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जब इतिहास रचने से सात कदम दूर रह गए थे सहवाग

भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे आक्रामक सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग के नाम टेस्ट क्रिकेट के कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं। 10 साल पहले आज के दिन उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज होने वाला था जहां तक विश्व क्रिकेट का कोई भी दिग्गज नहीं पहुंच पाया था। लेकिन श्रीलंका के खिलाफ खेले गए उस मुकाबले में सहवाग महज सात रन से वो खास रिकॉर्ड अपने नाम करने से चूक गए।

तीसरे तिहरे शतक से चूके सहवाग

भारतीय टेस्ट इतिहास में पहला और दूसरा तिहरा शतक लगाने वाले सहवाग मुंबई के ब्रेबोर्न में खेले गए इस टेस्ट में तीसरे तिहरे शतक के करीब पहुंच गए थे। दर्शक इस ऐतिहासिक लम्हें का इंतजार कर रहे थे लेकिन सहवाग का कारवां 293 रनों पर जा कर रुक गया। मुथैया मुरलीधरण ने उन्हें अपनी ही गेंद पर कैच कर इतिहास को बनने से रोक दिया।

पहले बल्लेबाज बन जाते सहवाग

टेस्ट इतिहास में आज तक चार खिलाड़ी ऐसे हुए जिन्होंने दो बार तिहरा शतक लगाया। इस लिस्ट में सहवाग के अलावा डॉन ब्रेडमैन, ब्रायन लारा और क्रिस गेल जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। सहवाग अगर इस मुकाबले में सात और रन बना लेते तो तीन तिहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन जाते।

श्रीलंका के 393 रनों के जवाब में भारत ने ठोस शुरुआत की थी और जब दूसरे दिन का खेल जब खत्म हुआ तो उस वक्त सहवाग 284 रनों पर नाबाद लौटे थे। तीसरे दिन स्टेडियम दर्शकों के भरा पड़ा था। हर कोई सहवाग के रिकॉर्ड को देखने आया था। लेकिन सहवाग थोड़े दबाव में दिख रहे थे, रन बनाना उनके लिए आसान नहीं लग रहा था और ऐसे में दिन के चौथे ओवर में वो मुरली को रिटर्न कैच दे बैठे। उन्होंने अपनी पारी में 40 चौके और सात छक्के लगाए थे।

कुछ समय के लिए पूरे स्टेडियम में सन्नाटा छा गया। दर्शक एक ऐतिहासिक पल से चूक गए थे लेकिन जब सहवाग ड्रेसिंग रूप की ओर बढ़े तो हर किसी ने खड़े होकर इस अद्भुत पारी को खास सम्मान दिया।

पारी और 24 रनों से जीता था भारत

सहवाग की इस पारी के बाद महेन्द्र सिंह धोनी के बल्ले से नाबाद 100 रनों की पारी आई। इन दोनों के अलावा चार बल्लेबाजों ने अर्द्धशतकीय पारी खेली जिसकी बदौलत भारत ने 9 विकेट पर 726 रन पर पहली पारी घोषित कर दी। भारत के पास 333 रनों की विशाल बढ़त थी जिसके सामने श्रीलंका की दूसरी पारी 309 रनों पर सिमट गई।

पढ़ें जो मेरे साथ हुआ वो धोनी के साथ न हो: सहवाग

 

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Shashank

The author Shashank

2011 विश्व कप के साथ शशांक ने अपनी खेल पत्रकारिता की शुरआत की। क्रिकेट के मैदान से लेकर हर छोटी बड़ी खबरों पर इनकी नज़र रहती है। खेल की बारीकियों से लेकर रिकॉर्ड बुक तक, हर उस पहलू पर नजर होती है जिसे आप पढ़ना और जानना चाहते हैं। क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी इनकी गहरी रूची है। कई बड़े मीडिया हाउस को अपनी सेवा दे चुके हैं।