट की शुरुआत

सोर्स – सोशल मीडिया

1988 – ये वो साल था जब क्रिकेट के मैदान पर सचिन ने पहली दस्तक दी थी। 14 साल 10 महीने के सचिन ने अपने स्कूल दोस्त विनोद कांबली के साथ मिलकर 664 रनों की अटूट साझेदारी कर एक नया रिकॉर्ड अपने नाम किया था। सचिन ने ये रिकॉर्ड फरवरी के महीने में बनाया था। साल के अंत में उन्हें मुंबई की रणजी टीम में शामिल किया गया जिसकी शुरुआत उन्होंने शतक के साथ की थी।

1989 – रणजी डेब्यू में शतकीय शुरूआत के बाद सचिन ने इस पारी को ईरानी ट्रॉफी और फिर दलीप ट्रॉफी में दोहराते हुए फर्स्ट क्लास क्रिकेट का नया रिकॉर्ड अपने नाम किया। साल के अंत में उन्हें भारतीय टीम में शामिल कर लिया गया। सचिन उस वक्त 16 साल के थे।

1990 – सचिन के करियर का ये सबसे अहम साल था। इंग्लैंड के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए टेस्ट में सचिन ने शतकीय पारी खेल मैच ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई थी। सचिन उस वक्त 17 साल और 107 के दिन के थे। उनका ये शतक भारत की ओर से सबसे कम उम्र में लगाया टेस्ट शतक बना।

वनडे क्रिकेट में शुरू हुआ सचिन का धमाका

सोर्स – सोशल मीडिया

1994 – सचिन टेस्ट में शतकों के साथ आगे बढ़ रहे थे। इंग्लैंड के बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया(1992) में भी सबसे कम उम्र में टेस्ट शतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था लेकिन वनडे क्रिकेट में उनके बल्ले से अभी तक कोई भी शतक नहीं आया था। साल के तीसरे महीने में सचिन पहली बार वनडे क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज की भूमिका में आए। न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने तूफानी पारी खेली और महज 49 गेंद में 82 रन बनाए।

78 मैच खेलने के बाद सचिन के करियर का वो पल भी आया जब इतिहास ने उनका पहला वनडे शतक देखा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए मुकाबले में सचिन ने वनडे क्रिकेट का अपना पहला शतक लगाया। इस शतक के बाद उनके बल्ले से कुल 49 शतक आए।

1996 – ये वो साल था जब सचिन भारत के हर घर में पहुंचे। भारतीय उपमहाद्वीप में विश्व कप का आयोजन हुआ और सचिन एक विश्व स्तरीय बल्लेबाज के रूप में सामने आए। इस टूर्नामेंट में उनके बल्ले से रिकॉर्ड 523 रन आए जो कि विश्व कप में किसी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सबसे अधिक रन था।

96 के विश्व कप से पहले उनके बल्ले से चार शतक आए थे लेकिन इसके बाद उन्होंने अपनी पारी को शतक में बदलने की रफ्तार बढ़ा दी थी। पूरे साल में उनके बल्ले से 6 शतक आए जिसके बाद शुरू हुआ रिकॉर्ड बनाने का सिलसिला।

शुरू हुआ रिकॉर्ड बनाने का सिलसिला

1998 – 1996 विश्व कप ने सचिन के खेल को पूरी तरह बदल दिया था। अगले कुछ साल क्रिकेट फैन्स के साथ दुनिया ने उनका प्रचंड फॉर्म देखा। साल की शुरुआत सचिन ने तीन दिवसीय मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दोहरे शतक से की। जो ये बताने के लिए काफी था कि उन्हें रोकना अब आसान नहीं। शारजाह में धमाकेदार पारी खेलने के साथ सचिन ने वनडे क्रिकेट में इस साल रिकॉर्ड 1894 रन बनाए जिनमें 9 शतक शामिल थे। इन शतकों के साथ सचिन वनडे क्रिकेट में सबसे अधिक शतक बनाने वाले खिलाड़ी भी बन चुके थे।

1999 – सचिन के करियर में ये साल अच्छे और बुरे दोनों पल लेकर आया। एक तरफ जहां विश्व कप के दौरान उन्होंने पिता को खोया तो दूसरी तरफ साल के अंत में उनके बल्ले से भारत की ओर वनडे क्रिकेट की सबसे बड़ी पारी आई। न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने 186 रनों की नाबाद पारी खेल नया रिकॉर्ड अपने नाम किया।

2001 – वनडे क्रिकेट में साल दर साल नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे सचिन ने इस साल क्रिकेट के इस एक दिवसीय फॉर्मेट में 10,000 का आंकड़ा पार कर लिया। वो ऐसा करने वाले पहले इंसान बने थे।

2003 – महान बल्लेबाज की लिस्ट में शामिल हो चुके सचिन अपने चौथे विश्व कप में हिस्सा ले रहे थे। भारतीय टीम फाइनल में पहुंची लेकिन सचिन का सपना पूरा नहीं हो पाया। हालाकि क्रिकेट के महाकुंभ में उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ नया इतिहास रचा। सचिन ने इस विश्व कप में सबसे अधिक 673 रन बनाए। आज भी इस रिकॉर्ड को कोई बल्लेबाज तोड़ नहीं पाया है।

2004 – सचिन के लिए यह साल दोहरे शतक का साल रहा। जहां उन्होंने साल की शुरूआत ऑस्ट्रेलिया में अपन पहले दोहरे शतक के साथ किया तो वहीं अंत बांग्लादेश के खिलाफ 248 रनों की नाबाद पारी के साथ। टेस्ट क्रिकेट में ये उनका सर्वोच्च स्कोर भी रहा। सचिन पाकिस्तान के खिलाफ भी दोहरे शतक के करीब पहुंच गए थे लेकिन भारत की पारी उस वक्त घोषित तक कर दी गई जब को 194 रन बनाकर खेल रहे थे।

टेनिस एल्बो के बाद मैदान पर रिकॉर्ड तोड़ वापसी

सोर्स – सोशल मीडिया

2005 – बढ़ते रिकॉर्ड और बढ़ते खेल के साथ सचिन की चोट भी बढ़ती जा रही थी। 2003 विश्व कप के बाद से ही उन्हें मैदान से बार बाहर जाना पड़ रहा था। 2004 के अंत और 2005 के कई महीने उन्हें टेनिस एल्बो से जुझना पड़ा। ये वो चोट थी जिसके बाद सचिन भी मानने लग गए थे कि वो वापसी नहीं कर पाएंगे। लेकिन क्रिकेट के खेल को अपने सबसे प्यारे खिलाड़ी का अभी और खेल देखना था। सचिन के करियर को अगर दो हिस्सों में बांटा जाए तो ये साल उनका करियर को दो भागों में बांटता है।

टेनिस एल्बो से पहले सचिन ने कुछ रिकॉर्ड तोड़े थे, लेकिन वापसी के बाद जो भी खेल दिखाया वो इतिहास बनता चला गया और सबसे पहले सामने आई टेस्ट क्रिकेट की बादशाहत। उन्होंने साल के अंत में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट शतक लगाते ही सुनील गावस्कर के 34 शतकों की संख्या को पार कर अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया।

2008 – भारत में आईपीएल का उदय हो रहा था और सचिन टेस्ट की नई इबारत लिख रहे थे। ब्रायन लारा के 11953 रनों को पार करने के साथ सचिन टेस्ट क्रिकेट में 12000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए थे। इस बीच उन्होंने भारत को ऑस्ट्रेलिया में सीबी सीरीज जीताने में भी अहम भूमिका निभाई थी।

पूरा हुआ सचिन का सपना

2010 – 1989 में वनडे डेब्यू करने वाले सचिन साल की शुरुआत में इस फॉर्मेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बने थे। दूसरी तरफ आईपीएल में उन्होंने सबसे अधिक रन बनाने का कारनाम किया तो वहीं सबसे लंबे फॉर्मेट में 169 मैच के साथ सबसे अधिक टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी के रूप में भी उनका नाम दर्ज हो गया। साल के अंत में उन्होंने साउथ अफ्रीका में अपने करियर का 50वां और 51वां टेस्ट शतक पूरा किया।

2011 – सचिन के करियर का सबसे अहम पल, 1992 में पहली बार विश्व कप खेलने वाले सचिन के विश्व कप जीतने का सपना पूरा हुआ। सचिन के बल्ले से इस बार दो शतक आए और इस टूर्नामेंट में उनके नाम रिकॉर्ड छह शतक दर्ज हुए। विश्व कप जीतने के बाद सचिन ने टेस्ट क्रिकेट में 15000 के आंकड़े को पार कर एक महाकीर्तिमान पूरा किया।

क्रिकेट को कहा अलविदा

आखिरी बार वानखेड़े के मैदान पर सचिन

2012 – पूरी दुनिया को सचिन के 100वें अंतरराष्ट्रीय शतक का बेसब्री से इंतजार था। बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप के दौरान सचिन ने इस महारिकॉर्ड को भी हासिल कर लिया। वनडे क्रिकेट में ये उनका 49वां शतक था। 23 दिसंबर को उन्होंने वनडे क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी।

2013 – ये वो साल था जब सचिन ने क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया। वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के साथ सचिन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को सदा के लिए अलविदा कह दिया। वो टेस्ट क्रिकेट में 200 मैच खेलने वाले पहले खिलाड़ी भी बने। क्रिकेट के मैदान पर सचिन की महानता और खेल प्रति उनकी सच्ची श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला किया।

सचिन के स्वर्णिम करियर का जब अंत हुआ तो उनके नाम कई अनगिनत रिकॉर्ड दर्ज हुए। सबसे अधिक मैच खेलने(टेस्ट 200, वनडे 463) के साथ सबसे अधिक रन(टेस्ट – 15921, वनडे – 18426) और सबसे अधिक शतक(टेस्ट- 51, वनडे -49) उनके ही नाम हैं।

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Shashank

The author Shashank

2011 विश्व कप के साथ शशांक ने अपनी खेल पत्रकारिता की शुरआत की। क्रिकेट के मैदान से लेकर हर छोटी बड़ी खबरों पर इनकी नज़र रहती है। खेल की बारीकियों से लेकर रिकॉर्ड बुक तक, हर उस पहलू पर नजर होती है जिसे आप पढ़ना और जानना चाहते हैं। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी इनकी गहरी रूची है। कई बड़े मीडिया हाउस को अपनी सेवा दे चुके हैं।