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The Ashes : एशेज की 5 यादगार सीरीज

एशेज सीरीज को टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा व सबसे पुरानी सीरीज माना जाता है। दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें इसके परिणाम पर टिकी रहती हैं, क्योंकि इस सीरीज को दोनों टीमें अपने मान-सम्मान की लड़ाई मानती हैं।

ये सही भी है क्योंकि इस सीरीज की नींव ही ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड क्रिकेट के बीच सर्वश्रेष्ठता की जंग पर आधारित है। साल 2001 से इंग्लैंड कभी भी अपने घर में एशेज सीरीज नहीं हारी है, ऐसे में इस बार भी वह इस सीरीज पर कब्जा जमाना चाहेंगे।

137 वर्ष पुरानी इस टेस्ट सीरीज में यूं तो कई यादगार सीरीज हो चुकी हैं, जिसमें से पांच सर्वश्रेष्ठ व यादगार सीरीज के बारे में हम आपको बता रहे हैंः

बॉडीलाइन सीरीज, सन् 1932/33

बॉडीलाइन सीरीज
तस्वीरः विकिपीडिया

एशेज की सबसे विवादित सीरीज सन् 1932-33 की सीरीज को माना जाता है। जब ऐतिहासिक फॉर्म में चल रहे डॉन ब्रेडमैन को रोकने के लिए इंग्लिश गेंदबाजों ने गेंद से उनके शरीर को निशाना बनाया था।

इंग्लैंड के कप्तान डगलस जार्डिन ने अपने गेंदबाजों को ब्रेडमैन के पैरों में व शॉर्ट गेंदबाजी करने की सलाह दी। इस दौरान कप्तान डगलस ने सभी क्षेत्ररक्षकों को लेग साइड में लगा दिया और टीम के मुख्य तेज गेंदबाज व बेहद सटीक गेंदबाजी के लिए मशहूर हार्लोड लारवुड को मोर्चे पर लगाया।

इंग्लैंड ने पूरी सीरीज में ये नुस्खा अपनाया और 4-1 से सीरीज पर कब्जा कर लिया। यही नहीं डॉन ब्रेडमैन के औसत में भारी गिरावट दर्ज हुई और वह लुढ़क कर 56.57 ही रह गई।

इसी वजह से बॉडीलाइन शब्द चलन में आया, जिसमें बल्लेबाज स्टंप को कवर करने के बजाय अपने शरीर को बचाने में ज्यादा व्यस्त रहे। जिसकी ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने तीखी आलोचना की, यही नहीं इसकी वजह से दोनों देशों के राजनैतिक रिश्ते भी खराब हुए।

अजेय ऑस्ट्रेलिया, सन् 1948

डॉन ब्रेडमैन शानदार फॉर्म में थे
तस्वीरः विकिपीडिया

सन् 1948 में ऑस्ट्रेलियाई टीम की कमान आखिरी बार डॉन ब्रेडमैन के पास थी। टीम ने 4-0 से सीरीज में जीत दर्ज करके, इस दिग्गज को शानदार विदाई दी। चौथे टेस्ट मैच में आखिरी दिन ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 404 रन बनाने थे, ये मुकाबला हेडिंग्ले में खेला जा रहा था।

कंगारुओं ने इतिहास रचते हुए मात्र तीन विकेट खोकर इस लक्ष्य को हासिल कर लिया। जिसमें आर्थर मॉरिस ने 182 और डॉन ब्रेडमैन ने नाबाद 173 रन की पारी खेलकर इंग्लैंड पर सनसनीखेज जीत दर्ज की।

लेकिन सीरीज का सबसे यादगार मुकाबला पांचवा टेस्ट रहा था, ओवल में हुए उस मुकाबले में डॉन ब्रेडमैन को 100 की औसत के लिए चार रन बनाने थे। लेकिन वह अपनी आखिरी टेस्ट पारी में एरिक हॉलीज की गेंद पर बोल्ड हो गए थे और उनकी टेस्ट औसत 99.94 पर आकर अटक गई।

लिली और थॉमसन के बीच सर्वश्रेष्ठता की जंग, 1974/75

पीठ में लगी चोट से उबरकर क्रिकेट के मैदान पर वापसी करने वाले ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिली और साथी तेज गेंदबाज जेफ थॉमसन जिन्होंने अपने पिछले टेस्ट मैच में 110 रन देकर एक भी विकेट नहीं ले पाए थे। यानी दोनों तेज गेंदबाजों पर खुद को साबित करने का बोझ था।

सन् 1974-75 के एशेज सीरीज में इन दोनों कंगारू गेंदबाजों के बीच सर्वश्रेष्ठता की जंग चल रही थी। थॉमसन ने एडिलेड टेस्ट मैच के दौरान टेनिस खेलने के दौरान चोटिल होने से पहले 17.93 के औसत से 33 विकेट झटके। जबकि डेनिस लिली ने 23.94 के औसत से 25 विकेट झटके।

ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज पर 4-1 से कब्जा किया और इंग्लैंड के कप्तान माइक डेन्स को सीरीज के दौरान चौथे मुकाबले में खुद को भी ड्रॉप करना पड़ा। हालांकि 6 मैचों की सीरीज इंग्लैंड ने आखिरी मुकाबले में 4 रनों से जीत दर्ज की, जबकि टीम को चार मुकाबलों हार झेलनी पड़ी।

इयान बॉथम के नाम रही एशेज सीरीज, सन् 1981

इयान बॉथम
तस्वीरः स्काई स्पोर्ट

एशेज सीरीज में ऐसा कम ही देखने को मिलता रहा है कि कोई खिलाड़ी अकेले दम पर सीरीज जितवा दे। लेकिन सन् 1981 में इयान बॉथम ने ऐसा करके दिखाया था। उन्होंने सीरीज की शुरूआत इंग्लैंड के कप्तान के रूप में की थी, लेकिन टीम नॉटिंघम में पहला मैच हार गई और दूसरा मुकाबला लॉर्ड्स में ड्रॉ हो गया। जिसके बाद उन्होंने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया।

तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड को एक और झटका लगा, जब टीम को हेडिंग्ले टेस्ट मैच में फॉलोआन खेलना पड़ा। लेकिन इयान बॉथम ने काउंटर अटैक करते हुए नाबाद 149 रन की पारी खेली और ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 130 रन का लक्ष्य रख दिया। उसके बाद तेज गेंदबाज बॉब विलिस ने 43 रन देकर 8 कंगारू बल्लेबाजों को आउट करके इंग्लैंड को 18 रन की जीत दिला दी।

सीरीज अब खुल गई थी और चौथा मुकाबला अहम हो गया था, यहां बॉथम की कातिलाना गेंदबाजी का कमाल देखने को मिला और उन्होंने 1 रन देकर 5 विकेट लिए और इंग्लैंड को 29 रनों से जीत दिला दी। उसके बाद पांचवा मुकाबला ओल्ड ट्रेफर्ड में खेला गया, जहां इयान बॉथम ने 118 रन की पारी खेली और इंग्लैंड मुकाबला 103 रन से मैच जीत गया। इस तरह इंग्लैंड ने एशेज सीरीज 3-1 से अपने नाम कर ली।

इंग्लैंड ने रोमांचक तरीके से सीरीज पर किया कब्जा, साल 2005

एंड्रू फ्लिंटॉफ व ब्रेट ली
तस्वीरः स्काई स्पोर्ट

साल 2005 में हुई एशेज सीरीज अपने आप में क्रिकेट के इतिहास की सबसे बेहतरीन टेस्ट सीरीज रही है। 19 वर्ष के सूखे को खत्म करते हुए इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को परास्त किया था, हालांकि लॉर्ड्स में हुए पहले मैच में इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया ने 239 रन से हराकर इंग्लैंड को जख्मों को और कुरेद दिया।

लेकिन दूसरे मैच से पहले तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा चोट की वजह से बाहर हो गए और इंग्लैंड की किस्मत पलट गई। इसके अलावा एंड्रू फ्लिंटॉफ ने ऑलराउंड खेल दिखाते हुए इंग्लैंड की जीत में अहम योगदान दिया। हालांकि जीत के लिए चौथी पारी में कंगारू टीम को 282 रन बनाने थे और एक समय उनके 8 बल्लेबाज 175 रन पर आउट हो गए। लेकिन आखिरी पलों में माइकल कास्प्रोविच स्टीव हार्मिसन का शिकार हो गए और इंग्लैंड ने मुकाबला दो रन से जीत लिया।

तीसरा मुकाबला ड्रा रहा और ट्रेंटब्रिज में हुए चौथ मुकाबले में शेन वार्न के चार विकेटों के बावजूद इंग्लैंड विजयी रहा। सीरीज में 2-1 की बढ़त बनाने वाली अंग्रेज टीम को पांचवां मुकाबला सिर्फ ड्रॉ करवाना था। आखिरी दिन इंग्लैंड का शीर्ष क्रम तकरीबन बिखर गया और टीम पर हार का संकट मंडराने लगा। लेकिन केविन पीटरसन ने बेहतरीन 158 रन व एश्ले जाइल्स ने अर्द्धशतकीय पारी खेलकर न सिर्फ मैच बचाया बल्कि इंग्लैंड के पक्ष में एशेज सीरीज भी करवाई।

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Manoj Tiwari

The author Manoj Tiwari

100 MB Sports में कंटेट राइटर का पद संभालते हुए काम का लुत्फ उठा रहे हैं। कम बोलने में विश्वास और काम को ज्यादा तवज्जो देने में भरोसा रखते हैं। मुंबई में साल भर से ज्यादा समय बिता चुके हैं, शहर को लेकर खुद की अपनी राय रखते हैं। स्पोर्ट्स हमेशा से पसंदीदा बीट रही है, अपने करियर की पारी शुक्रवार मैगजीन से शुरू की, जो स्पोर्ट्सकीड़ा और स्पोर्ट्सवाला से होते हुए अब 100 MB Sports तक आ गयी है। बीच में हमने राजनीति से लेकर मनोरंजन और यात्रा बीट पर भी काम किया, लेकिन स्पोर्ट्स की भूख खत्म नहीं हुई। मायानगरी में जब काम नहीं कर रहे होते हैं, तो शहर घूम रहे होते हैं। अभी के लिए बस इतना ही। हमें और जानना है, तो लिखा हुआ पढ़ लीजिये।