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आईसीसी ने इंग्लैंड को क्यों दी थी विश्वकप 2019 की मेजबानी

विश्वकप 2019 में अभी तक किसी टीम ने चार मुकाबले पूरे नहीं खेले हैं, 18 लीग मैचों में से 4 मुकाबले बारिश की भेंट चढ़ चुके हैं। जिससे दुनिया भर के क्रिकेट फैंस में भारी निराशा और गुस्सा देखने को मिला, क्योंकि बारिश ने विश्वकप के रोमांच को इस बार बुरी तरह से प्रभावित किया है। क्रिकेट प्रेमियों की ये नाराजगी सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही है और लोग इंग्लैंड में विश्वकप के आयोजन पर सवालिया निशान उठा रहे हैं।

चार मुकाबले हो चुके हैं रद्द

टूर्नामेंट में अबतक कुल 18 मुकाबले हो चुके हैं, जिसमें से 4 मुकाबले बारिश की वजह रद्द हो गए। विश्वकप के इतिहास में रद्द हुए मुकाबलों की बात करें तो साल 2015 तक कुल 9 मैचों का परिणाम नहीं आया है, जिसमें से दो मुकाबले बिना टॉस हुए दो मुकाबले रद्द हुए। वहीं इस विश्वकप में अबतक 3 मुकाबले रद्द हो चुके हैं। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार के टूर्नामेंट में बारिश का खलल कितना ज्यादा रहा है।

इंग्लैंड की मेजबानी पर सवालिया निशान

चार साल के अंतराल पर होने वाले क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट का फैंस बेसब्री से इंतजार करते हैं। विश्वकप का आयोजन इंग्लैंड में तय था, पूरी दुनिया से लोग समय निकालकर खास तौर पर विश्वकप के मुकाबले देखने के लिए इस देश की यात्रा पर आए। लेकिन बारिश के चलते दर्शकों में भारी निराशा है और इस वजह से आईसीसी पर ये सवाल उठने लगे कि क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट को इंग्लैंड में क्यों आयोजित किया गया।

आईसीसी तय करता है मेजबानी

हालांकि विश्वकप इंग्लैंड में हो रहा है, इसका दोष आयोजकों को देना ठीक नहीं है। क्योंकि विश्वकप की मेजबानी किस देश को देना है, ये आईसीसी तय करता है और आईसीसी ने इंग्लैंड व वेल्स को साल 2006 में ही विश्वकप की मेजबानी सौंप दी थी। दुनिया के शीर्ष देश 30 अप्रैल 2006 को एकत्र हुए और सभी ने मिलकर साल 2007 से लेकर 2019 तक सभी आईसीसी इवेंट के मेजबानों का निर्णय लिया था। जिसमें विश्वकप की मेजबानी भी शामिल थी।

रोटेशन प्रणाली नहीं हुई सही से लागू

सन् 1983 के बाद आईसीसी ने विश्वकप के आयोजन में रोटेशन प्रणाली को अपनाया। जिसकी वजह से पहली बार सन् 1987 में विश्वकप इंग्लैंड से निकल एशियाई उपमहाद्वीप(भारत, पाकिस्तान व श्रीलंका), फिर इसके बाद ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज में आयोजित हुआ। हालांकि भारत के बढ़ते दबदबे ने आईसीसी को झुकाया भी और साल 2023 में तीसरी विश्वकप की मेजबानी हासिल की है।

तो 2011 का विश्वकप ऑस्ट्रेलिया में होता

साल 2011 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड विश्वकप की मेजबानी चाहते थे, लेकिन भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान ने आईसीसी को मोटा फायदा देने का वादा करके मेजबानी हथिया ली। हालांकि इसके लिए आईसीसी ने वोटिंग का आयोजन किया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड को मात्र तीन वोट, जबकि एशियाई देशों को 10 वोट मिले।

इंग्लैंड को ही मिलती मेजबानी

साल 2015 में रोटेशनल पॉलिसी की वजह से साल 2015 के विश्वकप का आयोजन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को मिला। जबकि सन् 1999 में आखिरी बार विश्वकप की मेजबानी करने वाले इंग्लैंड को साल 2019 की मेजबानी मिली।

भारत दिखाता है अपना दम

दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड होने के नाते भारत को साल 2023 के विश्वकप की मेजबानी मिल चुकी है और आईसीसी को साल 2027 के मेजबानी की घोषणा करना बाकी है। हालांकि यदि सही से रोटेशनल प्रणाली आईसीसी लागू करता तो साल 2011 का विश्वकप ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में, साल 2015 का विश्वकप भारतीय उपमहाद्वीप में और साल 2019 का विश्वकप इंग्लैंड में ही होता।

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Manoj Tiwari

The author Manoj Tiwari

100 MB Sports में कंटेट राइटर का पद संभालते हुए काम का लुत्फ उठा रहे हैं। कम बोलने में विश्वास और काम को ज्यादा तवज्जो देने में भरोसा रखते हैं। मुंबई में साल भर से ज्यादा समय बिता चुके हैं, शहर को लेकर खुद की अपनी राय रखते हैं। स्पोर्ट्स हमेशा से पसंदीदा बीट रही है, अपने करियर की पारी शुक्रवार मैगजीन से शुरू की, जो स्पोर्ट्सकीड़ा और स्पोर्ट्सवाला से होते हुए अब 100 MB Sports तक आ गयी है। बीच में हमने राजनीति से लेकर मनोरंजन और यात्रा बीट पर भी काम किया, लेकिन स्पोर्ट्स की भूख खत्म नहीं हुई। मायानगरी में जब काम नहीं कर रहे होते हैं, तो शहर घूम रहे होते हैं। अभी के लिए बस इतना ही। हमें और जानना है, तो लिखा हुआ पढ़ लीजिये।