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शिवनारायण चंद्रपॉल के करियर की 3 सबसे यादगार पारियां

वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम की बात की जाती है तो सभी को क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड्स और ब्रायन लारा जैसे खिलाड़ियों की याद सबसे पहले आती है। लेकिन इसी में एक और खिलाड़ी का नाम शामिल है जिसने लगभग 21 से अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए विंडीज टीम को अलग मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। 

बाएं हाथ के बल्लेबाज शिवनारायण चंद्रपॉल जिन्होंने पहली बार जब अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था, तो उनके बल्लेबाजी करने के तरीके से सभी बड़ा हैरान हुए थे। दरअसल क्रीज पर खड़े होने का तरीका चंद्रपॉल का अन्य बल्लेबाजों से बिल्कुल अलग था और वह थोड़ा तिरछे होकर खड़े होते है। 

जिससे गेंदबाजों को उन्हें आउट करने के लिए काफी मेहनत भी करनी पड़ती थी। 16 अगस्त 1974 को गुयाना में जन्म लेने वाले चंद्रपॉल ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम साल 1994 में रखा था, जिसके बाद उन्होंने विंडीज टीम के लिए 164 टेस्ट और 268 वनडे मैच खेले। चंद्रपॉल के नाम टेस्ट क्रिकेट में 30 शतकीय पारियां भी दर्ज हैं। हम आपको उनके जन्मदिन के मौके पर 3 यादगार पारियों के बारे में बताने जा रहे हैं। 

 बनाम ऑस्ट्रेलिया (साल 2008, केनिंग्सटन टेस्ट मैच) 

साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया की टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर थी, जहां पर दोनों ही टीमों के बीच सीरीज का पहला टेस्ट मैच केनिंग्सटन के मैदान में खेला जा रहा था। इस मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 431 रन बनाए थे। वहीं विंडीज टीम की पहली पारी के दौरान चंद्रपॉल शानदार खेल रहे थे, लेकिन 86 के निजी स्कोर पर उनके सिर पर ब्रेट ली की एक तेज बाउंसर गेंद लग गई। 

इसके बाद असहज महसूस कर रहे चंद्रपॉल मैदान पर ही लेट गए थे, लेकिन उन्होंने हार ना मानते हुए अपनी पारी को जारी रखा और 118 रन बनाकर पवेलियन लौटे। हालांकि बाद में इस मैच में वेस्टइंडीज को 95 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। 

 बनाम भारत (साल 1997, बारबाडोस टेस्ट मैच) 

भारतीय टीम के फैंस को यह मैच जरूर याद होगा जिसमें 120 रनों के लक्ष्य का पीछा चौथी पारी में नहीं कर सकी थी। इस मैच में विंडीज टीम की पहली पारी में अकेले चंद्रपॉल ने जिम्मेदारी लेते हुए 137 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए टीम को पहली पारी में 298 तक पहुंचाया। वहीं भारतीय टीम भी पहली पारी में 319 रन बनाकर सिमटी थी। 

जिसके बाद वेस्टइंडीज की टीम दूसरी पारी में अचानक 140 रनों पर सिमटने के कारण भारत को 120 रनों का आसान लक्ष्य मिला था, लेकिन विंडीज गेंदबाजों ने 81 के स्कोर पर ही पूरी भारतीय टीम को समेट दिया और मैच में 38 रनों की शानदार जीत हासिल की। 

 बनाम ऑस्ट्रेलिया (साल 2003, एंटिगुआ टेस्ट मैच) 

टेस्ट क्रिकेट में किसी भी टीम के लिए चौथी पारी में 100 से अधिक के स्कोर का पीछा करना भी आसान काम नहीं होता है, लेकिन वेस्टइंडीज की टीम ने साल 2003 के एंटिगुआ टेस्ट मैच में 418 रनों के लक्ष्य का पीछा किया वह भी ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ। इस मैच की पहली 2 पारियों में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज की टीम 240 रन बनाकर सिमटी थी। 

यहां से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने टीम की दूसरी पारी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 417 रन बना दिए और वेस्टइंडीज की टीम को एक असंभव सा लक्ष्य दे दिया। विंडीज टीम ने भी अपने 4 विकेट 165 के स्कोर पर ही गंवा दिए थे। यहां से चंद्रपॉल ने रामनरेश सरवन के साथ टीम को लक्ष्य की तरफ बढ़ना शुरू किया जिसमें चंद्रपॉल ने शानदार 104 रनों की पारी खेलने के बाद जब पवेलियन लौटे तो विंडीज टीम जीत के काफी करीब पहुंच चुकी थी। जिसके बाद विंडीज टीम ने मैच में 3 विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। 

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