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सचिन ने क्रिकेट करियर को लेकर दिए गुरुमंत्र, ऐसे मिला था भारत को नंबर 3 पर बेस्ट बल्लेबाज!

क्रिकेट की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शुमार सचिन का इंटरनेशनल करियर करीब 24 साल लंबा रहा और इस दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया है। गुरूवार को अनएकेडमी के एक सेशन में गौरव कपूर के साथ उन्होंने अपने अनुभव समेत कई बातें शेयर की। सचिन ने बताया कि लंबे करियर के दौरान उन्होंने क्या सीख ली और उसपर कैसे अमल किया।

आप जितनी बात करेंगे उतना अधिक सीखेंगे

जब तेंदुलकर ने प्रथम श्रेणी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा, तो वह सबसे युवा थे। भारतीय क्रिकेटर ने स्वीकार किया कि वह शुरू में टीम मीटिंग में शामिल होने से शर्माते थे, लेकिन इससे पार पाने के लिए वह अपने सीनियरों से सवाल पूछने लगे। उन्होंने अपने कोच की सलाह, ‘जितना अधिक आप बात करेंगे, उतना ही आप सीखेंगे’, इसपर अमल करते हुए अपने सीनियरों से विभिन्न सवाल पूछकर अपनी जानकारी दुरुस्त की। तेंदुलकर ने याद करते हुए बताया कि एक बार उन्होंने इंग्लैंड के दिग्गज क्रिकेटर माइक गैटिंग से सही बल्ला कैसे चुनें, इसपर चर्चा की थी।

सलाह देने के अद्भुत तरीके

सचिन ने एक किस्सा याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने एक बार अपने साथी खिलाड़ी को उनकी सलाह नहीं मानने का गुर सिखाया था। रणजी ट्रॉफी में तमिलनाडु के खिलाफ एक मैच में सचिन के साथ दूसरे छोर पर रमेश पवार थे। रमेश पवार को देखते हुए विरोधी टीम ने अटैकिंग फील्ड सेट की। इसके बाद तेंदुलकर ने रमेश पवार से बातचीत के दौरान ऐसे जाहिर किया जैसे वह उन्हें संभलकर खेलने की सलाह दे रहे, लेकिन वह दरअसल पवार से बड़े शॉट्स लगाने की सलाह दे रहे थे।

तमिलनाडु के खिलाफ एक और दिलचस्प चाल के बारे में बताया। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में रिवर्स स्विंग का मुकाबला करने की अनोखी और मजेदार कहानी सुनाई।

उन्होंने कहा, “मैं क्रीज के बाहर खड़ा होने लगा। हेमंग बदानी गेंदबाज को तमिल में कवर प्वाइंट से कहते थे कि मैं बाहर खड़ा हूं। जैसे ही गेंदबाज ने रन-अप शुरू किया, मैं तब क्रीज में चला गया। क्षेत्ररक्षक गेंदबाज को जो बता रहा था, मैं उसके विपरीत अपना रुख बदलता रहा। मैच के बाद मैंने हेमंग से कहा कि मैं तमिल समझता हूं।”

सही प्रतिभा का सही इस्तेमाल और मौकों की दरकार

राहुल द्रविड़ को टेस्ट क्रिकेट में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक माना जाता है। तेंदुलकर ने द्रविड़ को तीसरे नंबर पर भेजने की शुरुआत और इसके पीछे की सोच बताई।

तेंदुलकर ने कहा “जब मैं भारतीय टीम का कप्तान बना, तो मुझे लगा कि द्रविड़ नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने के लिए अधिक उपयुक्त हैं। जब आप विदेश जाते हैं तो पिचें नम होती हैं। आपको वहां एक धैर्यवान बल्लेबाज की जरूरत होती है जो अधिक से अधिक गेंदें छोड़ सके और विपक्षी टीम को थका सके। भारत उस समय दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रहा था और इसलिए हमने वहां राहुल को आजमाया। इन वर्षों में, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण ने भी तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की, लेकिन राहुल ने अपने पूरे करियर के दौरान इस क्रम को बनाए रखा।”

पृथ्वी शॉ और शार्दुल ठाकुर दोनों ही भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं। दोनों ने मुंबई के मैदानों पर अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया और राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए आगे बढ़े। तेंदुलकर ने उन्हें पहली बार देखते ही उनकी क्षमता को पहचान लिया था।

मुंबई के बीकेसी ग्राउंड में तेंदुलकर ने शॉ को पहली बार बल्लेबाजी करते देखा था। उस समय आठ वर्षीय युवा शॉ बड़े आत्मविश्वास के साथ गेंदों को रेखा के बाहर भेज रहे थे, जिसे देखकर सचिन बहुत प्रभावित हुए।

शॉ को पांच-छह मिनट तक बल्लेबाजी करते देखने के बाद, तेंदुलकर ने कहा, “आप भविष्य के सितारे को देख रहे हैं, वह एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।”

तेंदुलकर ने शार्दुल ठाकुर की प्रतिभा को भी उनके बचपन में पहचान लिया था। जब शार्दुल ठाकुर को मुंबई में आयु-समूह क्रिकेट टूर्नामेंट में गेंदबाजी करते देखा। मास्टर ब्लास्टर का मानना ​​​​था कि ठाकुर के पास एक मजबूत एक्शन था और अगर वह अपनी फिटनेस में सुधार कर सकते थे, तो भारत क्रिकेट में उनका भविष्य उज्जवल है।

दबाव हैंडल करने में मास्टर

तेंदुलकर को अपने शानदार करियर के दौरान जिस दबाव का सामना करना पड़ा, वह किसी अन्य क्रिकेटर ने नहीं झेला है। दो दशक से भी अधिक समय के लिए देश की उम्मीदों बोझ उठाने वाले दिग्गज बल्लेबाज ने दबाव से निपटने पर कुछ अहम बातें बताईं।

तेंदुलकर ने कहा कि “दबाव से भागने की कोशिश न करें। दबाव आपका निरंतर साथी रहेगा। यदि आप जीवन में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो लोगों को आप से अपेक्षाएं होंगी। वे आपके पिछले प्रदर्शनों के कारण आपसे कुछ उम्मीद कर रहे हैं। 2011 विश्व कप के दौरान हमें दबाव की किस दिशा पर काम करना है यह पता चल गया था। यदि दबाव आपके पीछे है, तो यह आपको आगे बढ़ा देगा। इसे आप अपने सिर पर हावी न होने दें और डटकर सामना करें। ”

तेंदुलकर ने सत्र के अंत में कभी सपनों का पीछा बंद नहीं करने की सलाह दी।

तेंदुलकर ने कहा, “अगर हम जुनूनी हैं, अगर हम अनुशासित हैं और अगर हम हारने के बावजूद आगे बढ़ने की हिम्मत रखते हैं, तो हम अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।”

 

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