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कुछ ऐसा रहा है लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर का क्रिकेट में सफर

लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर सुनील मनोहर गावस्कर विश्व क्रिकेट के सबसे महान नामों से एक हैं। भारतीय टीम के सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में सुनील गावस्कर को सचिन तेंदुलकर भी अपना आदर्श मानते हैं। उनके नाम काफी समय तक सबसे अधिक टेस्ट रनों और टेस्ट शतकों का रिकॉर्ड रहा जिसे करीब 2 दशक बाद भारत के ही मास्टर ब्लास्टर के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा।

सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली के साथ सुनील गावस्कर       PIC Credit@Criclife

बचपन से था क्रिकेट का शौक

देश की मायानगरी मुंबई (तब बंबई) में 1949 में जन्में सुनील को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। महज़ 6-7 साल की उम्र में ही उन्होंने क्रिकेट का ककहरा सीखना शुरु कर दिया और देश के लिए खेलना उनका सपना बन गया। कहते हैं कि बचपन में भी वह गेंदबाजों के पसीने छुड़वा देते थे और घंटो तक क्रीज़ पर डटे रहना उनके लिए आम बात थी।

स्कूल क्रिकेट में गाड़े झंडे

1965 में गावस्कर के स्कूल सेंट जेवियर्स हाई स्कूल ने हैरी शील्ड ट्रॉफी जीती थी जिसमें लिटिल मास्टर के प्रदर्शन की काफी सराहना हुई। स्कूल के लिए खेलते हुए 1966 में उन्हें भारत का सर्वश्रेष्ठ स्कूलबॉय क्रिकेटर चुना गया। वह स्कूल के दिनों से ही पारी का आगाज किया करते थे, जिसने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट को सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज दिया।

रणजी क्रिकेट में खराब रही शुरुआत

स्कूल क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ने के बाद सुनील गावस्कर ने 1968/69  में रणजी क्रिकेट करियर की शुरुआत की। हालांकि उनका डेब्यू अच्छा नहीं रहा और कर्नाटक के खिलाफ अपने पहले मैच में वह बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। पहले मैच में खराब प्रदर्शन के चलते वो लोगों के निशाने पर आ गए और उनके सेलेक्शन को लेकर सवाल उठने लगे। सेलेक्शन टीम में उनके अंकल माधव मंत्री शामिल थे और सुनील गावस्कर का सेलेक्शन इसी का नतीजा माना गया। इसके बाद उन्होंने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए राजस्थान के खिलाफ अगले ही मैच में शतक जड़ दिया। गावस्कर ने इसके बाद दो शतक और जड़े और 1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई।

पहले मैच से छा गए लिटिल मास्टर

वेस्टइंडीज के खिलाफ 5 टेस्ट की सीरीज के पहले मैच में वह उंगुली में चोट के कारण नहीं खेल पाए और उनका डेब्यू दूसरे टेस्ट मैच में हुआ। इस टेस्ट में उन्होंने 2 अर्धशतक जमाए और साबित कर दिया वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। भारत ने पहली बार वेस्टइंडीज के खिलाफ और उसकी धरती पर जीत हासिल की। अगले 3 टेस्ट मैचों में उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की जमकर खबर ली और शतकों की लाइन लगा दी। इस दौरान लिटिल मास्टर के बल्ले से 3 शतक और 1 दोहरा शतक भी निकला जड़ा। इस सीरीज़ से गावस्कर भारत के नए सितारे बनकर उभरे और विश्व क्रिकेट में अपना डंका बजा दिया।

आखिरकार विजय मर्चेंट के बाद भारत को अपना वह बल्लेबाज मिल गया था जिसकी उसे तलाश थी और जो शायद एक सदी में एक ही बार उभरता है।

लिटिल मास्टर के विशाल रिकॉर्ड

टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहले 10,000 रन बनाने के अलावा, उनके नाम 2005 तक सबसे ज़्यादा टेस्ट सेंचुरी लगाने का रिकॉर्ड था। उनके नाम डेब्यू सीरीज में सबसे ज़्यादा रन (774) बनाने का रिकॉर्ड है। वेस्ट इंडीज के खिलाफ एक सीरीज में सबसे ज़्यादा रन (774) बनाने का रिकॉर्ड भी सनी के नाम है।

ब्रैडमैन का तोड़ा था रिकॉर्ड

PIC Credit@CricketMonthly

विश्व क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन के 29 टेस्ट शतक का विश्व रिकॉर्ड सुनील गावस्कर ने ही तोड़ा था। 1987 में रिटायर होने वाले गावस्कर के नाम 34 शतक दर्ज हैं। बाद में 2005 में उनका यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर (51) ने तोड़ा।

कई अवॉर्डों से नवाज़ा गया

क्रिकेट के खेल में बहुमूल्य योगदान के लिए गावस्कर को कई सम्मानों से नवाज़ा गया है। इसमें सबसे बड़ा सम्मान पद्मश्री और पद्म भूषण हैं। इसके अलावा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी, टेस्ट श्रृंखला का नाम ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर और भारत के सुनील गावस्कर के नाम पर रखा गया है। गावस्कर के गृहनगर वेंगुर्ला में उनके नाम का स्टेडियम है। 2012 में उन्हें बीसीसीआई की तरफ से कर्नल सी.के.नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाज़ा गया था।

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