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IPL 2019 : पांच खिलाड़ी जिनको नज़रअंदाज़ करना पड़ा भारी

इस साल का आईपीएल निश्चित रूप से टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ संस्करणों में से एक रहा और प्लेऑफ में क्वालीफाई करने वाली दिल्ली कैपिटल की टीम ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया। दिल्ली के टीम प्रबंधन ने दिखाया है कि कैसे नए बदलाव और युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए टीम सफलतापूर्वक टूर्नामेंट में आगे बढ़ सकती है। इस सीजन टीम के युवा खिलाड़ियों ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ा योगदान दिया। मुझे इस तथ्य से प्यार है कि रिकी पॉन्टिंग और सौरव गांगुली ने युवाओं का समर्थन किया जिसपर वे खरे उतरे।

अंक तालिका के सबसे निचले स्थान पर रहने वाली 4 टीमों ने कई गलतियां की। इनके खराब प्रदर्शन की एक सबसे बड़ी वजह टीमों का संतुलित न होना था। कुछ खिलाड़ियों को जरूरत से ज्यादा समर्थन मिला, जबकि कुछ बंद पिटारे में ही रह गए।

टूर्नामेंट में 5 युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी ऐसे भी रहे जो अपनी टीम के अभियानों में बहुत बड़ा अंतर पैदा कर सकते थे।

वॉशिंगटन सुंदर –

19 वर्षीय वाशिंगटन सुंदर ने 2017 में राइजिंग पुणे सुपर जायंट के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। आरसीबी ने उन्हें 2018 में खरीदा था, लेकिन उन्हें केवल 7 मैचों में खेलने का अवसर मिला। इस सीजन आरसीबी ने एक बार फिर गेंदबाजी ऑलराउंडर पर दांव खेलते हुए 3.2 करोड़ रुपये में उन्हें खरीदा था। प्लेऑफ से बाहर होने तक के सफर में आरसीबी के ज्यादातर मैचों में प्लेइंग इलेवन से सुंदर का नाम नदारद था। आरसीबी एक बार फिर घरेलू खिलाड़ियों से लैस एक ठोस टीम का निर्माण करने में विफल रही। सुंदर ने सिर्फ 3 मैच खेले और 4 विकेट चटकाए। इनमें से 3 विकेट उन्होंने अंतिम लीग मैच में हासिल किए जिसमें टीम विजयी रही। इससे साफ हो जाता है कि सुंदर को अगर टूर्नामेंट में पहले मौका दिया जाता तो वह अपने प्रदर्शन से अंतर पैदा कर सकते थे।

शिवम दुबे –

मुंबई के हरफनमौला खिलाड़ी शिवम दुबे को आरसीबी ने पांच करोड़ रुपये की मोटी रकम में इस बार खरीदा था। इस युवा ऑलरांउडर को तीन मैचों के बाद ही प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था जिन्हें बाद में सिर्फ एक मैच में टीम की प्लेइंग इलेवन में हिस्सा दिया गया। शिवम दुबे आरसीबी के लिए एक शानदार खिलाड़ी हो सकते थे जिन्होंने इस सीजन से ठीक पहले घरेलू क्रिकेट में अविश्वसनीय प्रदर्शन किया था। मैं उसे बड़े मंच पर प्रदर्शन करते हुए देखना चाह रहा था। फ्रैंचाइज़ी के पास उनके जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी पर भरोसा जताते हुए अपने स्टार खिलाड़ियों पर निर्भरता को कम करने का मौका था। दुर्भाग्य से आरसीबी के 14 मैचों में युवा खिलाड़ी को केवल 4 मैचों में खेलने का मौका मिला। मुझे लगता है कि उनपर थोड़ा विश्वास रखने की जरुरत थी। आईपीएल ने से हर साल कई प्रतिभावान खिलाड़ी मिले हैं। सुंदर और दुबे आरसीबी के लिए एक्स फैक्टर साबित हो सकते थे।

राहुल त्रिपाठी –

एक और युवा खिलाड़ी जिन्होंने आईपीएल में अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया था, वो हैं राहुल त्रिपाठी। मैंने पहली बार 2017 में राइजिंग पुणे सुपर जाइंट के लिए इस दाएं हाथ के बल्लेबाज को खेलते देखा था। जहां उन्होंने 93 रन के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ स्कोर के साथ टूर्नमेंट में कुल 319 रन बनाए थे। इस साल राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें रिटेन करने का फैसला तो किया लेकिन 8 मैचों में वे कभी नंबर 6,5 या चौथे नबंर पर बल्लेबाज़ी करते नज़र आए। किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ एक मैच में राहुल ने बतौर ओपनर बेहतरीन बल्लेबाज़ी करते हुए अर्दशतकीय पारी खेली थी। इससे साफ है कि राजस्थान को बतौर ओपनर मौका देना चाहिए था। इसके बावजूद मुंबई इंडियंस के खिलाफ अगले ही मैच में उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। आरआर के गलतियों की वजह से उन्हें महत्वपूर्ण मौकों पर इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। खराब बैटिंग लाइन अप राजस्थान के असफल रहने के मुख्य कारणों में से एक है।

सरफराज खान –

किंग्स इलेवन पंजाब ने इस साल अपने अभियान की बेहतरीन शुरुआत करते हुए पहले 4 मैचों में से 3 मैच जीते थे। सरफराज खान ने इस दौरान लगातार 30+ स्कोर के साथ मध्य क्रम में बड़ा योगदान दिया। शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद न सिर्फ पंजाब ने उन्हें निचले क्रम में भेजा बल्कि प्लेइंग इलेवन से भी बाहर कर दिया। इस सीज़न के 8 मैचों में उन्होंने 180 रन बनाए। मुझे लगता है कि पंजाब ने यहां एक इन-फॉर्म बल्लेबाज को दरकिनार करते हुए डेविड मिलर और निकोलस पूरन को मौका देने के चक्कर में टीम को संतुलन को बिगाड़ दिया। वह एक अद्भुत युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जिन्हें अधिक से अधिक मौके मिलने चाहिए थे।

शुभमन गिल –

मेरे लिए इस सीजन की खोज़ युवा स्टार बल्लेबाज़ शुभमन गिल हैं। गिल एक ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने आत्मविश्वास और समय के साथ परिपक्वता का परिचय दिया। उनके खेल को देखने के बाद मुझे हैरानी होती है कि कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें ओपनिंग करने का मौका क्यों नहीं दिया। 14 मैचों में 296 रन ख़राब नहीं हैं लेकिन वह कुछ और बना सकते थे। शीर्षक्रम में केकेआर ने सुनील नरेन पर ज्यादा ही भरोसा जताते हुए उन्हें लगातार मौके दिए। यह एक जुआ था जिसने पिछले सीज़न में काम किया था, लेकिन इस साल नरेन संघर्ष करते नज़र आए जिससे केकेआर को घाटा हुआ। वहीं बल्लेबाज़ी क्रम में गिल के साथ 3 से 7वे नंबर तक प्रयोग किया गया जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा। करने भेज़ा गया। ज्यादातर बार वह आंद्रे रसेल के साथ मैच फिनिश करने में असक्षम दिखे। हालांकि जब उन्हें नियमित सलामी बल्लेबाज के रुप में भेजा गया तब तक केकेआर के लिए बहुत देर हो चुकी थी।

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