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विनोद कांबली: वो बल्लेबाज जिसका करियर छोटा मगर यादगार रहा

साल 1993 की बात है जब इंग्लैंड को तीसरे टेस्ट के लिए भारत का सामना वानखेड़े स्टेडियम में करना था। पहले बल्लेबाजी करते हुए अंग्रेजों ने 347 रन बनाए, जवाब में भारत ने भी शानदार शुरुआत की और पहले विकेट के लिए 109 रन जोड़े। अपने करियर का तीसरा मैच खेल रहा मुंबई का एक लोकल लड़का वानखेड़े के मैदान पर उतरता है, जो स्कूल और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में धमाका कर चुका था।

वानखेड़े से गुजरती समुद्री लहरों की तरह कांबली भी अनुशासित और शांत नजर आए। लेकिन कुछ डॉट गेंदें खेलने के बाद इस युवा क्रिकेटर ने 411 गेंदों तक दर्शकों को ‘विनोद’ में डुबो दिया। इंग्लिश गेंदबाजों पर जमकर प्रहार करते हुए उन्होंने मैदान के चारों कोनों में शानदार शॉट्स लगाए और 224 रनों की मैराथन पारी खेली। उनकी इस पारी के बलबूते भारत यह मैच एक पारी और 15 रन से जीत जाता है। खास बात यह है कि इस मैच में उन्होंने अपने जिगरी यार सचिन तेंदुलकर के साथ 194 रनों की साझेदारी की थी। जिनके साथ वह स्कूल क्रिकेट में 664 रनों की रिकॉर्ड पार्टनरशिप कर चुके थे।

यादगार साझेदारी

24 फरवरी 1988 को 14 वर्षीय सचिन तेंदुलकर और 16 वर्षीय विनोद कांबली ने स्कूल क्रिकेट में ऐतिहासिक साझेदारी की थी। दोनों ने हैरिस शील्ड के सेमीफाइनल मैच के दौरान श्रद्धाश्रम विद्यामंदिर का प्रतिनिधित्व करते हुए 664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की। यह क्रिकेट के किसी भी वर्ग में किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड है।

सचिन तेंदुलकर इस मैच में 326 रनों की पारी खेलकर नाबाद रहे थे, जबकि विनोद कांबली ने इस मैच में 349 रन बनाए थे।

दोहरा शतक का खास रिकॉर्ड

विश्व क्रिकेट में लगातार दो मैचों में दोहरा शतक लगाने के कारनामे को सिर्फ 6 बल्लेबाज अंजाम दे पाए हैं। इसमें भारत की ओर से विराट कोहली और विनोद कांबली का नाम शामिल है। करियर के शुरुआती चरण में ही कांबली ने अपने तीसरे और चौथे टेस्ट में दोहरा शतक जड़कर इतिहास रचा था।

कांबली ने साल 1993 में वानखेडे़ स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट सीरीज के तीसरे मैच में अपना पहला शतक (224) बनाया था। इसके अगले ही टेस्ट में कांबली ने दिल्ली में जिम्बॉब्वे के खिलाफ लगातार दूसरा दोहरा शतक जड़ते हुए 227 रन ठोके थे।

छोटा लेकिन यादगार करियर

हालांकि किसी ने नहीं सोचा था करियर के शुरुआत में सफलता की उड़ान भरने वाले कांबली का सफर महज़ 17 टेस्ट के बाद ही खत्म हो जाएगा। उन्होंने इस दौरान 54.20 की औसत से 1084 रन बनाए। वहीं वनडे क्रिकेट में भी कांबली ने 104 मैचों में 32.59 के सम्मानजनक औसत से 1024 रन बनाए। वह अपने जन्मदिन पर वनडे शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर हैं।

वहीं प्रथम श्रेणी क्रिकेट रिकॉर्ड से उनकी प्रतिभा का पता चलता है, जिसके 129 मैचों में उन्होंने 59.67 की औसत से 9965 रन बनाए।

लेकिन संख्या या नंबरों के विपरित कांबली को एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर, मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के करीबी दोस्त और एक अच्छे इंसान के रुप में जाना जाता है। उनका सफर भारतीय क्रिकेट में छोटा लेकिन यादगार रहा है।

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