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पिता की एक बात का सूर्य कुमार यादव पर हुआ ऐसा असर कि बन गए क्रिकेटर

भारत में क्रिकेट के प्रति जितनी दीवानगी देखने को मिलती है, उतना किसी अन्य खेल के प्रति देखने को नहीं मिलती। यही नहीं यहां पर क्रिकेटर बनने के बाद लोगों की लाइफ किस तरह से चेंज होती है, वह भी काफी दिलचस्प है। यही कारण है कि आज हर दूसरा युवा पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ क्रिकेट में भी करियर तलाशने से नहीं चूकता है। एक दशक पहले शुरू हुई इंडियन प्रीमियर लीग के जरिए कई ऐसी प्रतिभाएं सामने आई हैं जिनमें से एक नाम है सूर्य कुमार यादव का।

इस युवा खिलाड़ी ने भले ही अभी भारत की तरफ से किसी भी प्रारूप में अंतर्राष्ट्रीय मैच न खेले हो लेकिन इनमें टैलेंट की कोई कमी नहीं है। अगर इन्हें मौका दिया जाए तो यह भारतीय टीम में भी अपने आप को साबित करने से नहीं चूकेंगे। सूर्य कुमार यादव भले ही आज महाराष्ट्र में रह रहे हों लेकिन उनका जन्मस्थल उत्तर प्रदेश रहा है।

बचपन से ही स्पोर्ट्स में जाने का था मन
सूर्य कुमार यादव उत्तर प्रदेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में। उन्होंने आज क्रिकेट में इतना नाम इसलिए हासिल किया है क्योंकि वह बचपन से ही स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाना चाहते थे और उन्हें सबसे ज्यादा सपोर्ट उनके चाचा विनोद यादव से मिला था, जो कि खुद एक क्रिकेट कोच थे। वहीं परिवार की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन फिर भी उनके माता-पिता ने उन्हें अपना करियर चुनने का पूरा सपोर्ट किया।

सूर्य कुमार जब महज़ 10 साल के ही थे तभी उनका परिवार वाराणसी से मुंबई आ गया था। जहां पर उन्होंने स्कूली टीम से क्रिकेट खेलना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने यहां की प्रतिष्ठित ‘वेंगसरकर क्रिकेट अकादमी’ से क्रिकेट में प्रशिक्षण लिया। धीरे-धीरे उनके क्रिकेट की प्रतिभा सभी को दिखने लगी थी, जब उन्होंने सन 2010 में दिल्ली के खिलाफ फर्स्ट क्लास क्रिकेट के सत्र में खेलते हुए 89 गेंदों पर 73 रन बनाए थे। इसके बाद उन्होंने मुंबई की तरफ से घरेलू क्रिकेट में खेलना शुरू किया और इन्होंने अपने फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर में 20 मैच खेले और इनमें उन्होंने 50.96 की औसत से 1376 रन बनाए।

अपने फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर में सूर्य कुमार यादव ने 24 अर्द्धशतक और 12 शतक भी लगाए हैं। इस दौरान उन्होंने 200 रनों की एक विशाल पारी खेल सभी को अपनी प्रतिभा से परिचित करा दिया था। कहा जाता है कि सूर्य कुमार की लाइफ का सबसे टर्निंग प्वाइंट साल 2011-12 का ही समय था। जब उन्होंने मुंबई की ओर से खेलते हुए उड़ीसा के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में दोहरा शतक जमाया था। उन्होंने 2011-12 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में मुंबई की ओर से सर्वाधिक 754 रन बनाए थे।

इसके बाद ही सेलेक्टर्स की नजर उन पर पड़ी और इंडियन प्रीमियर लीग में उनका पदार्पण हुआ। उन्हें पहली बार साल 2012 में मुंबई इंडियंस द्वारा खरीदा गया। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अपने खेल में सुधार किया और मैच दर मैच अपने आप को साबित किया। मुंबई के अलावा उन्होंने 2014 से 2017 तक कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए भी आईपीएल खेला है।

पिता की बात का हुआ असर और बन गए क्रिकेटर
जानकारी के मुताबिक सूर्यकुमार यादव बचपन से ही स्पोर्ट्स में अपना करियर बनाना चाहते थे। लेकिन उन्हें क्रिकेट से जितना लगाव था, उतना ही लगाव उन्हें बैडमिंटन से भी था। ऐसे में एक दिन उनके पिता ने उन्हें अपने पास बुलाया और बोला कि इन दोनों खेलों में से किसी एक को अपने करियर के रूप में चुनो, तब उन्होंने काफी सोच-समझकर क्रिकेट में ही अपना करियर आगे बढ़ाया। बताते चलें कि सूर्य कुमार यादव की पत्नी देवीशा भी उनकी बल्लेबाज़ी से काफी प्रभावित हुई थीं और यहीं से उनकी लवस्टोरी आगे बढ़ी थी।

 .@surya_14kumar carried his good form from the #VIjayHazareTrophy to the #DeodharTrophy scoring runs at an astonishing strike rate of 152.12 for the title winners ???#CricketMeriJaan pic.twitter.com/0D3EudFRTW

इसके अलावा सूर्य कुमार कॉमेडी फिल्मों के बहुत बड़े प्रशंसक हैं, जिसके चलते उन्होंने हेरा-फेरी मूवी (सन 2000) लगभग 500 से ज्यादा बार देखी होगी। इसके अलावा वह अपना खाली समय पशु-पक्षियों के साथ भी बिताते हैं, क्योंकि इन्हें जानवरों से भी खासा लगाव है।

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