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सचिन स्पेशल: क्या होता अगर भारत को सचिन न मिलते

15 नवंबर, 1989 कराची का मैदान और विश्व क्रिकेट ने 16 साल के उस युवा बल्लेबाज की पहली झलक देखी जिसने आगे चलकर क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी। न सिर्फ क्रिकेट के खेल को बदला बल्कि इसे देखने का तरीका भी बदल दिया। देश की सड़कें शांत रहने लगीं, दफ्तर में छुट्टियों की अर्जियां बढ़ने लगीं, रेडियो-टीवी की मांग में इजाफा हुआ और घर-घर केबल का कनेक्शन पहुंचने लगा। पूरा भारत उस रात गहरी नींद में सोता था जब सचिन तेंदुलकर का बल्ला चलता था। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर भारत को सचिन तेंदुलकर न मिलते तो क्या होता?

क्रिकेट धर्म नहीं बन पाता

धर्मनिरपेक्ष भारत में कई धर्मों का समावेश है, जिसे मानने वाले लाखों-करोड़ों अनुयाई हैं। लेकिन खेल प्रशंसकों का एक ही धर्म बन पाया जिसे क्रिकेट कहा गया और क्रिकेट धर्म इसलिए बन पाया क्योंकि इस खेल के संदेश को हर दिल तक सचिन ने पहुंचाया। सचिन के एक शॉट पर लोग आज भी दिल हार जाते हैं। घर, गली और मोहल्लों से निकल कर क्रिकेट जब बड़े मैदान पर आया तो हर बच्चे ने खुद में सचिन को पाया। हर बच्चे का बस एक ही सपना होता था/है कि वो एक दिन बड़ा होकर सचिन बनेगा।

सचिन

हर घर में त्यौहार का मौसम होता था जब सचिन बल्लेबाजी के लिए उतरते थे। स्टेडियम खचाखच भरे होते थे हर दर्शक के हाथों में एक ही बैनर होता था जहां सचिन का नाम लिखा होता था। क्रिकेट से बाहर हर किसी की अपनी अलग दुनिया होती थी लेकिन तब बात सिर्फ सचिन की होती थी जब मुकाबला मैदान पर होता था।

जब सचिन तेंदुलकर ने अपनी गेंदबाजी से विरोधियों को किया था पस्त

चाय की टपरी से लेकर रेल के डिब्बों तक, दफ्तर के टेबल से साहब की कुर्सियों तक चर्चा का कोई अगर केन्द्र होता था तो वो सचिन की बल्लेबाजी थी। इसीलिए तो कहा जाता है कि भारत के लोग क्रिकेट को खेल नहीं मानते बल्कि इसे जीते हैं।

कैसे मिलती महानता की परिभाषा

क्रिकेट के खेल में महानता की परिभाषा क्या हो? वो कौन सी रेखा हो जिसे पार करने वाला महान कहलाए। ये ऐसे सवाल हैं जिसे लेकर सबके अलग-अलग मत हैं। आधुनिक क्रिकेट में महान खिलाड़ियों की परिभाषा हर सीरीज के बाद बदल जाती है लेकिन जो अटल हैं वो खुद सचिन हैं।

क्रिकेट के मैदान में कदम रखते ही हर खिलाड़ी को सचिन की कसौटी से गुजरना पड़ता है। स्कूल क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सचिन ने रिकॉर्ड की ऐसी कहानी लिखी है जिसे पार कर पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। वो विरले ही खिलाड़ी होते हैं जो सचिन के रिकॉर्ड से नजरें मिला पाते हैं। दूसरे खेलों को देखों तो इस दौर में भी महानता को लेकर अलग अलग तर्क होंगे लेकिन क्रिकेट की दुनिया में महानता की परिभाषा सचिन पर आकर खत्म हो जाती है।

देश को कैसे मिलते विश्व स्तरीय खिलाड़ी

सचिन जब मैदान पर अपना जलवा दिखाते थे तो मैदान से बाहर कई सपनों को आकार मिलता था। भारतीय क्रिकेट को नई पीढीं में अगर अच्छे क्रिकेटर मिले हैं तो इसके पीछे सचिन का खेल ही है। अगर सचिन क्रिकेट न खेलते तो शायद देश को न तो सहवाग मिलते और न ही कोहली। न तो क्रिकेट में मिताली का राज होता और न ही शेफाली वर्मा के रिकॉर्ड की खबर बनती। इनके अलावा कई और नाम हैं जिन्होंने सचिन को आदर्श मान क्रिकेट को अपनी जिन्दगी का अहम हिस्सा बनाया।

ऐसे में कोई सोच भी नहीं सकता कि अगर सचिन न होते तो भारतीय क्रिकेट का भविष्य क्या होता।

क्या होता रिकॉर्ड बुक का हाल

24 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में सचिन तेंदुलकर ने इतने रिकॉर्ड बनाए कि रिकॉर्ड बुक उनके नाम से पट गया है। रिकॉर्ड बुक के हर पन्ने में सचिन का नाम है। सचिन के नाम सबसे अधिक शतक (टेस्ट – 51, वनडे – 49) ,सबसे अधिक रन (टेस्ट -15921, वनडे -18426 ) और सबसे अधिक मुकाबले (टेस्ट -200, वनडे- 463 ) खेलने के रिकॉर्ड हैं।

सचिन अगर क्रिकेट में न होते तो शतकों के शतक से लोग आज वंचित रह जाते। कौन होता जो विदेशी जमीन पर टेस्ट खेलने का शतक (106) लगाता। लोग ये देख ही नहीं पाते कि एक कैलेंडर ईयर में कोई बल्लेबाज 11 शतक भी लगा सकता है।

सचिन कभी रिटायर नहीं होते

16 नवंबर 2013 वो दिन था जब सचिन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा। लेकिन वो खेल में अभी भी बने हुए हैं। सचिन को जब भारत रत्न दिया गया था तो वो देश के पहले खिलाड़ी बने थे जिन्हें सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था। इसके पीछे कई तर्क थे। सचिन का करियर धैर्य, तपस्या, लगन और ईमानदारी का सबसे बड़ा उदाहरण बना जो हर पल कई लोगों की जिन्दगी को एक नई प्रेरणा देता है।

अपनी इस कसौटी पर सचिन हर पल हर नए खिलाड़ी की परीक्षा लेते रहते हैं। करोड़ों दिलों पर राज करने वाले सचिन तीन महीने बाद एक बार फिर मैदान पर लैटने वाले हैं। एक बार फिर उनकी बल्लेबाजी, उनका खेल लोगों को रोमांचित करने वाला है।

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Shashank

The author Shashank

2011 विश्व कप के साथ शशांक ने अपनी खेल पत्रकारिता की शुरआत की। क्रिकेट के मैदान से लेकर हर छोटी बड़ी खबरों पर इनकी नज़र रहती है। खेल की बारीकियों से लेकर रिकॉर्ड बुक तक, हर उस पहलू पर नजर होती है जिसे आप पढ़ना और जानना चाहते हैं। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी इनकी गहरी रूची है। कई बड़े मीडिया हाउस को अपनी सेवा दे चुके हैं।